आर्कटिक में बढ़ती गर्मी साइबेरिया के मौसम और पर्यावरण को बदल रही है. नई रिसर्च के मुताबिक, साइबेरिया के पश्चिम और पूर्व में मौसम में अलग-अलग बदलाव हो रहे हैं. पश्चिमी साइबेरिया में गर्मी के साथ नमी भी बढ़ रही है. इससे जमीन के अंदर जमी बर्फ पिघल रही है. वहीं पूर्वी साइबेरिया में मौसम ज्यादा सूखा हो रहा है और जंगलों में आग बढ़ रही है. इन दोनों वजहों से मीथेन गैस का इमिशन बढ़ रहा है.
2010 से 2023 के बीच साइबेरिया से निकलने वाली मीथेन हर साल करीब 5% बढ़ी. इन 13 सालों में मीथेन इमिशन करीब 1.32 करोड़ टन बढ़ गया. साइबेरिया दुनिया में होने वाले कुल मीथेन इमिशन का करीब 5% हिस्सा देता है. लेकिन यहां से निकलने वाली मीथेन तेजी से बढ़ रही है. वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर धरती का तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में साइबेरिया से और ज्यादा मीथेन निकल सकती है.
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पश्चिमी साइबेरिया में पिघल रही जमीन
पश्चिमी साइबेरिया में गर्मी और नमी दोनों बढ़ रही हैं. उत्तर अटलांटिक महासागर से आने वाली गर्म और नम हवा भी इस इलाके को ज्यादा गर्म और नम बना रही है. इससे जमीन के अंदर जमी बर्फ तेजी से पिघल रही है. इस जमी हुई जमीन को पर्माफ्रॉस्ट कहा जाता है. यह जमीन कम से कम दो साल तक लगातार जमी रहती है. इसके नीचे हजारों साल से कार्बन जमा है.
जब जमीन पिघलती है तो यह कार्बन बाहर आने लगता है. मिट्टी में मौजूद छोटे जीव इस कार्बन को तोड़ते हैं और इस दौरान मीथेन गैस बन सकती है. साइबेरिया में उत्तरी हैमिस्पियर की करीब 46 फीसदी पर्माफ्रॉस्ट है. इसलिए यहां जमीन के पिघलने से बड़ी मात्रा में मीथेन निकलने का खतरा है.
पूर्वी साइबेरिया में बढ़ रही जंगल की आग
पूर्वी साइबेरिया में हालात कुछ अलग हैं. यहां गर्मी बढ़ने के साथ मौसम सूखा हो रहा है. सूखे मौसम में जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ जाता है. जंगल और पेड़-पौधे जलने पर मीथेन समेत कई ग्रीनहाउस गैसें हवा में जाती हैं. यानी पश्चिमी साइबेरिया में मीथेन बढ़ने की बड़ी वजह जमीन का पिघलना है, जबकि पूर्वी साइबेरिया में जंगल की आग अहम वजह है. दोनों जगह बढ़ती गर्मी इस बदलाव को बढ़ावा दे रही है.
13 साल में 5 फीसदी बढ़ा मीथेन उत्सर्जन
वैज्ञानिकों ने 2010 से 2023 के बीच साइबेरिया से निकलने वाली मीथेन का पता लगाने के लिए सैटेलाइट से मिली जानकारी और जमीन पर किए गए माप का इस्तेमाल किया. इसके अलावा एक कंप्यूटर मॉडल की मदद से भी मीथेन के इमिशन का अनुमान लगाया गया.
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रिसर्च में पाया गया कि इस दौरान साइबेरिया से मीथेन इमिशन हर साल करीब 5% बढ़ा. कुल मिलाकर इमिशन में करीब 1.32 करोड़ टन की बढ़ोतरी हुई. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी काफी बड़ी है और आने वाले समय में यह और बढ़ सकती है.
गर्मी बढ़ी तो बढ़ सकता है खतरा
वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह भी देखा कि भविष्य में क्या हो सकता है. इसके मुताबिक, अगर धरती गर्म होती रही तो साइबेरिया में जमीन के पिघलने और जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं. इससे और ज्यादा मीथेन हवा में पहुंच सकती है.
मीथेन एक ऐसी गैस है जो धरती की गर्मी बढ़ाती है. इसलिए साइबेरिया से मीथेन का बढ़ता उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन की समस्या को और गंभीर बना सकता है. वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि गर्मी बढ़ने से मीथेन बढ़े और मीथेन बढ़ने से धरती की गर्मी और बढ़ जाए.
आजतक साइंस डेस्क