नेपाल के रसुवा जिले में बुधवार 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ ने न सिर्फ गांव, बाजार और पुल तबाह किए बल्कि जलविद्युत क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. नेपाल विद्युत प्राधिकरण के प्रारंभिक विवरण के अनुसार, संचालन में रही और निर्माणाधीन समेत कुल 13 विद्युत प्रोजेक्ट्स प्रभावित हुई हैं. इनमें 8 प्रोजेक्ट्स चालू हैं जबकि 5 निर्माणाधीन हैं. प्रभावित प्रोजेक्ट्स की कुल क्षमता 748 मेगावाट बताई गई है.
संचालन में रही 8 प्रोजेक्ट्स की कुल क्षमता 354 मेगावाट है. वहीं निर्माणाधीन 5 प्रोजेक्ट्स की क्षमता 394 मेगावाट है. यह आंकड़ा अभी प्रारंभिक है. बाढ़ के कारण बांध, विद्युतगृह, पहुंच मार्ग, प्रसारण संरचना और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए वास्तविक नुकसान का पूरा आकलन जमीनी जांच के बाद ही संभव होगा.
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रसुवा की प्रमुख प्रभावित प्रोजेक्ट्स
रसुवा जिले में संचालन में रही प्रमुख जलविद्युत प्रोजेक्ट्स में सबसे बड़ी 216 मेगावाट की अपर त्रिशूली-1 है. इसके अलावा 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना, 120 मेगावाट की रसुवा-भोटेकोशी, 78 मेगावाट की सान्जेन खोला, 22 मेगावाट की चिलिमे, 20 मेगावाट की लांगटांग खोला और 6.42 मेगावाट की अपर मेलुंग-ए भी बाढ़ से प्रभावित हुई हैं. ये प्रोजेक्ट्स भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली पर आधारित हैं, जो बाढ़ की मुख्य चपेट में आईं.
बाढ़ का असर सिर्फ रसुवा तक सीमित नहीं रहा. पड़ोसी नुवाकोट जिले की जलविद्युत प्रोजेक्ट्स पर भी इसका प्रभाव पड़ा है. नुवाकोट में संचालन में रही प्रमुख प्रोजेक्ट्स में 24 मेगावाट की त्रिशूली, 14.1 मेगावाट की देवीघाट, 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए और 25 मेगावाट की सौर परियोजना शामिल हैं.
नुवाकोट में संचालन में रही 4 प्रोजेक्ट्स की कुल क्षमता 123 मेगावाट है. निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स में नुवाकोट की 37 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3बी और 15.6 मेगावाट की मिडिल त्रिशूली गंगा प्रभावित हुई हैं. इन दोनों की कुल क्षमता 52.6 मेगावाट है.
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बिजली आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
नेपाल की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत का बड़ा हिस्सा है. 748 मेगावाट क्षमता का प्रभावित होना देश की बिजली आपूर्ति के लिए चिंता का विषय है. कई प्रोजेक्ट्स चीन-नेपाल सीमा के नजदीक भोटेकोशी नदी पर स्थित हैं, जहां बाढ़ सबसे ज्यादा विनाशकारी रही. रसुवागढ़ी और रसुवा-भोटेकोशी जैसी प्रोजेक्ट्स सीमा व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी हैं.
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि नुकसान का विस्तृत आकलन अभी बाकी है. बांधों में मलबा जमा होना, टरबाइन और जनरेटर को नुकसान, पहुंच सड़कों का कटना और प्रसारण लाइनों का टूटना आम समस्याएं हो सकती हैं. मरम्मत में हफ्ते या महीने लग सकते हैं, जिससे बिजली उत्पादन में अस्थायी कमी आ सकती है.
आगे की चुनौतियां और राहत प्रयास
बाढ़ के बाद राहत-बचाव कार्यों के साथ-साथ बिजली प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा और मरम्मत को प्राथमिकता दी जा रही है. सेना और स्थानीय प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. कई जगह पहुंच मार्ग क्षतिग्रस्त होने से आकलन में देरी हो रही है.
यह घटना हिमालयी जलविद्युत प्रोजेक्ट्स की संवेदनशीलता को फिर रेखांकित करती है. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी घटनाओं के बढ़ते खतरे के बीच ऐसी प्रोजेक्ट्स के लिए बेहतर अर्ली वार्निंग सिस्टम, मजबूत डिजाइन और सीमा पार सूचना साझाकरण की जरूरत और बढ़ गई है.
नेपाल विद्युत प्राधिकरण आगे विस्तृत रिपोर्ट जारी करेगा, जिसमें वास्तविक नुकसान और मरम्मत की समय-सीमा स्पष्ट होगी. फिलहाल देश की बिजली व्यवस्था पर दबाव बना हुआ है और प्रभावित प्रोजेक्ट्स को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास तेज किए जा रहे हैं.
पंकज दास