स्विट्जरलैंड के आल्प्स में 1992 में लापता हुए दो बेल्जियन पर्वतारोहियों के शव 34 साल बाद मिले हैं. 26 जुलाई को एक हाइकर को ट्रिफ्ट ग्लैशियर पर दो शव दिखाई दिए. इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को बाहर निकाला. DNA जांच में पता चला कि ये वही दो पर्वतारोही थे, जो 1992 में वाइसमीस पहाड़ के पास लापता हुए थे. उस समय उनकी उम्र 39 और 41 साल थी.
पुलिस ने बताया कि शव मिलने के बाद उन्हें ग्लेशियर से निकालकर सायन के एक अस्पताल भेजा गया. वहां DNA जांच से दोनों की पहचान हुई. माना जा रहा है कि दोनों इतने साल तक ग्लेशियर की बर्फ के नीचे दबे रहे. बर्फ पिघलने के बाद उनके शव बाहर दिखाई देने लगे. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं.
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Glamos के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 से 2025 के बीच स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों ने करीब 25 फीसदी बर्फ खो दी. सिर्फ 2025 में ही ग्लेशियरों की बर्फ में करीब 3 फीसदी की कमी आई. 2022 और 2023 में भी बर्फ पिघलने का रिकॉर्ड बना था.
1992 में लापता हुए थे दोनों
दोनों पर्वतारोही वाइसमीस पहाड़ के पास लापता हुए थे. यह पहाड़ 4,000 मीटर से ज्यादा ऊंचा है और स्विट्जरलैंड की सास वैली में है. यह जगह पर्वतारोहियों के बीच काफी मशहूर है.
वालिस पुलिस के पास 1925 से लापता लोगों का रिकॉर्ड है. पुलिस के मुताबिक, इनमें ज्यादातर लोग पहाड़ों, नदियों या दूसरे पानी वाले इलाकों में लापता हुए हैं. इन दोनों पर्वतारोहियों का भी 1992 के बाद कोई पता नहीं चला था.
पहले भी ग्लेशियर से मिले हैं पुराने शव
स्विट्जरलैंड में ऐसा पहले भी हो चुका है. 2023 में मैटर्होर्न के पास एक ग्लेशियर से इंसानी अवशेष मिले थे. जांच के बाद पता चला कि ये एक जर्मन पर्वतारोही के थे, जो 1986 से लापता था.
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दुनिया के कई हिस्सों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1990 के दशक से ग्लेशियरों की बर्फ कम हो रही है और 2000 के बाद इसकी रफ्तार और बढ़ी है. बढ़ता तापमान और क्लाइमेट चेंज इसके बड़े कारण हैं.
2025 में भी कम हुई ग्लेशियर की बर्फ
Glamos के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों में करीब 3 फीसदी की कमी आई. बढ़ते तापमान और कम बर्फबारी का असर पहाड़ी इलाकों पर भी पड़ रहा है. इससे स्की रिसॉर्ट और बर्फ से जुड़े खेलों पर भी असर पड़ रहा है.
दोनों पर्वतारोहियों के शव मिलने से 1992 से चल रही उनकी तलाश खत्म हो गई. साथ ही, यह मामला दिखाता है कि ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने से बर्फ के नीचे लंबे समय से दबे पुराने अवशेष भी सामने आ रहे हैं.
आजतक साइंस डेस्क