पुतिन के देश का ये शहर को क्यों कहलाता है 'सिटी ऑफ द डेड', यहां जाने वाला नहीं लौटता!

दारगाव्स, रूस का एक रहस्यमय शहर है, जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं - सिर्फ दिलेर ही हौसला जुटा पाते हैं और क्यों आम लोगों को यहां जाने से बचना चाहिए. आइए जानते हैं.

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दारगाव्स, जिसे रूस में मृतकों का शहर कहा जाता (Photo: Pixabay) दारगाव्स, जिसे रूस में मृतकों का शहर कहा जाता (Photo: Pixabay)

अजय भारतीय

  • नई दिल्ली,
  • 02 दिसंबर 2025,
  • अपडेटेड 12:32 PM IST

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4-5 दिसंबर को भारत आ रहे हैं. कहा जा रहा है कि उनका ये दौरा भारत-रूस संबंधों में नई ऊर्जा भरेगा. देशभर में उनके स्वागत की तैयारियां चल रही हैं. वैसे रूस और भारत के बीच रिश्ता सदियों पुराना है, भारत के लोग अक्सर वहां छुट्टियां मनाने जाते रहें हैं. रूस के कई खूबसूरत लोकेशन भारतीयों को बेहद पसंद आते हैं, लेकिन रूस का एक रहस्यमय शहर भी है, जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं - सिर्फ दिलेर ही हिम्मत जुटा पाते हैं और क्यों आम लोगों को यहां जाने से बचना चाहिए.

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रूस के इस शहर में हैं छिपे कई रहस्य

रूस के इस शहर का नाम - ‘दारगाव्स’ है, जिसे ‘सिटी ऑफ द डेड’ यानी ‘मृतकों का शहर’ कहा जाता है. यह रूस के सुदूर साउथ-वेस्ट हिस्से में काकेशस पहाड़ों के बीच स्थित है. प्राकृतिक सुंदरता से घिरी ये डरावनी लोकेशन रहस्यमय है, फिर भी साहसी पर्यटक ही इसे देखने जाते हैं. जिन सैलानियों के लिए मौत भी एक एडवेंचर है, वे ही यहां इतिहास और थ्रिल के अनोखे मेल का रोमांचक को अनुभव कर पाते हैं.

दारगाव्स में डरावना जैसा क्या है?

दारगाव्स असल में कोई शहर नहीं है, बल्कि प्राचीन कब्रों और तहखानों का एक कब्रिस्तान है. जहां 14वीं से 18वीं शताब्दी तक के लगभग 99 पत्थर के क्रिप्ट (कब्रें) हैं, जिनमें 10,000 से अधिक लोगों के अवशेष रखे गए हैं. बताया जाता है कि स्थानीय लोग यहां अपने प्रियजनों को उनके कपड़ों और सामानों के साथ दफनाते थे. कब्रें पत्थर की बनी हुई हैं, जो बड़ी ही अनूठी डिजाइन की हैं, इनमें कुछ तो बहुमंजिला हैं.

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ancient-origins.net की रिपोर्ट के अनुसार, दारगाव्स में मौजूद कब्रें असल में किसी न किसी परिवार से जुड़ी होती थीं, जहां वे मृत्यु होने पर अपने सगे-संबंधियों को दफनाते थे. कई कब्रों में आज भी मानव अवशेष जैसे खोपड़ी की हड्डियां मौजूद हैं. कुछ अन्य में चप्पू भी मिलता है, जो मृत्यु के बाद की यात्रा का प्रतीक बताया जाता है. वहां के लोग कब्रिस्तान के आस-पास की डरावनी कहानियों की वजह से बहुत कम जाते हैं.

दारगाव्स जाने से क्यों बचना चाहिए?

अक्सर दिन में ही लोग दारगाव्स को देखने के लिए जाते हैं, लेकिन बहुत कम ही यहां रात में जाने की हिम्मत जुटा पाते हैं. वजह ये इलाका पहाड़ियों के बीच बिल्कुल सुनसान है और रात में बेहद ही भयावह लगता है. रही सही कसर दारगाव्स को लेकर प्रचलित डरावनी कहानियां पूरी कर देती हैं. कुछ किंवदंतियों में ये तक कहा गया है कि जो कोई यहां जाता है, वह कभी वापस नहीं लौटता! तो सच-सच बताइए क्या आप इस जगह पर रात में घूमने जा पाएंगे.

 

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