प्राइवेट जेट के किराए में आ जाएगी लग्जरी कार! जानें 1 घंटा बादलों में उड़ने का क्या है रेट

अगर भारत में एक घंटे के लिए प्राइवेट जेट का किराया जान लिया, तो आम आदमी के होश उड़ सकते हैं. अगर आप भी प्राइवेट जेट की बुकिंग या उसकी रईसी के पीछे छिपे खर्च को समझना चाहते हैं, तो यह खबर पढ़ें.

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एक घंटे की उड़ान और लाखों का बिल (Photo: Pexels) एक घंटे की उड़ान और लाखों का बिल (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:02 PM IST

हममें से कई लोग आसमान में उड़ते प्राइवेट जेट्स को देखकर सोचते हैं कि काश एक बार इसमें सफर करने का मौका मिले. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बादलों के ऊपर इस 'शाही सवारी' का आनंद लेने के लिए आपको अपनी जेब कितनी ढीली करनी पड़ती है? प्राइवेट जेट का मालिक होना तो दूर, इसे महज एक घंटे के लिए बुक करने का किराया ही इतना है कि उसमें एक मिडिल क्लास इंसान की साल भर की कमाई निकल जाए. आइए जानते हैं भारत में प्राइवेट जेट बुकिंग और इसकी खरीदारी का पूरा गणित.

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घंटों के हिसाब से लगते हैं लाखों

अगर आप किसी खास ट्रिप के लिए प्राइवेट जेट बुक करना चाहते हैं, तो इसका किराया सुनकर आपके होश उड़ सकते हैं. भारत में चार्टर प्लेन का किराया प्रति घंटे के हिसाब से तय होता है. एक छोटे जेट के लिए आपको हर घंटे के ₹1.5 लाख से ₹2 लाख तक देने पड़ सकते हैं. वहीं, अगर आप ज्यादा सुख-सुविधाओं वाले बड़े और लग्जरी जेट्स की बुकिंग करते हैं, तो यह आंकड़ा ₹8 लाख प्रति घंटा के पार भी चला जाता है. यानी सिर्फ 2-3 घंटे के सफर के लिए आपको किसी महंगी कार की कीमत के बराबर पैसा चुकाना पड़ सकता है.

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प्राइवेट जेट खरीदना हर किसी के बस की बात नहीं है. भारत में एक छोटे और हल्के प्राइवेट प्लेन की शुरुआती कीमत ही ₹15 से ₹35 करोड़ के आसपास होती है. अगर आप अत्याधुनिक और बड़े जेट्स के शौकीन हैं, तो यह कीमत ₹100 करोड़ से ₹500 करोड़ से भी अधिक हो सकती है. जहां पुराने जेट करीब ₹16-17 करोड़ में मिल जाते हैं, वहीं नए ब्रांडेड जेट्स के लिए अरबों रुपये खर्च करने होते हैं.

जेट खरीदने के बाद असली खर्चा तो उसे खड़ा करने और उड़ाने में आता है. एक प्राइवेट जेट के मालिक को हर साल औसतन ₹1.5 करोड़ सिर्फ पार्किंग (हैंगर), बीमा और रखरखाव पर खर्च करने होते हैं. इसके अलावा, पायलट की सालाना सैलरी ही लगभग ₹60 लाख से शुरू होती है. ईंधन का खर्च और एयरपोर्ट लैंडिंग फीस जैसी लागतें इस बजट को और भी भारी बना देती हैं.

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