करीब 1000 किलोमीटर का सफर... 308 पहिए... और रफ्तार महज 10 से 20 किलोमीटर प्रतिदिन. सुनने में यह आंकड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन बेल्जियम से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जा रहे इस महाबली ट्रक की यही हकीकत है. पारादीप बंदरगाह से सड़क के रास्ते निकला यह विशालकाय ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए चंदौली पहुंच चुका है, लेकिन यहां पिछले दो दिनों से इसके पहिए थमे रहे. वजह थी आगे का रास्ता. ट्रक पर लदी विशाल मशीन को सामान्य सड़क से आगे निकालना संभव नहीं था, इसलिए अब इसके लिए रास्ता तैयार किया गया फिर ये महाबली वाराणसी पहुंचा.
करीब 1000 किलोमीटर के इस सफर को पूरा करने में इसे करीब दो महीने लग चुके हैं. यानी औसतन यह महाबली ट्रक एक दिन में करीब 16 से 18 किलोमीटर ही आगे बढ़ा है. कई जगह रास्ता ठीक मिला तो इसकी रफ्तार करीब 20 किलोमीटर प्रतिदिन रही, जबकि मुश्किल रास्तों पर यह 10-12 किलोमीटर तक सिमट गई. सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस ट्रक को आगे बढ़ने में मुश्किल हो रही है, उसे देखने के लिए लोगों में जबरदस्त उत्सुकता है. स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूसरे इलाकों से भी लोग यहां पहुंच रहे हैं. कोई ट्रक के 308 पहियों को देखकर हैरान है तो कोई इसके ऊपर रखी विशाल मशीन के साथ सेल्फी ले रहा है.
जहां महाबली पहुंचा, वहां रास्ता बनाना पड़ा
यह कोई सामान्य ट्रक नहीं है. इसके पहियों की संख्या ही इसे खास बनाती है. 308 पहियों वाला यह विशाल ट्रक एक भारी मशीन यानी रिएक्टर को लेकर चल रहा है. इसे बेल्जियम से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर स्थित बलरामपुर चीनी मिल कुंभी तक पहुंचाया जाना है. लॉजिस्टिक्स मैनेजर अनेक भारती के मुताबिक, रास्ते में कई जगह ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़े अवरोध सामने आ रहे हैं. इन्हें संबंधित विभागों और अधिकारियों से अनुमति लेकर हटाया जा रहा है. चंदौली में भी फिलहाल इसी तरह की चुनौती सामने आई है. ट्रक को आगे ले जाने के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है ताकि यह सुरक्षित तरीके से रिंग रोड के ऊपर की तरफ निकल सके. यानी इस पूरे सफर में सिर्फ ट्रक ही आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि कई जगह उसके लिए रास्ता भी तैयार किया जा रहा है.
अप्रैल में बेल्जियम से निकली थी मशीन
लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, इस विशाल मशीन का सफर कई महीने पहले शुरू हुआ था. अप्रैल में यह मशीन बेल्जियम से समुद्री रास्ते के जरिए भारत के लिए रवाना हुई थी. करीब एक महीने के समुद्री सफर के बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची. इसके बाद इसे सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश ले जाने की चुनौती शुरू हुई. पारादीप से मशीन को 308 पहियों वाले विशेष ट्रक पर लादा गया और झारखंड तथा बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश की ओर रवाना किया गया. इस तरह समुद्र से शुरू हुआ सफर अब सड़क पर चल रहा है और हर कुछ किलोमीटर के बाद नई चुनौती सामने आ रही है.
चंदौली में क्यों रुक गया ट्रक?
पारादीप से निकलने के बाद यह ट्रक झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा में पहुंचा. इसके बाद चंदौली की तरफ आया. यहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास रिंग रोड के नजदीक पहुंचने के बाद ट्रक को रोकना पड़ा. आगे जाने के लिए रास्ता मशीन की ऊंचाई और चौड़ाई के लिहाज से उपयुक्त नहीं था. लॉजिस्टिक्स टीम मौके पर रास्ता तैयार किया. लॉजिस्टिक्स मैनेजर अनेक भारती ने बताया कि रास्ते में कई तरह के अवरोध आ रहे हैं और संबंधित विभागों तथा अथॉरिटी की अनुमति के बाद इन्हें क्लियर कराया जा रहा है. उन्होंने मशीन को रिएक्टर बताया, हालांकि इसकी तकनीकी जानकारी देने के लिए खुद को अधिकृत नहीं बताया.
2 से 3 सप्ताह और लगेगा
चंदौली में रुका यह ट्रक अभी अपने सफर के बीच में है. लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, इसे अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में अभी 2 से 3 सप्ताह का समय और लग सकता है. यानी चंदौली से आगे निकलने के बाद भी यह सफर सामान्य ट्रकों की तरह तेज नहीं होगा. रास्ते में आने वाली ऊंचाई, चौड़ाई, पुल, ओवरब्रिज और अन्य अवरोधों को देखते हुए पहले रास्ते की जांच होगी और फिर ट्रक को आगे बढ़ाया जाएगा. इसी वजह से इस पूरे अभियान को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्सुकता बनी हुई है.
ट्रक की खबर सुनकर बिहार से भी पहुंच रहे लोग
इस महाबली ट्रक को देखने के लिए सिर्फ आसपास के लोग ही नहीं पहुंच रहे हैं. बिहार के दुर्गावती से भी लोग इसे देखने चंदौली पहुंच रहे हैं. ट्रक देखने पहुंचीं नीलम ने कहा कि उन्होंने इस ट्रक को सोशल मीडिया पर वायरल होते देखा था. इतना बड़ा ट्रक और उस पर इतनी बड़ी मशीन देखकर वह इसे अपनी आंखों से देखने पहुंचीं. बिहार के दुर्गावती से आए अब्दुल वारिस ने बताया कि इस ट्रक को लेकर लगातार चर्चा हो रही थी. उन्होंने सुना कि कई जगह इसे निकालने के लिए रास्ता बनाना पड़ा, कुछ जगहों पर अवरोध हटाए गए और ओवरब्रिज तक को उठाने की जरूरत पड़ी. इसी उत्सुकता में वह इसे देखने चंदौली पहुंच गए. उनका कहना था कि अभी वह रिंग रोड के पास खड़े होकर देख रहे हैं कि इतनी बड़ी मशीन को यहां से किस तरह निकाला जाएगा.
समुद्र में ऐसे सामान देख चुके हैं, लेकिन सड़क पर पहली बार
इस महाबली ट्रक को देखने वालों में चंदौली और बिहार के आम लोगों के साथ तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल हैं. पास के गांव के रहने वाले मरीन इंजीनियर संजय यादव भी इसे देखने पहुंचे. उन्होंने बताया कि वह जहाजों पर इससे भी बड़े सामान देख चुके हैं, लेकिन समुद्र के रास्ते आने वाली इतनी बड़ी मशीन को सड़क के रास्ते इस तरह ले जाते हुए देखना अपने आप में अलग अनुभव है. उनके मुताबिक, सोशल मीडिया पर 308 पहियों वाले ट्रक की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में इसे देखने की उत्सुकता बढ़ी है.
उदय गुप्ता