देश के कई शहरों की मेट्रो में सीट मिलना मुश्किल हो जाता है, लेकिन पटना मेट्रो की मौजूदा तस्वीर कुछ अलग नजर आती है. शिवांग शुक्ला की 'Mo of Everything' के लिए तैयार ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पटना मेट्रो के कई स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की संख्या फिलहाल काफी कम दिखाई देती है. रिपोर्ट में यह सवाल उठाया गया है कि 50 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में मेट्रो होने के बावजूद आखिर लोग इसका ज्यादा इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे हैं.
ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 तक पटना मेट्रो केवल 4.8 किलोमीटर लंबे रूट पर संचालित हो रही है और फिलहाल सिर्फ चार स्टेशन ही चालू हैं. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मेट्रो की कनेक्टिविटी अभी न तो रेलवे स्टेशन तक पहुंची है और न ही एयरपोर्ट तक. ऐसे में शहर के बड़े हिस्से के लिए मेट्रो अभी भी सुविधाजनक परिवहन का विकल्प नहीं बन पाई है.
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रिपोर्ट में स्थानीय लोगों से बातचीत का भी जिक्र किया गया है. कई यात्रियों का कहना है कि शेयरिंग ई-रिक्शा या ऑटो से सफर करना फिलहाल मेट्रो की तुलना में सस्ता पड़ता है. वहीं मौजूदा रूट भी शहर के सभी प्रमुख इलाकों को नहीं जोड़ता, इसलिए लोग अब भी सड़क परिवहन को प्राथमिकता दे रहे हैं.
देखें ये रिपोर्ट
पीएम मोदी ने रखी थी आधारशिला
पटना मेट्रो परियोजना की आधारशिला वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी. परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन अक्टूबर 2025 में हुआ था. विपक्ष ने आरोप लगाया था कि विधानसभा चुनाव से पहले केवल कुछ स्टेशनों के साथ परियोजना को जल्दबाजी में शुरू किया गया. हालांकि सरकार का कहना है कि परियोजना का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है.
सरकारी योजना के अनुसार, 2027 तक पटना मेट्रो में कुल 25 स्टेशन संचालित करने का लक्ष्य है. वहीं जुलाई 2026 में पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के निदेशक ने अधिकारियों को निर्माण कार्य तेज करने और लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने के निर्देश भी दिए थे.
रिपोर्ट में एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया. शिवांग शुक्ला ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों की मेट्रो में जहां सीट मिलना मुश्किल होता है, वहीं पटना मेट्रो में इतनी जगह थी कि मेरे साथ मेरा बैग भी आराम से सीट पर बैठ गया.
हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि शहर को बेहतर सार्वजनिक परिवहन की जरूरत है. विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे मेट्रो नेटवर्क का विस्तार होगा, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य प्रमुख इलाकों से कनेक्टिविटी बढ़ेगी, वैसे-वैसे यात्रियों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना है.
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