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इस्लामिक प्रेयर पर सस्पेंड शिक्षक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, निलंबन के आदेश पर रोक

इस्लामिक प्रेयर के आरोप में निलंबित शिक्षक को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दी है. कोर्ट ने शिक्षक के निलंबन आदेश को फिलहाल रोक दिया है. कोर्ट ने विभागीय जांच 15 दिन के अंदर पूरी करने का निर्देश दिया है.

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इस्लामिक प्रार्थना के आरोप में सस्पेंड शिक्षक के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है. (Reprentational Image-Pixel)
इस्लामिक प्रार्थना के आरोप में सस्पेंड शिक्षक के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है. (Reprentational Image-Pixel)

प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छात्रों के इस्लामिक प्रार्थना करने के आरोप में निलंबित एक शिक्षक को राहत दी है. कोर्ट ने फिलहाल शिक्षक के निलंबन आदेश को रोक दिया है. साथ ही विभागीय जांच जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है. 

मामले की जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने सुनवाई की. कोर्ट ने कहा कि यह कोशिश हो कि जांच 15 दिन के अंदर पूरी कर ली जाए. जांच पूरी होने तक शिक्षक का निलंबन प्रभावी नहीं रहेगा.

दरअसल, यह मामला संभल का है. शिक्षक मोहम्मद अनजर अहमद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उन्होंने 10 मई को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, संभल की ओर से जारी निलंबन आदेश को चुनौती दी थी. 

मालूम हो, विभागीय जांच में शिक्षक पर स्कूल में छात्रों के इस्लामिक प्रार्थना करने को लेकर आरोप लगाए गए थे. उस समय शिक्षक स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक थे. आरोप था कि स्कूल में छात्र इस्लामिक प्रार्थना कर रहे थे.

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छात्रों की यूनिफॉर्म को लेकर भी सवाल उठाए गए थे. आरोप था कि उनकी यूनिफॉर्म से वे एक विशेष समुदाय के छात्र के तौर पर पहचाने जा रहे थे. इन्हीं आरोपों को लेकर शिक्षक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी.

वहीं निलंबित टीचर ने इन आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कोर्ट में कहा कि जिस समय की यह घटना बताई जा रही है, उस दौरान वह मेडिकल लीव पर थे. उनकी छुट्टी विभाग से मंजूर थी. उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित गतिविधियां उनके कार्यकाल के दौरान नहीं हुई थीं.

शिक्षक ने कहा- सजा बहुत कड़ी

शिक्षक की ओर से कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि अगर उन्हें उस समय प्रभारी प्रधानाध्यापक माना भी जाए, तो उनके खिलाफ की गई कार्रवाई बहुत कड़ी है. यह सजा विभागीय नियमों के मुताबिक भी नहीं है. शिक्षक ने कोर्ट से अपने निलंबन आदेश में राहत देने की मांग की. उनका कहना था कि विभागीय जांच में वह अपने पक्ष में जरूरी दस्तावेज और अपनी दलीलें पेश करना चाहते हैं.

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शिक्षक की दलीलों का विरोध किया गया. सरकारी वकील ने कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक शिक्षक उस समय स्कूल में मौजूद थे.

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राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि शिक्षक उस प्रार्थना कार्यक्रम के दौरान मौजूद थे, जिसमें छात्र इस्लामिक प्रार्थना कर रहे थे. छात्रों की यूनिफॉर्म को लेकर भी सरकार ने वही आरोप दोहराए. हालांकि कोर्ट ने इस चरण में आरोपों की सच्चाई पर कोई फैसला नहीं दिया.

हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर आरोपों के गुण-दोष पर फैसला करने की जरूरत नहीं है. शिक्षक विभागीय जांच के दौरान अपनी सफाई दे सकते हैं. वह अपने पक्ष में दस्तावेज भी पेश कर सकते हैं.

कोर्ट ने कहा कि विभागीय जांच में शिक्षक को अपनी बेगुनाही साबित करने का पूरा मौका मिलेगा. जस्टिस मंजू रानी चौहान की बेंच ने कहा कि जांच 15 दिन के अंदर पूरी करने की कोशिश की जानी चाहिए.

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कोर्ट ने यह भी साफ किया कि जांच पूरी होने तक शिक्षक का निलंबन आदेश प्रभावी नहीं रहेगा.  फिलहाल शिक्षक को निलंबन से राहत मिल गई है. हालांकि कोर्ट ने यह तय नहीं किया है कि शिक्षक पर लगाए गए आरोप सही हैं या गलत है. इन आरोपों पर अंतिम फैसला विभागीय जांच में सामने आने वाले तथ्यों और शिक्षक की ओर से पेश किए गए बचाव के आधार पर होगा.

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