रेड स्प्राइट... हिमालय के ऊपर दिखा अद्भुत नजारा, देखें Live वीडियो

तिब्बत के 5000 मीटर ऊंचे इलाके में फोटोग्राफर शूचांग ने हाई-स्पीड कैमरे से रेड स्प्राइट्स की शानदार तस्वीरें कैद कीं. ये ऊपरी वायुमंडल में तूफानों से बनने वाली बिजली हैं, जो लाल जेलीफिश जैसे दिखते हैं.

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ये है तिब्बत के हिमालय के ऊपर दिखे रेड स्प्राइट्स की तस्वीर. (Photo: X/Dong Shuchang) ये है तिब्बत के हिमालय के ऊपर दिखे रेड स्प्राइट्स की तस्वीर. (Photo: X/Dong Shuchang)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 03 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:11 AM IST

मई 2026 के अंत में तिब्बत के शानन शहर के पास पुमा युमको झील के किनारे रात का आसमान अचानक लाल-नारंगी रोशनी से जगमगा उठा. चीनी एस्ट्रोफोटोग्राफर डोंग शूचांग (Dong Shuchang) ने अपने हाई-स्पीड सोनी अल्फा 1 कैमरा से इस दुर्लभ घटना को बेहद साफ-सुथरे तरीके से कैद किया.

5000 मीटर से ज्यादा की ऊंचाई पर खड़े होकर उन्होंने 400 किलोमीटर दूर तक होने वाली घटनाओं को देखा. इनमें रेड स्प्राइट्स के साथ हरे रंग के 'घोस्ट स्प्राइट्स' भी दिखे, जो ऑक्सीजन के चमकने से बनते हैं. यह वीडियो न सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रहा है.

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रेड स्प्राइट्स ऊपरी वायुमंडल में होने वाली अनोखी बिजली की घटना है. इन्हें आम बिजली से अलग माना जाता है क्योंकि ये बादलों से नीचे की तरफ नहीं, बल्कि ऊपर की तरफ जाती हैं. वैज्ञानिक भाषा में इन्हें ट्रांजिएंट लुमिनस इवेंट्स (TLEs) कहते हैं. स्प्राइट शब्द का पूरा नाम है - Stratospheric Perturbations Resulting from Intense Thunderstorm Electrification. ये आमतौर पर मेसोस्फीयर में 50 से 90 किलोमीटर की ऊंचाई पर दिखते हैं. 

यहां देखिए वो वीडियो जिसमें रेड स्प्राइट्स दिखे

ये लाल रंग के जेलीफिश, गाजर या बड़े-बड़े खंभों जैसे दिखते हैं. इनकी लंबाई कई किलोमीटर तक हो सकती है और ये सिर्फ कुछ मिलीसेकंड (एक सेकंड का हजारवां हिस्सा) तक ही रहते हैं. इसलिए इन्हें आंखों से देखना बहुत मुश्किल होता है. हाई-स्पीड कैमरों और ऊंची जगहों से ही इनकी साफ तस्वीरें से सकते हैं. रंग लाल इसलिए होता है क्योंकि ऊपरी वायुमंडल में कम दबाव वाली जगह पर नाइट्रोजन के एटम चार्ज होकर लाल रोशनी छोड़ते हैं.

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रेड स्प्राइट्स कैसे और कब बनते हैं?

रेड स्प्राइट्स बनने के लिए सबसे पहले जमीन के पास एक बहुत शक्तिशाली तूफान होना जरूरी है. खासकर जब बादल से जमीन पर पॉजिटिव चार्ज वाली बिजली गिरती है, यही इनका मुख्य कारण होती है. जब ऐसा होता है तो बादलों के ऊपरी हिस्से में बड़ा इलेक्ट्रिक फील्ड बन जाता है. 

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यह फील्ड इतना मजबूत होता है कि 80 किलोमीटर ऊपर मेसोस्फीयर तक पहुंच जाता है. वहां हवा का दबाव बहुत कम होता है, इसलिए बिजली टूटने के लिए कम वोल्टेज ही काफी होता है. नतीजा यह होता है कि इलेक्ट्रॉन्स की तेज अवलांच शुरू हो जाती है और बड़े पैमाने पर डिस्चार्ज होता है. 

ये स्प्राइट्स आमतौर पर रात के समय बनते हैं जब तूफान बहुत सक्रिय होते हैं. इन्हें देखने के लिए आसमान साफ होना चाहिए और तूफान की जगह से थोड़ी दूर होना बेहतर होता है, ताकि नीचे की बिजली की चमक स्प्राइट्स को ढक न सके. हिमालय जैसे ऊंचे इलाकों में पतली हवा और साफ आसमान की वजह से इन्हें दूर से भी देखा जा सकता है.

तिब्बत में हुई यह घटना

26 मई 2026 की रात को शूचांग पुमा युमको झील के किनारे 5000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर मौजूद थे. उन्होंने मौसम पूर्वानुमान और सैटेलाइट डेटा के आधार पर प्लानिंग की थी. उनकी हाई-स्पीड कैमरा ने स्प्राइट्स को स्लो मोशन में कैद किया. पतली हवा की वजह से उन्होंने 400 km दूर तक के इवेंट्स देखे. 

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सबसे खास बात हरे रंग के घोस्ट स्प्राइट्स की थी, जो ऑक्सीजन के उत्तेजित होने से बनते हैं. शूचांग ने बताया कि यह उनके पिछले चार सालों में सबसे साफ और बड़ा स्प्राइट रिकॉर्डिंग है. वीडियो में स्प्राइट्स आतिशबाजी या जेलीफिश की तरह दिख रहे हैं, जो देखने वालों को हैरान कर देते हैं.

2022 का बड़ा रिकॉर्ड

शूचांग यह पहली बार नहीं कर रहे हैं. साल 2022 में उन्होंने अपनी साथी फोटोग्राफर एंजेल आन के साथ उसी इलाके में 100 से ज्यादा स्प्राइट्स कैद किए थे. वह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा स्प्राइट आउटब्रेक माना गया. उन तस्वीरों ने वैज्ञानिकों को हिमालय क्षेत्र में तूफानों की बिजली की गतिविधि समझने में मदद की. रेड स्प्राइट्स सिर्फ खूबसूरत नजारा नहीं हैं. ये पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को समझने में महत्वपूर्ण हैं. 

ये आयनोस्फीयर और मेसोस्फीयर के बीच इलेक्ट्रिकल कनेक्शन दिखाते हैं. ये स्प्राइट्स विमानों और सैटेलाइट्स पर पड़ने वाले प्रभाव को समझने में मदद करते हैं. साथ ही ये हमें बताते हैं कि तूफान कितनी दूर तक वायुमंडल को प्रभावित कर सकते हैं. तिब्बत जैसे ऊंचे पठार पर ये रिकॉर्डिंग इसलिए खास हैं क्योंकि यहां हवा पतली है और प्रदूषण कम है. इससे दूर के स्प्राइट्स भी साफ दिखते हैं. 

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प्रकृति का अनोखा चमत्कार

रेड स्प्राइट्स हमें याद दिलाते हैं कि हमारी पृथ्वी अभी भी कितने रहस्यों से भरी हुई है. नीचे तूफान में बिजली गिरती है तो ऊपर आसमान में लाल जादू होता है. शूचांग जैसे फोटोग्राफरों की मेहनत से आम लोग भी इस अनोखे नजारे को देख पा रहे हैं. 

यह घटना न सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल हुई, बल्कि लोगों में विज्ञान के प्रति रुचि भी बढ़ा रही है. भविष्य में और बेहतर कैमरों और रिसर्च से हम इन स्प्राइट्स के और राज खोल सकेंगे. फिलहाल तिब्बत का यह लाल आसमान हमें प्रकृति की सुंदरता और शक्ति का एहसास करा रहा है.

रेड स्प्राइट्स देखना चाहने वाले लोग ऊंची जगहों, साफ रातों और तूफानी मौसम में कोशिश कर सकते हैं, लेकिन याद रखें – ये बहुत कम समय के लिए दिखते हैं. हाई-स्पीड कैमरा और धैर्य ही इनका साथ देते हैं.

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