'बेटी के मुक्के में दम है, मुझे पता था...', बोलीं गोल्डन गर्ल जैस्मीन की मां

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बॉक्सर जैस्मीन लंबोरिया की जीत के बाद परिवार ने एक दूसरे को बेसन के लड्डू खिलाकर बधाई दी. इसके बाद जैस्मिन की मां और पिता ने मीडिया से बातचीत की. जैस्मिन की मां ने बताया कि बेटी कोई विदेशी सप्लीमेंट नहीं बल्कि घर का दूध, दही और चूर्मा खाती है.

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जैस्मिन की मां ने बताया कि बेटी कोई विदेशी सप्लीमेंट नहीं बल्कि घर का दूध, दही और चूर्मा खाती है. (फोटो-ANI) जैस्मिन की मां ने बताया कि बेटी कोई विदेशी सप्लीमेंट नहीं बल्कि घर का दूध, दही और चूर्मा खाती है. (फोटो-ANI)

aajtak.in

  • भिवानी,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:36 PM IST

भारतीय बॉक्सर जैस्मीन लंबोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन किया है. उन्होंने देश के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया है. हरियाणा के भिवानी की रहने वाली जैस्मीन ने फाइनल मुकाबले में बेहतरीन खेल दिखाकर यह कामयाबी हासिल की. इस जीत के साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम एक बार फिर रोशन किया है. मेडल सेरेमनी के दौरान जब पोडियम पर भारतीय राष्ट्रगान बजा, तो खेल प्रेमियों समेत पूरे देश ने जैस्मीन की इस सफलता की सराहना की.

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जैस्मीन की इस बड़ी जीत के बाद उनके भिवानी स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है. परिवार ने एक दूसरे को बेसन के लड्डू खिलाकर बधाई दी. इस मौके पर जैस्मीन की मां जोगेन्द्र कौर ने मीडिया से बात करते हुए अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर पूरा भरोसा था. वह उसकी इस सफलता से बेहद खुश हैं. मां ने बताया कि जैस्मीन में बचपन से ही खेल को लेकर काफी काबिलियत और जज्बा था. जब वह इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जा रही थी, तभी पूरे परिवार को उम्मीद थी कि वह कोई बड़ा मुकाम हासिल करके ही लौटेगी.

जब मीडिया ने जैस्मीन की डाइट के बारे में पूछा, तो मां जोगेन्द्र कौर ने सिंपल जवाब दिया. उन्होंने बताया कि जैस्मीन किसी विशेष विदेशी सप्लीमेंट के बजाय पूरी तरह से घर के बने शुद्ध खाने पर निर्भर रहती है. वह अपनी नियमित डाइट में मुख्य रूप से दूध, दही और चूरमा खाना पसंद करती है.

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'पोडियम पर राष्ट्रगान सुनना ही सबसे बड़ा लक्ष्य था'
गोल्ड मेडल जीतने के बाद जैस्मीन लंबोरिया ने अपनी मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि उनका शुरुआती मकसद यही था कि वह इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बेहतर परफॉर्मेंस से भारत का नाम ऊंचा कर सकें. जैस्मीन ने बताया कि फाइनल मैच से ठीक पहले वार्म-अप के दौरान उनके कोच ने उन्हें बेहद अहम सलाह दी थी. कोच ने उनसे कहा था कि वे बिना किसी मानसिक दबाव के सिर्फ अपना स्वाभाविक गेम खेलें.

जैस्मीन ने कहा, 'किसी भी खिलाड़ी के जीवन का सबसे बड़ा सपना और लक्ष्य यही होता है कि वह देश के लिए पोडियम पर खड़ा हो और वहां राष्ट्रगान गूंजे. आज वह सपना सच हो गया है'. जब उनसे परिवार से संपर्क के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि समय की कमी के कारण आज सुबह उनकी घर पर बात नहीं हो सकी, लेकिन फाइनल से एक दिन पहले उनकी बातचीत हुई थी. जैस्मीन ने अपना यह गोल्ड मेडल पूरे देश, अपने कोचों और अपने परिवार को समर्पित किया है.

पिता, बॉक्सिंग क्लब ने की DSP पद की मांग

मैच के दौरान घर के माहौल को लेकर जैस्मीन के पिता जयबीर लंबोरिया ने बताया कि मुकाबला काफी कड़ा था. हर राउंड के साथ उनकी धड़कनें और उत्सुकता बढ़ रही थी, लेकिन जैस्मीन सभी की उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरी.

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वहीं, भिवानी बॉक्सिंग क्लब के संरक्षक कमल प्रधान ने जैस्मीन के पिछले प्रदर्शन को याद किया. उन्होंने बताया कि पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में जैस्मीन ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था. उस समय उन्होंने वादा किया था कि वह अगली बार इसे गोल्ड में बदलेंगी, जिसे आज उन्होंने सच कर दिखाया. इसके साथ ही कमल प्रधान ने सरकार से मांग की है कि ऐसे विजेता खिलाड़ियों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाई जाए.उन्हें सीधे DSP का पद दिया जाए. उनका मानना है कि इस तरह के सरकारी सहयोग से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा.  वे भविष्य में ओलंपिक जैसे आयोजनों में देश के लिए और अधिक मेडल ला सकेंगे.

यह भी पढ़ें: प्रीति के बाद जैस्मिन लेंबोरिया ने गोल्ड पर जमाया कब्जा, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बेटियों ने बिखेरा जलवा

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