रूस अपना खुद का उपग्रह इंटरनेट सिस्टम बना रहा है. इसका नाम रासवेत है. यह स्पेसएक्स के स्टारलिंक जैसा काम करेगा. लेकिन एक बार फिर मुसीबत आ गई. रासवेत-3 नंबर 17 नाम का उपग्रह 30 अक्टूबर को धरती के वायुमंडल में घुसकर जल गया. यह उपग्रह 19 जुलाई को आसमान में भेजा गया था. तीन महीने भी नहीं गुजरे थे कि यह वापस गिर गया. इससे पहले जून में भी एक ऐसा ही उपग्रह जल चुका था.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चाहते हैं कि उसे विदेशी कंपनियों पर निर्भर न रहना पड़े. खासकर दूर-दराज के इलाकों में अच्छा इंटरनेट पहुंचे. युद्ध और पाबंदियों के समय खुद का सिस्टम होना बहुत जरूरी है. इसलिए रूस कई छोटे उपग्रह आसमान में भेज रहा है जो मिलकर इंटरनेट देंगे.
आमतौर पर उपग्रह को पहले थोड़ी नीची ऊंचाई पर भेजते हैं. फिर उसके इंजन से उसे ऊपर ले जाते हैं. लेकिन यह उपग्रह ऊपर नहीं जा पाया. धीरे-धीरे नीचे आता गया और आखिर में जल गया. जून वाले उपग्रह के साथ भी यही हुआ था. अच्छी बात यह है कि अभी भी करीब 30 उपग्रह आसमान में हैं. ज्यादातर 500 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं. पूरा काम रुका नहीं है पर दिक्कतें जरूर आ रही हैं.
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क्यों मुश्किल हो रहा है यह काम
इतने सारे उपग्रह सही जगह पहुंचाना और लंबे समय तक चलाना आसान नहीं है. एलन मस्क के स्टारलिंक ने हजारों उपग्रह भेजकर यह काम कर दिखाया है. रूस को अभी अनुभव कम है. पाबंदियों की वजह से कुछ जरूरी पार्ट्स भी आसानी से नहीं मिल रहे होंगे. दो-दो उपग्रहों के फेल होने से साफ है कि अभी और सुधार की जरूरत है.
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रूस फिर भी इस काम को आगे बढ़ा रहा है. दूर के इलाकों और सेना के लिए अच्छा कनेक्शन बहुत जरूरी है. अगर गलतियां सुधार ली गईं तो आगे चलकर यह नेटवर्क काम कर सकता है. लेकिन फिलहाल रास्ता आसान नहीं दिख रहा. बार-बार टेस्ट करके और सीखकर ही सफलता मिल सकती है.
आम भाषा में कहें तो रूस अपना स्टारलिंक बनाना चाहता है, लेकिन अभी तक दो उपग्रह सही से काम नहीं कर पाए. कोशिश जारी है, लेकिन दिक्कतें भी कम नहीं हैं.
आजतक साइंस डेस्क