भारत और श्रीलंका के बीच 15 अगस्त से 2 मैचों की टेस्ट सीरीज का आगाज हो रहा है. पहला मुकाबला 15-19 अगस्त के बीच गॉल में खेला जाएगा. वहीं सीरीज का दूसरा मुकाबला 23-27 अगस्त के बीच कोलंबो में खेला जाएगा.
गॉल का मैदान एक बार फिर भारतीय बल्लेबाजों के लिए बड़ी चुनौती लेकर तैयार है. फर्क सिर्फ इतना है कि 2008 में भारत के सामने अजंता मेंडिस की रहस्यमयी स्पिन थी, जबकि इस बार शुभमन गिल की अगुवाई वाली टीम को प्रभात जयसूर्या की फिरकी का सामना करना होगा.
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भारत और श्रीलंका के बीच लगभग 18 साल पहले गॉल में खेला गया 2008 का दूसरा टेस्ट आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास के यादगार मुकाबलों में गिना जाता है.
उस समय अजंता मेंडिस अपनी ‘मिस्ट्री स्पिन’ से दुनिया भर के बल्लेबाजों को परेशान कर रहे थे, लेकिन वीरेंद्र सहवाग ने उनकी गेंदबाजी की धार को काफी हद तक बेअसर कर दिया था.
वीरेंद्र सहवाग ने उस मुकाबले में पहली पारी में नाबाद 201* रनों की पारी खेली थी. वहीं दूसरी पारी में सहवाग ने 50 रन जड़े थे. दोनों ही पारियों में सहवाग ने अजंता मेंडिस पर जमकर प्रहार किया था.
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उस मैच में अजंता मेंडिस ने कुल 10 विकेट लिए थे. सहवाग को छोड़कर कोई भी भारतीय बल्लेबाज मेंडिस की फिरकी के सामने नहीं टिक पाया ता. भारत ने यह मुकाबले 170 रनों से अपने नाम किया था.
अब 2026 में कहानी फिर गॉल पहुंच गई है. इस बार श्रीलंका की सबसे बड़ी ताकत प्रभात जयसूर्या हैं. बाएं हाथ के इस स्पिनर का गॉल में रिकॉर्ड बेहद खतरनाक है. उन्होंने यहां 11 टेस्ट मैचों में 81 विकेट लिए हैं, जो इस मैदान पर उनकी पकड़ और प्रभाव को साफ दिखाता है.
गॉल की पिच में जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, स्पिनरों के लिए और मददगार होती जाती है. ऐसे में शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल और भारतीय मध्यक्रम की असली परीक्षा होगी.
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भारत के लिए उम्मीद की बात यह है कि टीम के बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ आक्रामक और सकारात्मक बल्लेबाजी का इरादा रखते हैं. अगर भारतीय बल्लेबाज शुरुआती दौर में जयसूर्या के खिलाफ लय हासिल कर लेते हैं, तो गॉल में इतिहास खुद को दोहराता हुआ भी दिख सकता है.
2008 में सहवाग ने मेंडिस की मिस्ट्री स्पिन को ध्वस्त किया था. अब सवाल यही है, क्या शुभमन गिल की टीम प्रभात जयसूर्या की स्पिन परीक्षा में भी वैसी ही सफलता दोहरा पाएगी?
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क