अजिंक्य रहाणे के संन्यास के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के सामने सबसे बड़ा सवाल है- अब कप्तानी कौन करेगा? सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट गलियारों तक रिंकू सिंह, सुनील नरेन और रोवमैन पॉवेल के नामों पर चर्चा हो रही है. लेकिन KKR की असली समस्या रहाणे का रिटायरमेंट नहीं है. फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी गलती 2 साल पहले हुई थी, जब उसने IPL 2024 का खिताब जिताने वाले कप्तान श्रेयस अय्यर को टीम से अलग होने दिया. आज जो कप्तानी का संकट दिख रहा है, उसकी नींव उसी फैसले ने रखी थी.
पहली भूल: चैम्पियन कप्तान को जाने दिया
IPL 2024 KKR के इतिहास के सबसे यादगार सीजन में से एक था. श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम ने 10 साल बाद ट्रॉफी जीती और तीसरी बार चैम्पियन बनी. ऐसे कप्तान के साथ टीम लंबे समय की योजना बना सकती थी, लेकिन मेगा ऑक्शन से पहले फ्रेंचाइजी उसे अपने साथ नहीं रख सकी.
श्रेयस के जाने के बाद KKR के पास कोई तैयार कप्तान नहीं था. यहीं से टीम की लीडरशिप प्लानिंग पर सवाल उठने लगे.
दूसरी भूल: रहाणे सिर्फ 'फायर फाइटर' साबित हुए
श्रेयस के जाने के बाद KKR ने अनुभवी अजिंक्य रहाणे को कप्तानी सौंपी. यह फैसला भविष्य की रणनीति कम और तत्काल संकट से निपटने की कोशिश ज्यादा नजर आया. साथ ही वेंकटेश अय्यर को उपकप्तान बनाकर संकेत दिए गए कि आने वाले समय में वही कप्तानी संभाल सकते हैं.
... लेकिन यह प्रयोग नहीं चला. IPL 2025 में डिफेंडिंग चैम्पियन KKR सिर्फ छह मैच जीत सकी और 8वें स्थान पर रही. वेंकटेश अय्यर भी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे और अगले सीजन से पहले रिलीज कर दिए गए.
तीसरी भूल: हर सीजन नया कप्तान खोजने की कोशिश
वेंकटेश के बाद KKR ने रिंकू सिंह को भविष्य का कप्तान मानना शुरू किया. मुख्य कोच अभिषेक नायर ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि रिंकू अब टीम के भीतर एक लीडर के रूप में उभर रहे हैं और उन्हें ज्यादा जिम्मेदारी दी जाएगी.
लेकिन IPL 2026 में यह योजना भी सफल नहीं हुई. KKR लगातार दूसरे साल प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी. रहाणे बल्ले और कप्तानी, दोनों में प्रभाव नहीं छोड़ सके, जबकि रिंकू सिंह भी ऐसा प्रदर्शन नहीं कर पाए जिससे उन्हें तुरंत कप्तानी सौंपने का फैसला आसान हो जाता.
रहाणे का रिटायरमेंट नहीं, रणनीति की पोल खुली
रहाणे के संन्यास ने KKR को कप्तान विहीन जरूर कर दिया है, लेकिन यह संकट अचानक पैदा नहीं हुआ. पिछले दो वर्षों में फ्रेंचाइजी ने वेंकटेश अय्यर और रिंकू सिंह को भविष्य का कप्तान बनाने की कोशिश की, मगर दोनों प्रयोग अधूरे रह गए. इससे यह सवाल उठता है कि क्या KKR ने श्रेयस अय्यर के जाने के बाद कोई ठोस उत्तराधिकार योजना (Succession Plan) बनाई ही नहीं थी?
अब क्या करेगी KKR?
फिलहाल रिंकू सिंह सबसे मजबूत आंतरिक विकल्प माने जा रहे हैं. उनके अलावा रोवमैन पॉवेल के पास अंतरराष्ट्रीय कप्तानी का अनुभव है, जबकि सुनील नरेन को भी कुछ पूर्व क्रिकेटर कप्तानी का दावेदार मानते हैं. दूसरी ओर, IPL 2027 ऑक्शन और ट्रेड विंडो में किसी अनुभवी भारतीय कप्तान को टीम में शामिल करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता.
रहाणे का रिटायरमेंट KKR की परेशानी का कारण नहीं, बल्कि उसकी दो साल पुरानी रणनीतिक चूक का परिणाम है. ट्रॉफी जिताने वाले कप्तान को जाने देना, उसके बाद बिना स्पष्ट उत्तराधिकारी के हर सीजन नया विकल्प तलाशना और फिर लगातार दो साल प्लेऑफ से बाहर रहना- यही वह सिलसिला है जिसने KKR को आज इस मोड़ पर ला खड़ा किया है. अब फ्रेंचाइजी के सामने सिर्फ नया कप्तान चुनने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह साबित करने की भी चुनौती है कि उसने अपनी सबसे बड़ी गलती से कुछ सीखा है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क