भारत के खिलाफ 3 अक्टूबर (शनिवार) को मुल्लांपुर (न्यू चंडीगढ़) में आयोजित वनडे सीरीज के तीसरे मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 352 रनों का विशाल लक्ष्य हासिल कर सबको चौंका दिया. इस ऐतिहासिक रनचेज के केंद्र में वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप रहे, जिन्होंने दबाव वाली परिस्थितियों में नाबाद 162 रनों की बेमिसाल पारी खेली. 'प्लेयर ऑफ द मैच' बने होप ने अपनी इस पारी का एक खास राज खोला और बताया कि भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की एक सलाह ने उन्हें मुश्किल रनचेज में सही रणनीति बनाने में मदद की.
मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 351/7 रन बनाए थे. जवाब में वेस्टइंडीज ने 48.2 ओवर में 352/5 का स्कोर बनाकर 5 विकेट से मुकाबला जीत लिया. इसके साथ ही मेहमान टीम ने तीन मैचों की सीरीज का अंत सम्मानजनक तरीके से किया. भारतीय टीम ने शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर सीरीज पहले ही अपने नाम कर ली थी.
धोनी ने होप से क्या कहा था?
शाई होप ने बताया कि रनचेज शुरू करने से पहले उनके दिमाग में एमएस धोनी की कही एक बात थी. धोनी के साथ हुई बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, महान खिलाड़ी एमएस धोनी के साथ मेरी अच्छी बातचीत हुई थी. उन्होंने मुझसे कहा था कि आपके पास हमेशा आपके अनुमान से ज्यादा समय होता है.'
यही सोच शाई होप की बल्लेबाजी की रणनीति का आधार बनी. उन्होंने शुरुआत में जोखिम लेने से बचते हुए पारी को संभाला और लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटकर आगे बढ़े. उनका इरादा आखिरी ओवरों के लिए खुद को तैयार रखने का था. होप ने कहा, 'मैं नतीजे पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहता था. सिर्फ प्रोसेस पर ध्यान देना था. मैंने खेल को छोटे हिस्सों में बांटने और आखिरी चरण में बाउंड्री हासिल करने के तरीके तलाशने की कोशिश की.'
शतक पूरा करने के बाद बदला गियर
शाई होप ने 46 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा किया. इसके बाद उन्होंने 104 गेंदों में अपना 21वां ओडीआई शतक पूरा किया. लेकिन शतक के बाद उनका अंदाज पूरी तरह बदल गया. अगली 39 गेंदों में होप ने 62 रन ठोक डाले. उन्होंने वेस्टइंडीज की पारी को अंत तक संभाले रखा और भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाते चले गए.
41वें ओवर में कीमो पॉल के आउट होने के बाद वेस्टइंडीज के सामने एक बार फिर चुनौती खड़ी हो सकती थी, लेकिन शाई होप ने गुडाकेश मोती के साथ मिलकर मैच का रुख ही बदल दिया. दोनों ने सिर्फ 29 गेंदों में 62 रनों की नाबाद साझेदारी कर टीम को लक्ष्य तक पहुंचा दिया.
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शाई होप ने भारतीय टीम की धीमी ओवर गति पर भी नजर रखी हुई थी. उन्हें पता था कि अगर भारत समय पर ओवर पूरे नहीं करता है तो आखिरी चार ओवरों में अतिरिक्त फील्डर को 30 गज के घेरे के अंदर रखना पड़ेगा. उन्होंने कहा, 'मैंने यह भी ध्यान में रखा था कि भारतीय टीम ओवरों के मामले में पीछे है. मुझे पता था कि आखिरी स्टेज में उन्हें कुछ फील्डरों को सर्कल के अंदर लाना होगा.' होप के मुताबिक, लक्ष्य का पीछा करते समय उन्होंने इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखा और आखिरी ओवरों में उनका फायदा उठाने की कोशिश की.
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शाई होप की पारी की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि वह इस मुकाबले में सिर्फ बल्लेबाज की भूमिका निभाने नहीं उतरे थे. उन्होंने भारत की पूरी पारी के दौरान विकेटकीपिंग की. ज्वेल एंड्रयू के चोटिल होने के बाद होप को पारी की शुरुआत करना पड़ा. यानी 50 ओवर विकेट के पीछे बिताने के बाद उन्हें सीधे बल्लेबाजी के लिए उतरना पड़ा. इसके अलावा वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी लाइन अप भी पूरी तरह मजबूत नहीं थी, जिससे होप पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई. इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया.
शाई होप ने खुलासा किया कि करीब 30 ओवर्स तक बल्लेबाजी करने के बाद उन्हें ग्रोइन के आसपास परेशानी महसूस होने लगी थी. इसके बावजूद उन्होंने पारी जारी रखी और अंत तक क्रीज पर डटे रहे. उनकी नाबाद 162 रनों की पारी में धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण देखने को मिला. शुरुआती चरण में उन्होंने विकेट बचाकर रखा, जबकि लक्ष्य के करीब पहुंचते ही बड़े शॉट खेलने शुरू कर दिए.
यह वेस्टइंडीज का वनडे इंटरनेशनल में सबसे बड़ा सफल रनचेज भी रहा. साथ इस सीरीज में शाई होप का यह का लगातार दूसरा शतक था. सीरीज के दूसरे वनडे में भी उन्होंने शतकीय पारी खेली थी, लेकिन इस बार उनकी बल्लेबाजी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाने के साथ-साथ भारत की सीरीज में लगातार जीत का सिलसिला तोड़ने के लिए भी याद रखी जाएगी.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क