एक घंटे में साइबर ठगी का पैसा 1,754 खातों में टिका देता था, पकड़ा गया 25 साल का मास्टरमाइंड

साइबर ठगी के मास्टरमाइंड को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जिसका हाथ करीब 1071 करोड़ रुपये की ठगी में रहा है. पुलिस ने बताया है कि वह डिजिटल अरेस्ट या अन्य साइबर ठगी के जरिए से आने वाली कम को एक घंटे में अलग-अलग हिस्सों में बांटता फिर उसको 1754 बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करता है. उसका कनेक्शन चीन में बैठे साइबर ठगों से था.

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साइबर ठगी का मास्टर माइंड एक घंटे में रकम को अलग-अलग हिस्सों बांटता था. (Photo: AI Generated) साइबर ठगी का मास्टर माइंड एक घंटे में रकम को अलग-अलग हिस्सों बांटता था. (Photo: AI Generated)

रोहित कुमार

  • नई दिल्ली ,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:39 PM IST

साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला केस सामने आया है, जहां  25 साल के शख्स मास्टर माइंड निकला है. गुजरात पुलिस ने इस शख्स को असम से गिरफ्तार किया और पुलिस ने उसको लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं. वह 1 घंटे के अंदर 1754 बैंक में रुपयों को ट्रांसफर कर देता है. उस पर करोड़ों की साइबर ठगी के आरोप हैं. 

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पुलिस के मुताबिक, आरोपी देशभर में हुए 1,090 साइबर क्राइम के केस में कथित तौर पर शामिल था. साथ ही 1,071.5 करोड़ रुपये के गैर कानूनी लेनदेन से कनेक्शन है. ये जानकारी पीटीआई ने अपनी रिपोर्ट में दी है. 

CID क्राइम की सेल ने आरोपी का नाम रफीकुल आलम बताया है और उसको असम के बारपेटा जिले से गिरफ्तार किया. साथ ही जांच में खुलासा हुआ है कि चीन में बैठे अपराधियों से संपर्क में था, ये दोनों ही पॉपुलर मैसेजिंग ऐप का यूज करता था.

फर्जी लेटर से बनाता था शिकार 

जानकारी के मुताबिक, गांधीनगर स्थित साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CCE) ने बताया है कि महाराष्ट्र पुलिस और सुप्रीम कोर्ट के फर्जी लेटर को आधार बनाकर वह लोगों को शिकार बनाते थे. 

जांच के दौरान 10 मामलों को रोका 

एक वरिष्ठ नागरिक को डिजिटल अरेस्ट किया किए जाने के एक अलग मामले की जांच के दौरान देशभर में 10 मामलों को भी समय रहते रोकने में सफलता मिली. CCE के मुताबिक, आरोपी एक अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का मास्टरमाइंड है. 

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CCE ने बताया है कि पीड़ितों के बयान और टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन के आधार पर टीम ने बारपेटा शहर पहुंची और रेड मारी. 

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तीन दिनों तक चली थी घर की रेकी 

टीम ने मुख्य मनी लाउंड्रर के घर की करीब तीन दिनों तक गुप्त तरीके से रेकी की गई. फिर उसके टेक्निकल प्रोडक्ट के साथ उसे गिरफ्तार किया. 

क्रिप्टोकरेंसी में रकम कन्वर्ट करता 

पुलिस ने बताया है कि आरोपी डिजिटल अरेस्ट और दूसरे साइबर फ्रॉड से आने वाली रकम को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करता था. साथ ही वह ठगी गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीन ट्रांसफर करता था. 

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1,754 बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता

यहां गौर करने वाली बात यह है कि आरोपी साइबर ठगी से ठगे गए रुपयों को एक घंटे के अंदर छोटे-छोटे हिस्सों बांटता और फिर उसको 1,754 बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता. ऐसा जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए किया जाता है. 

मैसेजिंग ऐप से डिटेल्स शेयर होती थी 

पुलिस ने बताया है कि आरोपी चीन में मौजूद साइबर क्रिमिनल्स के साथ वॉट्सऐप और टेलीग्राम की मदद से फाइनेंशियल डिटेल्स को शेयर करता था. इसमें स्कैनर, यूजर आईडी और पासवर्ड और क्रिप्टो वॉलेट आदि की जानकारी होती थी. 

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23 क्रिप्टोवॉलेट फोन से बरामद 

पुलिस को आरोपी के फोन से कुल 23 क्रिप्टो वॉलेट मिले हैं. इन वॉलेट में करीब 16 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है. गुजरात पुलिस ने बताया है कि आरोपी देशभर में कुल 1090 साइबर ठगी के केस में शामिल था. इन केस में कुल 1,071.5 करोड़ रुपये की रकम शामिल रही है. 

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