14 साल में सबसे कमजोर तीसरी तिमाही, आखिर क्यों घट रही दुनिया भर में स्मार्टफोन की सप्लाई?

सस्ते स्मार्टफोन मार्केट से गायब होते जा रहे हैं. इतना ही नहीं 14 साल में पहली बार भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में इतनी कमजोर तिमाही दर्ज की गई है. क्या वजह है और आगे क्या होगा, आइए जानते हैं.

Advertisement
स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट

आजतक टेक्नोलॉजी डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:42 PM IST

AI की बढ़ती मांग अब आपके स्मार्टफोन की कीमत पर भी असर डाल रही है. मेमोरी चिप की कमी से दुनिया भर में फोन की सप्लाई घटी है. भारत में भी तीसरी तिमाही में शिपमेंट 20% तक गिरने का अनुमान है. ऐसे में बजट फोन खरीदने वालों के लिए आने वाले महीने मुश्किल हो सकते हैं.

अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं, तो आने वाले दिनों में आपको अपनी जेब कुछ ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है. फोन में बेहतर कैमरा, ज्यादा रैम और बड़ी स्टोरेज देने वाली कंपनियां अब एक अलग परेशानी से जूझ रही हैं. उन्हें इन फीचर्स के लिए जरूरी मेमोरी चिप महंगी मिल रही हैं. इसका असर फोन की लागत, कीमत और बाजार में उपलब्ध मॉडल पर पड़ रहा है.

Advertisement

14 साल में सबसे खराब हालत

दुनिया के स्मार्टफोन बाजार से आई ताजा रिपोर्ट इसी परेशानी की ओर इशारा करती है. काउंटरपॉइंट रिसर्च के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, जुलाई से सितंबर 2026 के बीच दुनिया भर में स्मार्टफोन शिपमेंट पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 20% गिर गया.

यह भी पढ़ें: लॉन्च हुआ सस्ता 5G फोन, मिलेगी 5000mAh की बैटरी, 120Hz का डिस्प्ले, इतनी है कीमत

तीसरी तिमाही के लिहाज से यह 2012 के बाद सबसे निचला स्तर है. यानी करीब 14 साल में किसी तीसरी तिमाही के दौरान बाजार ने इतनी कमजोर स्थिति नहीं देखी थी.

लेकिन इस खबर का असर सिर्फ मोबाइल कंपनियों तक सीमित नहीं है. इसका सीधा संबंध उन ग्राहकों से है जो 10,000 से 20,000 रुपये के बजट में नया फोन खरीदना चाहते हैं. सवाल यह है कि आखिर फोन की मेमोरी चिप की कमी क्यों हो रही है, AI का इससे क्या संबंध है और क्या आने वाले दिनों में स्मार्टफोन खरीदना और महंगा हो सकता है?

Advertisement

AI की दुनिया को चाहिए ज्यादा मेमोरी, फोन कंपनियों पर बढ़ा दबाव

इस परेशानी के केंद्र में दो तरह की मेमोरी चिप हैं. पहली है DRAM, जिसका इस्तेमाल फोन की रैम में होता है. दूसरी है NAND फ्लैश मेमोरी, जिसका इस्तेमाल फोटो, वीडियो, ऐप और दूसरी फाइलों को स्टोर करने के लिए किया जाता है.

आज AI कंपनियां बड़े-बड़े डेटा सेंटर बना रही हैं. इन डेटा सेंटर में AI मॉडल को ट्रेन करने और चलाने के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी और दूसरे चिप की जरूरत होती है. AI से जुड़े कामों में इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की मांग भी तेजी से बढ़ी है. चिप बनाने वाली कंपनियां ज्यादा मुनाफा देने वाले प्रोडक्ट्स पर अपनी कैपेसिटी लगा रही हैं. इससे स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी की सप्लाई और कीमत पर दबाव बढ़ रहा है.

यह भी पढ़ें: ₹39,900 का Apple HomeView लॉन्च, अब AI संभालेगा आपका घर! जानें क्या करेगा ये गैजेट

यह समझना जरूरी है कि AI डेटा सेंटर सीधे आपके फोन की सारी मेमोरी नहीं खरीद रहे. परेशानी यह है कि चिप बनाने की क्षमता सीमित है और अलग-अलग तरह की मेमोरी की मांग बढ़ रही है. ऐसे में फोन बनाने वाली कंपनियों को जरूरी चिप पहले के मुकाबले महंगी मिल सकती हैं.

Advertisement

स्मार्टफोन की कीमत तय करने में स्क्रीन, प्रोसेसर, कैमरा, बैटरी और मेमोरी जैसे कई हिस्सों की लागत शामिल होती है. जब मेमोरी की कीमत बढ़ती है, तो फोन बनाने की कुल लागत भी बढ़ जाती है. कंपनियों के सामने दो रास्ते होते हैं. वे इस बढ़ी लागत को खुद सहन करें या इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों से वसूलें. मौजूदा बाजार में कई कंपनियां कीमत बढ़ाकर या कम मुनाफे वाले मॉडल की सप्लाई घटाकर अपना खर्च संभालने की कोशिश कर रही हैं.

दुनिया भर में फोन की कीमतें बढ़ीं, भारत पर भी असर

काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, मेमोरी की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की परेशानी के बीच 2026 में अब तक दुनिया भर में स्मार्टफोन की खुदरा कीमतें करीब 20% बढ़ चुकी हैं. यह वैश्विक आंकड़ा है, इसलिए इसे भारत में बिकने वाले हर फोन की कीमत में 20% बढ़ोतरी नहीं समझना चाहिए. अलग-अलग मॉडल और बाजार में कीमत का असर अलग हो सकता है.

यह भी पढ़ें: महंगा iPhone 18 Pro खरीदने से पीछे हट रहे लोग? Apple ने प्रोडक्शन में की 20% तक कटौती

भारत में इस परेशानी का असर ज्यादा महसूस हो सकता है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में ग्राहक सीमित बजट में फोन खरीदते हैं. काउंटरपॉइंट रिसर्च के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में भी भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट आई थी. महंगे होते फोन और कमजोर मांग के कारण कंपनियों को बाजार में अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है.

Advertisement

काउंटरपॉइंट रिसर्च ने अनुमान जताया है कि भारत में जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान स्मार्टफोन शिपमेंट सालाना आधार पर करीब 20% गिर सकता है. यह शुरुआती अनुमान है, भारत के पूरे तिमाही बाजार का अंतिम आंकड़ा नहीं. रिपोर्ट के अनुसार, महंगे फोन और कमजोर मांग के कारण कंपनियों ने त्योहारों से पहले स्टॉक भरने में भी ज्यादा सावधानी बरती.

यहां एक फर्क समझना जरूरी है. शिपमेंट का मतलब है कंपनियों की ओर से बाजार और बिक्री चैनलों में भेजे गए फोन. यह सीधे तौर पर ग्राहकों की ओर से खरीदे गए फोन की संख्या नहीं है. अगर कंपनियां कम फोन भेजती हैं, तो इसका असर दुकानों पर उपलब्ध स्टॉक पर पड़ सकता है. लेकिन शिपमेंट में 20% गिरावट का यह मतलब नहीं कि भारत में हर ग्राहक ने फोन खरीदना 20% कम कर दिया है.

सैमसंग और ऐपल को कैसे मिला फायदा?

दिलचस्प बात यह है कि बाजार में बड़ी गिरावट के बावजूद सभी कंपनियों की स्थिति एक जैसी नहीं रही. काउंटरपॉइंट रिसर्च के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, सैमसंग ने 2026 की तीसरी तिमाही में 23% वैश्विक बाजार हिस्सेदारी के साथ पहला स्थान बनाए रखा. कंपनी के शिपमेंट में पिछले साल के मुकाबले 3% गिरावट आई, लेकिन उसकी हिस्सेदारी बढ़ी. फोल्डेबल फोन की मांग और कुछ मॉडल के लिए चिप की बेहतर उपलब्धता से उसे मदद मिली.

Advertisement

यह भी पढ़ें: iPhone जैसे डिजाइन वाले दो सस्ते स्मार्टफोन लॉन्च, कीमत 5,699 रुपये से शुरू, जानिए फीचर्स

ऐपल की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी इसी तिमाही में 22% रही. यह पहली बार था जब किसी तीसरी तिमाही में कंपनी की हिस्सेदारी 20% के पार पहुंची. हालांकि, इसका यह मतलब नहीं कि एपल के शिपमेंट बढ़े. कंपनी के शिपमेंट में भी सालाना गिरावट आई. काउंटरपॉइंट के मुताबिक, इस बार नॉर्मल आईफोन 18 मॉडल की गैरमौजूदगी के कारण लॉन्च के समय बाजार में भेजे गए फोन की संख्या पिछले साल की तुलना में कम रही, जबकि आईफोन 18 प्रो मॉडल को भारत और चीन में अच्छी शुरुआती मांग मिली.

क्या अब पुराना फोन चलाना ही बेहतर विकल्प है?

मौजूदा हालात में नया फोन खरीदने का फैसला सिर्फ इस बात पर नहीं होना चाहिए कि बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं. अगर आपका मौजूदा फोन ठीक काम कर रहा है, बैटरी की हालत अच्छी है और उसमें आपके जरूरी ऐप चल रहे हैं, तो उसे कुछ समय और इस्तेमाल करना एक विकल्प हो सकता है. इससे जल्दबाजी में नया फोन खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

लेकिन अगर फोन की बैटरी खराब हो गई है, सिक्योरिटी अपडेट मिलना बंद हो गया है या रोजमर्रा के काम में परेशानी हो रही है, तो केवल कीमत घटने के इंतजार में खरीदारी टालना सही फैसला नहीं होगा. ऐसे में अपनी जरूरत के हिसाब से फोन चुनना, अलग-अलग मॉडल की कीमत देखना और बैंक ऑफर को ध्यान से समझना बेहतर रहेगा.

Advertisement

 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »