घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाना, चयनकर्ताओं का भरोसा जीतना और फिर भी भारतीय टीम के लिए टेस्ट डेब्यू का मौका नहीं मिलना. बंगाल के सलामी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन का करियर इसी इंतजार की कहानी बन गया है. 31 साल की उम्र में भी वह भारत की टेस्ट जर्सी पहनने का सपना देख रहे हैं. कई बार टीम में चुने जाने के बावजूद उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली, लेकिन अब भी उनका ध्यान अपने खेल और बंगाल को रणजी ट्रॉफी जिताने पर है.
अभिमन्यु ईश्वरन को 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज और इसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया था. हालांकि, उन्हें टेस्ट डेब्यू का मौका नहीं मिल सका. इतने लंबे इंतजार के बाद भी उन्होंने भारत के लिए खेलने की उम्मीद नहीं छोड़ी है. उन्होंने कहा, 'भारत के लिए खेलना और उसके लिए मैच जीतना हमेशा से मेरा सपना रहा है. पहले दिन से मेरा यही लक्ष्य था और यह हमेशा मेरे मन में रहेगा.'
अभिमन्यु ईश्वरन जानते हैं कि टीम में सेलेक्शन उनके हाथ में नहीं है. उनके नियंत्रण में सिर्फ उनकी तैयारी और मैदान पर प्रदर्शन है. यही वजह है कि वह बंगाल हो या कोई दूसरी टीम, हर मुकाबले में अपना पूरा योगदान देने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि जब वह खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करते हैं, तभी अपना सर्वश्रेष्ठ दे पाते हैं. चयन के बारे में सोचते रहने का कोई फायदा नहीं है. अगर वह लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे, तो उन्हें उम्मीद है कि इसका परिणाम किसी ना किसी समय जरूर मिलेगा.
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अभिमन्यु ईश्वरन की पहचान धैर्य के साथ बल्लेबाजी करने वाले सलामी बल्लेबाज की रही है. वह नई गेंद का सामना करने, खराब गेंदों का इंतजार करने और लंबी पारियां खेलने में माहिर हैं. हालांकि, बदलते क्रिकेट के साथ वह अपने स्कोरिंग विकल्पों को भी बढ़ाना चाहते हैं. उनका मानना है कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में रन बनाने का कोई एक तय तरीका नहीं होता. बल्लेबाज को पिच, विपक्षी गेंदबाजों और मैच की परिस्थितियों के हिसाब से अपनी रणनीति बनानी पड़ती है.
अभिमन्यु ईश्वरन ने बताया कि वह कुछ नए शॉट्स पर काम कर रहे हैं, ताकि अलग-अलग परिस्थितियों में तेजी से रन बनाने के विकल्प मौजूद रहें. उनके मुताबिक, क्रिकेट में सुधार की गुंजाइश कभी खत्म नहीं होती और खिलाड़ी को अपने खेल पर लगातार काम करते रहना चाहिए.
बंगाल को रणजी खिताब दिलाने पर नजरें
व्यक्तिगत लक्ष्य के साथ अभिमन्यु ईश्वरन की जिम्मेदारी बंगाल की कप्तानी भी है. टीम पिछले कुछ वर्षों में रणजी ट्रॉफी के खिताब के करीब पहुंची, लेकिन निर्णायक मुकाबलों में उसे निराशा झेलनी पड़ी. 2019-20 के फाइनल में सौराष्ट्र ने पहली पारी की बढ़त के आधार पर बंगाल को हराया था. तीन सीजन बाद दोनों टीमें फिर फाइनल में आमने-सामने आईं, लेकिन सौराष्ट्र ने नौ विकेट से जीत दर्ज की. पिछले सत्र में बंगाल की चुनौती सेमीफाइनल में समाप्त हो गई, जहां जम्मू-कश्मीर ने उसे छह विकेट से हराया.
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उस मुकाबले में बंगाल ने पहली पारी में 328 रन बनाए थे. सुदीप घरामी ने 146 रनों की अहम पारी खेली, जबकि जम्मू-कश्मीर की टीम 302 रनों पर सिमट गई. इसके बावजूद बंगाल दूसरी पारी में सिर्फ 99 रन बना सका और विपक्षी टीम को जीत के लिए 126 रनों का लक्ष्य मिला.
अभिमन्यु ईश्वरन से जब पूछा गया कि इस बार टीम को क्या बदलना होगा, तो उन्होंने स्वीकार किया कि इसका आसान जवाब उनके पास नहीं है. हालांकि, उन्होंने माना कि नॉकआउट मैचों में निर्णायक मौकों पर बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी है. टीम को दबाव के समय जिम्मेदारी लेनी होगी और मिले अवसरों का फायदा उठाना होगा.
ईस्ट जोन के लिए काटा गदर
अभिमन्यु ईश्वरन ने हाल में दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए उपयोगी पारियां खेलीं. सेंट्रल जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 69 रन बनाए और टीम की चार विकेट की जीत में योगदान दिया. फाइनल में साउथ जोन के खिलाफ उन्होंने 86 गेंदों पर 72 रन बनाए. उनकी पारी की मदद से ईस्ट जोन पहली पारी में 708 रन बनाने में सफल रहा. इन प्रदर्शनों ने रेड बॉल क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को फिर सामने रखा. अब बंगाल के कप्तान के तौर पर उन्हें यही फॉर्म रणजी ट्रॉफी में दिखानी होगी.
बंगाल के पास मोहम्मद शमी, आकाश दीप और मुकेश कुमार जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज हैं. आकाश दीप की वापसी से टीम को अतिरिक्त मजबूती मिलने की उम्मीद है. ईश्वरन ने कहा कि ऐसे गेंदबाजों का कप्तान होना अच्छा अनुभव है, क्योंकि वे अलग-अलग टीमों के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं.
बंगाल ने अपने रणजी ट्रॉफी अभियान की शुरुआत कल्याणी में दिल्ली के खिलाफ किया है. इस सत्र में लाल गेंद और सीमित ओवरों की प्रतियोगिताओं के बीच तालमेल बैठाना भी खिलाड़ियों के लिए चुनौती होगा. अभिमन्यु ईश्वरन का मानना है कि पेशेवर क्रिकेटरों को प्रारूप बदलने के साथ जल्द से जल्द खुद को ढालना पड़ता है.
आजतक स्पोर्ट्स डेस्क