श्रीलंका की क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव हुआ है. ऑलराउंडर धनंजय डी सिल्वा ने टेस्ट टीम की कप्तानी छोड़ दी है. उन्होंने तत्काल प्रभाव से यह जिम्मेदारी छोड़ने का फैसला किया.
धनंजय डी सिल्वा को जनवरी 2024 में श्रीलंका की टेस्ट टीम का कप्तान बनाया गया था. उन्होंने श्रीलंका क्रिकेट की चयन समिति को भेजे पत्र में कहा कि उनकी ईमानदार राय है कि अब नेतृत्व की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी को सौंपने का समय आ गया है. हालांकि, डी सिल्वा ने साफ किया है कि वह बतौर खिलाड़ी श्रीलंका का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे.
श्रीलंका क्रिकेट के CEO एश्ले डी सिल्वा ने भी कप्तानी के दौरान उनके योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि श्रीलंका क्रिकेट उनके करियर के बाकी हिस्से के लिए उन्हें शुभकामनाएं देता है और टेस्ट टीम को दिए उनके नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त करता है.
35 साल के धनंजय डी सिल्वा ने श्रीलंका के लिए 18 टेस्ट में कप्तानी की. इस दौरान टीम ने 7 मुकाबले जीते. कप्तान के तौर पर डी सिल्वा ने 1130 रन बनाए, उनका बल्लेबाजी औसत 36.45 रहा. गेंदबाजी में उन्होंने 9 विकेट लिए और उनका बॉलिंग औसत 44.44 रहा.
श्रीलंका क्रिकेट ने कन्फर्म किया है कि मेंडिस नेशनल टेस्ट टीम को लीड करेंगे, पाकिस्तान में होने वाली दो मैचों की सीरी उनका पहला असाइनमेंट होगा. मेंडिस ने सभी फॉर्मेट में 75 टेस्ट और 343 इंटरनेशनल मैच खेले हैं.
श्रीलंका का अगला टेस्ट कब से है?
श्रीलंका का अगला टेस्ट असाइनमेंट 9 नवंबर से पाकिस्तान के खिलाफ दो मैचों की सीरीज है, जिसकी शुरुआत रावलपिंडी में होगी. इस सीरीज के लिए अभी तक नए टेस्ट कप्तान के नाम का ऐलान नहीं किया गया है. श्रीलंका के मौजूदा वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) साइकिल में टॉप दो में पहुंचने की संभावना लगभग खत्म है. ऐसे में डी सिल्वा के कप्तानी छोड़ने के फैसले से नई लीडरशिप को अगले WTC चक्र से पहले टीम के साथ तालमेल बनाने का मौका मिल सकता है.
2024 रहा सबसे सफल साल
डी सिल्वा के लिए कप्तान के तौर पर 2024 सबसे सफल साल रहा. श्रीलंका ने बांग्लादेश को उसकी जमीन पर 2-0 से टेस्ट सीरीज में हराया. इसके बाद टीम ने द ओवल में जीत दर्ज की, हालांकि पूरी सीरीज 2-1 से गंवाई. फिर न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में श्रीलंका ने 2-0 से जीत हासिल की.
2024 के अंत से 2025 की शुरुआत के बीच टीम को साउथ अफ्रीका के खिलाफ विदेशी जमीन और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज में लगातार चार हार का सामना भी करना पड़ा. इस साल श्रीलंका ने दोनों टेस्ट सीरीज 1-0 के अंतर से गंवाईं. पहले उसे वेस्टइंडीज में हार मिली और फिर घरेलू मैदान पर भारत ने मात दी.
टेस्ट मैचों की कमी भी बड़ी चुनौती
डी सिल्वा के कार्यकाल में श्रीलंकाई टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी समस्या मैचों की कमी रही. जून 2025 में बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू सीरीज 1-0 से जीतने के बाद श्रीलंका के शेड्यूल में पूरे 12 महीने तक कोई टेस्ट मैच नहीं था. मौजूदा WTC साइकिल में भी श्रीलंका को सिर्फ 12 टेस्ट खेलने हैं, जो न्यूनतम संख्या है. डी सिल्वा टेस्ट विशेषज्ञ खिलाड़ियों के लिए इतने कम मैचों वाले कार्यक्रम से होने वाली मुश्किलों पर लगातार बात करते रहे हैं.
श्रीलंका की पुरुष टीम में यह नेतृत्व परिवर्तन अकेला बदलाव नहीं है. इस साल की शुरुआत में कुसल मेंडिस को व्हाइट-बॉल कप्तानी सौंपी गई थी. उन्होंने चरित असलंका की जगह ली थी.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क