प्रीति के बाद जैस्मिन लेंबोरिया ने गोल्ड पर जमाया कब्जा, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बेटियों ने बिखेरा जलवा

जैस्मिन ने एक बार फिर अपना जलवा बिखेरते हुए देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने में कामयाबी हासिल की है. ग्लासगो शहर में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैस्मिन लंबोरिया ने देश को मेडल दिलाने का काम किया है.

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जैस्मिन लंबोरिया का धमाकेदार प्रदर्शन (PHOTO: PTI) जैस्मिन लंबोरिया का धमाकेदार प्रदर्शन (PHOTO: PTI)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

बॉक्सिंग में प्रीति पवार के गोल्ड मेडल जीतने के बाद एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है. महिला बॉक्सिंग के 57 किग्रा भारवर्ग के फाइनल में जैस्मिन लेंबोरिया का मुकाबला नॉर्दर्न आयरलैंड के मिकेला वॉल्श से देखने को मिला.

जैस्मिन ने महिलाओं के 57 किलोग्राम भार वर्ग के फ़ाइनल में शानदार शुरुआत की. उन्होंने मिकेला वॉल्श के खिलाफ पहला राउंड अपने नाम कर लिया. पांच में से तीन जजों ने जैस्मिन के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे उन्हें शुरुआती बढ़त मिल गई.

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पहला राउंड जीतने के बाद जैस्मिन ने वॉल्श के खिलाफ दूसरा राउंड भी अपने नाम कर लिया. पांच में से तीन जजों ने एक बार फिर जैस्मिन के पक्ष में फैसला दिया. इसके साथ ही वह तीन जजों के स्कोरकार्ड पर 20-18 की बढ़त बनाकर आखिरी राउंड में पहुंचीं.

हरियाणा के भिवानी जिले को भारतीय बॉक्सिंग की नर्सरी कहा जाता है. इस मिट्टी ने देश को एक से बढ़कर एक मुक्केबाज दिए हैं. जैस्मिन लेंबोरिया इसी विरासत की एक चमकती मशाल हैं. एशियाई खेलों के गोल्ड मेडल विजेता हवा सिंह की परपोती जैस्मिन के खून में ही बॉक्सिंग दौड़ती है.

उनके चाचा संदीप सिंह और परविंदर सिंह भी राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर रहे हैं. इसी पारिवारिक विरासत से प्रेरणा लेकर जैस्मिन ने मुक्केबाजी की दुनिया में कदम रखा और बहुत कम समय में अपनी एक अलग पहचान बना ली.

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बर्मिंघम से मिली नई पहचान

जैस्मिन के करियर का पहला बड़ा पड़ाव साल 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल (CWG) रहे, जहां उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया. इस धमाकेदार जीत ने उनके जीवन को एक नया मोड़ दिया. बर्मिंघम में मिली सफलता के तुरंत बाद जैस्मिन भारतीय सेना में शामिल होने वाली पहली महिला मुक्केबाज़ बनीं. उन्हें कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस (CMP) में शामिल किया गया और मिशन ओलंपिक विंग के तहत ट्रेनिंग दी गई. यह वही विंग है जिसने नीरज चोपड़ा जैसे दिग्गज एथलीट देश को दिए हैं.

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सेना में शामिल होने पर क्या था जैस्मिन का रिएक्शन

सेना में शामिल होने पर जैस्मिन ने कहा था कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि उन्होंने मुझसे शुरुआत की, लेकिन मैं इसे अन्य महिला एथलीटों के लिए एक मिसाल और प्रेरणा बनने के अवसर के रूप में देखती हूं. हर खिलाड़ी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं. पेरिस ओलंपिक के पहले दौर में बाहर होना जैस्मिन के लिए बड़ा झटका था. लेकिन हार मानने के बजाय, उन्होंने आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) में खुद को फिर से तराशा. उन्होंने अपनी स्ट्रेंथ, कंडीशनिंग और मानसिक मजबूती पर काम किया.

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धोनी को अपना आदर्श मानती हैं जैस्मिन

जैस्मिन पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान एम.एस. धोनी को अपना आदर्श मानती हैं. वे कहती हैं कि मैं धोनी के माइंडसेट की बहुत मुरीद हूं. उन्हें कैप्टन कूल कहा जाता है और मैं भी रिंग में उन्हीं की तरह शांत रहकर खेलना चाहती हूं. धोनी जैसी मानसिक शांति और सेना के अनुशासन का असर रिंग में जल्द ही दिखा. लिवरपूल में आयोजित 2025 विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप के 57 किग्रा वर्ग के फाइनल में जैस्मिन ने ओलंपिक सिल्वर मेडल विजेता जूलिया सेरेमेटा को हराकर खिताब अपने नाम किया था.

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