अभिषेक का शतक, वैभव का धमाका, संजू भी तैयार... ईशान लौटे तो किसका कटेगा पत्ता?

अभिषेक शर्मा ने शतक जड़ दिया, वैभव सूर्यवंशी ने ओपनिंग में अपना दम दिखाया और संजू सैमसन भी दावेदार हैं. अब ईशान किशन की वापसी पर किसे बाहर बैठना पड़ेगा? टीम इंडिया के सामने चयन, बल्लेबाजी क्रम और रोटेशन पॉलिसी से जुड़ा बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. टीम इंडिया में मचेगी खलबली!

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टीम इंडिया में मचेगी खलबली..? (Photo: PTI/AP/Getty) टीम इंडिया में मचेगी खलबली..? (Photo: PTI/AP/Getty)

आजतक स्पोर्ट्स डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:00 AM IST

टीम इंडिया के सामने अजीब उलझन है. जो बल्लेबाज रन बना रहे हैं, उन्हें बाहर बैठाना आसान नहीं और ईशान किशन की वापसी को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. ऐसे में सवाल सिर्फ प्लेइंग-11 का नहीं, बल्लेबाजी क्रम और रोटेशन पॉलिसी का भी है.

टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में ऐसा तूफान मचाया कि विरोधी गेंदबाजों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. अभिषेक शर्मा ने 38 गेंदों में 113 रन ठोक दिए, वैभव सूर्यवंशी ने ओपनिंग में उतरकर अपने तेवर दिखाए और भारत ने 199 रनों का लक्ष्य महज 13.2 ओवरों में हासिल कर लिया. इस धमाकेदार जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त भी बना ली.

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... लेकिन इस जीत के बीच टीम इंडिया के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है, जिसका जवाब ढूंढना आसान नहीं होगा. अभिषेक शर्मा का बल्ला आग उगल रहा है, वैभव सूर्यवंशी ने ओपनिंग में अपना दावा मजबूत किया है और संजू सैमसन भी पहले से रन बनाकर आ रहे हैं. अब ईशान किशन फिट होकर टीम में वापसी करते हैं तो आखिर किसका पत्ता कटेगा?

शतक जड़ने वाले को बाहर बैठाएंगे या तूफानी ओपनर को?

ईशान किशन की वापसी का इंतजार खत्म होते ही भारतीय टीम के सामने चयन की पहेली खड़ी हो सकती है. एक तरफ अभिषेक हैं, जो अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से मैच का रुख पलटने की ताकत रखते हैं. दूसरी तरफ वैभव हैं, जिन्हें ओपनिंग में उतारने का फैसला तीसरे टी20 में देखने को मिला. वहीं संजू सैमसन भी इस समीकरण के अहम खिलाड़ी हैं.

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अभिषेक को बाहर बैठाने का फैसला उनके हालिया प्रदर्शन के सामने मुश्किल होगा. वैभव को हटाने का मतलब होगा एक ऐसे युवा बल्लेबाज को उसकी पसंदीदा पोजिशन पर लगातार मौके देने की योजना पर सवाल उठना. संजू को बाहर करना भी आसान विकल्प नहीं है, खासकर तब जब वह अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए रन बना रहे हों.

और ईशान को वापस लाने का सवाल भी उतना ही अहम है. जब कोई खिलाड़ी फिट होकर उपलब्ध होता है, तो टीम मैनेजमेंट को उसके चयन और बाकी खिलाड़ियों की भूमिकाओं पर फैसला करना ही पड़ता है. ऐसे में असली चुनौती सिर्फ किसी एक नाम को चुनना नहीं, बल्कि ऐसा संयोजन तैयार करना है जिसमें खिलाड़ियों की खूबियों का सही इस्तेमाल हो सके.

वैभव ओपनिंग करेंगे तो संजू का क्या होगा?

तीसरे टी20 में ईशान की गैरमौजूदगी के बीच वैभव सूर्यवंशी को ओपनिंग का मौका मिला. इससे बल्लेबाजी क्रम को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई. वैभव की सबसे बड़ी ताकत पारी की शुरुआत में गेंदबाजों पर हमला करना है. उन्हें तीसरे नंबर पर उतारने के प्रयोग पर पहले भी सवाल उठे हैं.

लेकिन वैभव को ओपनिंग में खिलाने का मतलब यह भी है कि टीम को बाकी बल्लेबाजों के क्रम पर विचार करना होगा. न्यूजीलैंड के खिलाफ तीसरे टी20 में संजू सैमसन तीसरे नंबर पर उतरे. अब अगर वैभव को ओपनिंग में बनाए रखने की योजना है, तो संजू को अपनी भूमिका के हिसाब से ढलना पड़ सकता है.

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यहीं से सवाल और पेचीदा हो जाता है. क्या संजू को वैभव के लिए अपनी पसंदीदा पोजिशन छोड़नी होगी? क्या अभिषेक और वैभव की जोड़ी को बनाए रखने के लिए टीम मैनेजमेंट बाकी बल्लेबाजी क्रम में बदलाव करेगा? और ईशान की वापसी के बाद क्या संजू के लिए प्लेइंग-11 में जगह बनाना और मुश्किल हो जाएगा?

फिलहाल इन सवालों का कोई तय जवाब नहीं है. लेकिन इतना जरूर है कि एक खिलाड़ी की वापसी से बल्लेबाजी क्रम में कई बदलावों पर विचार करना पड़ सकता है.

रोटेशन पॉलिसी पहले अपनाई होती तो आज यह नौबत नहीं आती?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल भारतीय टीम की रोटेशन पॉलिसी को लेकर है. अगस्त से दिसंबर के बीच भारत के कार्यक्रम में अफगानिस्तान के खिलाफ 3, वेस्टइंडीज के खिलाफ 5, न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 और श्रीलंका के खिलाफ 3 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले शामिल हैं. यानी कुल 16 मैचों के इस कार्यक्रम में खिलाड़ियों को अलग-अलग संयोजनों में आजमाने का अवसर था.

ऐसे में एक विकल्प यह हो सकता था कि टीम मैनेजमेंट पहले से तय करता कि किस खिलाड़ी को कितने मैचों में मौका देना है, किसे आराम दिया जाएगा और किसकी भूमिका क्या होगी. अगर खिलाड़ियों को पहले ही स्पष्ट कर दिया जाता कि उन्हें चार या पांच मैचों के बाद आराम मिल सकता है, तो किसी खिलाड़ी को बाहर बैठाने का फैसला केवल उसके प्रदर्शन से जोड़कर नहीं देखा जाता.

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इससे टीम को दो फायदे हो सकते थे. पहला, प्रमुख खिलाड़ियों को लगातार खेलने के दबाव से राहत मिलती. दूसरा, वैकल्पिक संयोजनों को आजमाने के दौरान खिलाड़ियों की भूमिकाएं भी स्पष्ट रहतीं.

हालांकि, रोटेशन का मतलब यह नहीं कि अच्छे प्रदर्शन के बावजूद खिलाड़ियों को अनिवार्य रूप से बाहर किया जाए. टीम मैनेजमेंट को फिटनेस, फॉर्म, विरोधी टीम और रणनीति के आधार पर फैसले लेने होंगे. लेकिन पहले से स्पष्ट योजना होने पर बदलावों को समझाना जरूर आसान हो सकता है.

वर्ल्ड कप अभी दूर है, प्रयोग करने का यही वक्त

टी20 वर्ल्ड कप में अभी करीब दो साल का समय है. ऐसे में भारतीय टीम के पास बल्लेबाजी क्रम के अलग-अलग विकल्प आजमाने, खिलाड़ियों को उनकी भूमिकाओं में परखने और जरूरत पड़ने पर बदलाव करने का समय है.

यही वजह है कि मौजूदा चयन संकट को केवल किसी एक खिलाड़ी की जगह छिनने के तौर पर नहीं देखना चाहिए. यह टीम मैनेजमेंट के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने का मौका भी है. क्या भारत अभिषेक और वैभव की ओपनिंग जोड़ी को आगे बढ़ाना चाहता है? संजू को किस नंबर पर सबसे ज्यादा फायदा होगा? ईशान की वापसी पर उनकी भूमिका क्या होगी? इन सवालों के जवाब अभी से तलाशने होंगे.

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क्योंकि जब टीम में रन बनाने वालों की कमी हो, तब चयन करना आसान होता है. असली मुश्किल तब आती है, जब कई खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों और सभी के लिए प्लेइंग-11 में जगह निकालना संभव न हो.

अभिषेक के शतक और वैभव के धमाके ने भारत की बल्लेबाजी की ताकत दिखाई है. संजू की मौजूदगी और ईशान की संभावित वापसी इस ताकत को और बढ़ा सकती है. लेकिन इसके लिए टीम को सिर्फ खिलाड़ियों के नाम नहीं, उनकी भूमिकाओं का संतुलन भी तय करना होगा.

अब सवाल यही है- ईशान किशन लौटेंगे तो टीम इंडिया किसे बाहर बैठाएगी... या फिर इस चयन संकट का हल किसी खिलाड़ी को हटाने की बजाय बल्लेबाजी क्रम और रोटेशन की बेहतर योजना में छिपा है?


 

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