तिब्बती पठार एशिया का एक बहुत बड़ा और ऊंचा इलाका है. यह ज्यादातर चीन के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में है. इसकी ऊंचाई करीब 14,800 फीट है. वैज्ञानिकों ने पाया है कि इस पठार पर सर्दी शुरू होते ही अगर ज्यादा गर्मी पड़ जाए, तो हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका के कैलिफोर्निया में तेज तूफान और भारी बारिश हो सकती है. यह खोज एक वैज्ञानिक टीम ने की है.
कैलिफोर्निया में 2016-2017 और 2022-2023 की सर्दियों में बहुत ज्यादा बारिश हुई. इससे बाढ़ आई और सड़कें-पुल टूटे. आम तौर पर अमेरिका के पश्चिमी तट पर सर्दियों में 'वायुमंडलीय नदी' नाम के तूफान आते हैं. ये आसमान में लंबी-पतली नदी जैसी चीजें होती हैं जो बहुत सारा पानी भाप के रूप में ले जाती हैं.
जब ये कैलिफोर्निया पहुंचती हैं तो तेज बारिश और बर्फबारी होती है. लेकिन उन दो सालों में ये तूफान खास तौर पर बहुत तेज थे. अजीब बात यह थी कि तब ला-नीना चल रही थी. ला-नीना आमतौर पर कैलिफोर्निया में सूखा लाती है. यह समुद्र के ठंडे पानी से जुड़ी मौसम की स्थिति है.
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आमतौर पर मौसम की भविष्यवाणी समुद्र के तापमान को देखकर की जाती है. लेकिन उन सालों में किसी भी बड़े कंप्यूटर मॉडल ने सिर्फ समुद्र के तापमान से कैलिफोर्निया की इतनी ज्यादा बारिश का सही अंदाजा नहीं लगाया. इससे पता चला कि सिर्फ समुद्र की बात पर्याप्त नहीं है.
यह संबंध कैसे काम करता है
वैज्ञानिकों ने पहले पुराने आंकड़ों को देखा. उन्होंने पाया कि तिब्बती पठार पर सर्दी की शुरुआत में गर्मी ज्यादा हो तो कैलिफोर्निया में सर्दी के आखिर में बारिश भी ज्यादा होती है. लेकिन सिर्फ आंकड़ों से यह नहीं कहा जा सकता कि एक चीज दूसरी का कारण है. इसलिए उन्होंने कंप्यूटर मॉडल से टेस्ट किया.
जब मॉडल को सिर्फ समुद्र के तापमान से चलाया गया तो वह न तो तिब्बत की गर्मी और न ही कैलिफोर्निया की बारिश को सही दिखा सका. लेकिन जब मॉडल में तिब्बत के असली भूमि तापमान को डाला गया तो दोनों चीजें सही निकल आईं. तिब्बती पठार बहुत बड़ा और ऊंचा है. जब इसकी जमीन ज्यादा गर्म हो जाती है तो ऊपर की हवा भी गर्म हो जाती है. इससे आसपास के इलाकों और पठार के बीच तापमान का फर्क बदल जाता है.
यह बदलाव जेट स्ट्रीम नाम की तेज हवा की धारा को बिगाड़ देता है. जेट स्ट्रीम उत्तरी गोलार्ध में मौसम को घुमाने वाली तेज हवा है. यह बिगाड़ पूर्व की तरफ एक बड़ी लहर के रूप में चल पड़ता है. इसे तिब्बती पठार-रॉकी माउंटेन वेव ट्रेन कहते हैं. जब यह लहर पूर्वी प्रशांत महासागर तक पहुंचती है तो टूट जाती है, जैसे समुद्र की लहर किनारे पर टूटती है. इससे प्रशांत महासागर के ऊपर हवा की हालत बदल जाती है. ये बदली हुई हालत वायुमंडलीय नदियों को और मजबूत बना देती है.
भविष्यवाणी बेहतर हो सकती है
वायुमंडलीय नदियां कैलिफोर्निया की सबसे बड़ी बारिश की वजह होती हैं. अध्ययन बताता है कि तिब्बत पर सर्दी की शुरुआत की गर्मी इन तूफानों को और तेज बना सकती है. इससे मौसम की भविष्यवाणी भी बेहतर हो सकती है. अब तक भविष्यवाणी ज्यादातर समुद्र के तापमान पर टिकी होती है.
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नए नतीजे बताते हैं कि बहुत दूर की जमीन का तापमान भी एक अच्छा संकेत दे सकता है. तिब्बती पठार का असर दूसरे इलाकों पर भी पड़ता है, जैसे पूर्वी एशिया के मानसून पर. वैज्ञानिकों ने पहले भी देखा था कि रॉकी पहाड़ों का तापमान अमेरिका के दक्षिणी मैदानों के मौसम को प्रभावित करता है.
अगर सर्दी की शुरुआत में तिब्बत के तापमान पर नजर रखी जाए, साथ में समुद्र और हवा की हालत भी देखी जाए, तो पश्चिमी तट पर बाद में आने वाली भारी बारिश का अंदाजा बेहतर लगाया जा सकता है. इन संकेतों को भविष्यवाणी के सिस्टम में डालने से लोगों, पानी प्रबंधकों और बचाव टीमों को तैयारी का ज्यादा समय मिल सकता है. यह खोज बताती है कि धरती का मौसम कितना जुड़ा हुआ है. एक जगह की गर्मी दूर किसी और जगह पर भारी तूफान ला सकती है.
आजतक साइंस डेस्क