मशहूर पर्वतारोही निर्मल पुर्जा का निधन, PAK में दुनिया का 12वां सबसे ऊंचा पहाड़ चढ़ते वक्त हुए थे लापता

प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा पाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर एवलांच में मारे गए. वे दस सदस्यीय दल का नेतृत्व कर रहे थे. यह पर्वतारोहण जगत के लिए बड़ा नुकसान है.

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बाएं से - पाकिस्तान में मौजूद ब्रॉड पीक और निर्मल पुर्जा. (Photo: Getty) बाएं से - पाकिस्तान में मौजूद ब्रॉड पीक और निर्मल पुर्जा. (Photo: Getty)

पंकज दास

  • काठमांडु,
  • 01 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:22 PM IST

प्रसिद्ध नेपाली पर्वतारोही निर्मल पुर्जा, जिन्हें दुनिया निम्स दाई या निम्स के नाम से जानती है, उनकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि हो गई है. पाकिस्तान के ब्रॉड पीक की चढ़ाई के दौरान हुई एवलांच में वे लापता हो गए थे. उनकी कंपनी एलीट एक्सपेड ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर बयान जारी कर यह खबर दी. 

कंपनी ने कहा कि निम्स ने एवलांच में जान गंवाई. अभियान के अन्य सदस्य भी जीवित नहीं बचे. यह पुष्टि शनिवार को हुई, जिससे दो दिनों की अनिश्चितता और उम्मीद का अंत हो गया. गुरुवार को दल कैंप-2 से कैंप-3 की ओर बढ़ रहा था तभी एवलांच ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. घटना के तुरंत बाद टीम से संपर्क पूरी तरह टूट गया.

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अल्पाइन क्लब ऑफ पाकिस्तान के अनुसार दस सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय दल में पांच नेपाली पर्वतारोही शामिल थे, जिनका नेतृत्व निम्स कर रहे थे. बाकी सदस्यों में पाकिस्तान, ओमान, अमेरिका और चीन के एक-एक पर्वतारोही तथा एक अन्य अंतरराष्ट्रीय सदस्य थे. 

ब्रॉड पीक करीब 8,047 मीटर ऊंचा है. दुनिया का बारहवां सबसे ऊंचा पर्वत है. कराकोरम रेंज का यह हिस्सा अपनी कठिन चढ़ाई और अचानक मौसम बदलाव के लिए जाना जाता है. एवलांच करीब 6,600 मीटर की ऊंचाई पर हुआ, जहां जोखिम सबसे ज्यादा रहता है.

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने विश्व कीर्तिमानधारी पर्वतारोही निर्मल पुर्जा समेत छह नेपाली और चार विदेशी पर्वतारोहियों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. प्रधानमंत्री शाह ने फेसबुक पर जारी श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि पर्वतारोहण केवल शिखर तक पहुंचने की यात्रा नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन, त्याग और मानवीय सीमाओं को चुनौती देने वाले अदम्य आत्मविश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है.

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उन्होंने कहा कि हिमालय कई लोगों को शिखर का गौरव देता है, लेकिन कभी-कभी उन्हें हमेशा के लिए अपनी गोद में भी समेट लेता है. फिर भी पर्वतारोही अपने साहस और समर्पण के कारण इतिहास में सदैव अमर रहते हैं.

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एलीट एक्सपेड का बयान  

एलीट एक्सपेड की स्थापना स्वयं निम्स ने की थी. कंपनी ने कहा कि आज वे निम्स के साथ-साथ उनके विश्वसनीय साथी और गाइड पुर्व बहादुर गुरुंग युक्ता तथा नीमा शेरपा के निधन पर भी शोक मना रहे हैं. बयान में परिवारों, मित्रों और प्रियजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई और उनसे निजता का सम्मान करने की अपील की गई. 

कंपनी ने निम्स को पर्वतारोहण के महानतम पर्वतारोही और नेता के रूप में याद किया, जिन्होंने साहस, विनम्रता और मानवीय क्षमता में विश्वास के जरिए लाखों लोगों को प्रेरित किया. उन्होंने दिखाया कि बड़े सपने देखकर और सीमाओं को न मानकर क्या हासिल किया जा सकता है.

निर्मल पुर्जा नेपाली मूल के पूर्व ब्रिटिश गोरखा सैनिक थे. उन्होंने 2019 में दुनिया के सभी 14 आठ हजार मीटर से ऊंचे शिखरों पर सिर्फ छह महीने और कुछ दिनों में चढ़ाई का रिकॉर्ड बनाया. यह उपलब्धि नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री 14 पीक्स: नथिंग इज इंपॉसिबल के जरिए वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हुई. 

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उन्होंने बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के भी कई शिखर फतह किए और दर्जनों बार आठ हजार मीटर की ऊंचाई पार की. उनका नेतृत्व ऊंचाई वाले अभियानों में मिसाल माना जाता था. नेपाल के पर्वतारोहण समुदाय के लिए उनका निधन अपूरणीय क्षति है क्योंकि उन्होंने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाए बल्कि युवाओं को प्रेरित किया और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दिया.

बचाव प्रयास और चुनौतियां

एवलांच के बाद पाकिस्तानी बचाव दल, हेलिकॉप्टर और ड्रोन की मदद से खोज जारी रही. खराब मौसम ने काम को मुश्किल बना दिया. कुछ शव पहले ही बरामद हो चुके थे, जिनमें ओमान की नधीरा अल-हारथी और अन्य शामिल थे. बाद में ड्रोन सर्वेक्षण से कैंप-1 के पास और संकेत मिले. जमीनी टीम ने पहचान की. 

इस घटना ने फिर याद दिलाया कि आधुनिक तकनीक और अनुभव के बावजूद पहाड़ों में प्रकृति कितनी शक्तिशाली है. जीपीएस ट्रैकर्स ने शुरुआती दिनों में थोड़ी उम्मीद जगाई थी, लेकिन अंत में हकीकत सामने आई.

यह त्रासदी पूरे विश्व के पर्वतारोहण जगत को झकझोर गई है. नेपाल, पाकिस्तान और अन्य देशों में शोक की लहर है. कई अभियान दल अपनी चढ़ाइयां रोककर मदद कर रहे थे. ब्रॉड पीक जैसी चोटियों पर सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की जरूरत पर चर्चा शुरू हो गई है. निम्स की कहानी साहस की मिसाल रहेगी, लेकिन यह भी सिखाती है कि जोखिम हमेशा मौजूद रहता है. परिवारों के साथ पूरी दुनिया खड़ी है. 

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