विश्व रिकॉर्ड... चारों ओर तारीफ... और हर जुबान पर एक ही नाम- वैभव सूर्यवंशी. महज 15 साल 118 दिन की उम्र में इस किशोर बल्लेबाज ने पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला अर्धशतक लगाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बनने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इस मामले में उन्होंने सचिन तेंदुलकर, शाहिद आफरीदी, मुश्ताक मोहम्मद, मोहम्मद अशरफुल जैसे दिग्गजों को भी पीछे छोड़ दिया.
लेकिन रिकॉर्ड बनने के कुछ मिनट बाद ही वैभव ने जिस सादगी और परिपक्वता से अपनी सफलता पर बात की, उसने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया. BCCI.TV से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है. उनका सपना सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि हर बार भारत के लिए टीम की जीत में योगदान देना है.
तेज गेंदबाज मयंक यादव और प्रिंस यादव की धारदार गेंदबाजी के बाद सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के तूफानी अर्धशतक से भारत ने सीरीज के पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जिम्बाब्वे को 7 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली.
126 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने महज 13.2 ओवरों में 3 विकेट खोकर जीत दर्ज की. वैभव ने सिर्फ 19 गेंदों में 50 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 4 छक्के शामिल रहे. ईशान किशन ने 24 गेंदों में 35 रन बनाए, जबकि कप्तान श्रेयस अय्यर इतनी ही गेंदों में 28 रन बनाकर नाबाद लौटे. वैभव ने 18 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी की.
'ऐसी पारी से आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है'
मैच के बाद BCCI.TV से बातचीत में वैभव ने कहा कि करियर के शुरुआती दौर में ऐसी पारी किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद खास होती है. इससे आगे के मुकाबलों के लिए आत्मविश्वास मिलता है.
उन्होंने कहा, 'जब करियर के स्टार्टिंग फेज में ऐसी इनिंग्स मिलती है और आप अच्छा करते हैं तो अगले मैचों के लिए कॉन्फिडेंस आता है. उस समय मुझे लग रहा था कि मैं अपनी जोन में हूं.'
युवा बल्लेबाज के मुताबिक, इस पारी ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी स्वाभाविक और आक्रामक बल्लेबाजी जारी रख सकते हैं.
'यह पारी मेरे परिवार और कोच की भी है'
इतिहास रचने के बाद वैभव ने सबसे पहले उन लोगों को याद किया, जो उनके संघर्ष के दिनों से उनके साथ खड़े रहे. उन्होंने अपनी रिकॉर्डतोड़ पारी परिवार, कोच और सभी शुभचिंतकों को समर्पित की.
'मैं यह पारी अपने परिवार, अपने कोच और उन सभी लोगों को डेडिकेट करूंगा, जिन्होंने मेरी जर्नी में मेरा साथ दिया. हर अच्छे-बुरे फेज में उन्होंने मुझे सपोर्ट किया.'
मैच के बाद वैभव ने अपनी खास सेलिब्रेशन के पीछे की कहानी भी बताई. उन्होंने कहा कि एक सेलिब्रेशन अपनी मां को समर्पित था, जबकि दूसरा भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह के साथ हुई बातचीत से प्रेरित था.
उन्होंने कहा, 'एक सेलिब्रेशन मैंने अपनी मम्मी के लिए किया था, जबकि दूसरा रिंकू भैया के साथ हुई बातचीत के बाद किया.'
यह बयान बताता है कि इतनी कम उम्र में भी वैभव अपनी सफलता का श्रेय अकेले खुद को नहीं, बल्कि अपने पूरे सपोर्ट सिस्टम को देते हैं.'
'मैं इसे कभी ग्रांटेड नहीं लूंगा'
रिकॉर्ड और सुर्खियों के बीच वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनकी सोच नजर आई. उन्होंने साफ कहा कि यह उपलब्धि उन्हें संतुष्ट नहीं करेगी, बल्कि और बेहतर करने की प्रेरणा देगी.
उन्होंने कहा, 'मैं इस चीज को ग्रांटेड नहीं ले रहा हूं. बस कोशिश यही रहेगी कि जहां भी खेलूं, अपना बेस्ट दूं, टीम के लिए कॉन्ट्रिब्यूट करूं और अच्छा प्रदर्शन करूं.'
सचिन और आफरीदी से भी आगे
जिम्बाब्वे के खिलाफ यह अर्धशतक सिर्फ एक तेज पारी नहीं थी, बल्कि एक विश्व रिकॉर्ड भी था. वैभव सूर्यवंशी 15 साल 118 दिन की उम्र में पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पहला अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन गए.
सबसे कम उम्र में पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक (Full Member teams- आईसीसी के पूर्ण सदस्य देश) -
15 वर्ष 118 दिन – वैभव सूर्यवंशी (भारत) बनाम जिम्बाब्वे, हरारे, 2026 (टी20I)
16 वर्ष 213 दिन – सचिन तेंदुलकर (भारत) बनाम पाकिस्तान, फैसलाबाद, 1989 (टेस्ट)
16 वर्ष 214 दिन – शाहिद आफरीदी (पाकिस्तान) बनाम श्रीलंका, नैरोबी, 1996 (वनडे)
17 वर्ष 39 दिन – मुश्ताक मोहम्मद (पाकिस्तान) बनाम भारत, कोलकाता, 1960 (टेस्ट)
17 वर्ष 63 दिन – मोहम्मद अशरफुल (बांग्लादेश) बनाम श्रीलंका, कोलंबो, 2001 (टेस्ट)
(वैभव सूर्यवंशी पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 50 या उससे अधिक रन बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन गए हैं. 16 साल की उम्र पूरी होने से पहले यह उपलब्धि हासिल करने वाले उनसे पहले सिर्फ नेपाल के कुशल मल्ला थे, जिन्होंने 2020 में कीर्तिपुर में अमेरिका के खिलाफ खेले गए वनडे मैच में 15 साल 340 दिन की उम्र में अर्धशतक जमाया था)
15 साल की उम्र में विश्व रिकॉर्ड बनाना बड़ी बात है, लेकिन उससे भी बड़ी बात है उस रिकॉर्ड के बाद भी जमीन से जुड़े रहना. वैभव सूर्यवंशी के शब्द बताते हैं कि उनके लिए असली खुशी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय टीम की जीत है. शायद यही सोच उन्हें आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट का बड़ा सितारा बनाएगी.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क