नॉर्थ कोरिया ने दागी ऐसी मिसाइल, जिससे निकले क्लस्टर बम...होगी भयानक तबाही

नॉर्थ कोरिया ने 31 अक्टूबर को सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर बम वॉरहेड का सफल परीक्षण किया. यह 12-13 हेक्टेयर क्षेत्र को नष्ट कर सकता है. 2026 के अंत तक चार प्रकार के वॉरहेड सैन्य इकाइयों को दिए जाएंगे.

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नॉर्थ कोरिया ने मिसाइलों से लॉन्च किए क्लस्टर बम. बड़े इलाके में तबाही मचाता है ये हथियार. (Screengrab:KCNA/Reuters) नॉर्थ कोरिया ने मिसाइलों से लॉन्च किए क्लस्टर बम. बड़े इलाके में तबाही मचाता है ये हथियार. (Screengrab:KCNA/Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 01 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:42 PM IST

नॉर्थ कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया है. सरकारी मीडिया केसीएनए ने 1 नवंबर को रिपोर्ट किया कि देश के रक्षा विज्ञान अनुसंधान संस्थानों ने सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों पर लगाने के लिए स्टैंडर्ड टाइप-2 क्लस्टर बम वॉरहेड का महत्वपूर्ण परीक्षण किया. यह परीक्षण 31 अक्टूबर को हुआ था. 

जनरल किम जोंग-सिक ने इस परीक्षण की निगरानी की. इस वॉरहेड ने अधिकतम घनत्व पर 12 से 13 हेक्टेयर के लक्ष्य क्षेत्र को नष्ट करने की क्षमता दिखाई. यह परीक्षण युद्ध की परिस्थितियों में वॉरहेड की अनुकूलन क्षमता और उसकी विनाश शक्ति को जांचने के लिए किया गया था.

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क्लस्टर बम क्या है? 

क्लस्टर बम एक ऐसा हथियार है जो मुख्य मिसाइल से अलग होकर कई छोटे बम फेंकता है. ये छोटे बम एक बड़े क्षेत्र में फैल जाते हैं और भयानक विनाश करते हैं. पारंपरिक एकल वॉरहेड जहां एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वहीं क्लस्टर बम बड़े इलाकों जैसे सैनिक शिविर, हवाई अड्डे या बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं.

नॉर्थ कोरिया ने कहा है कि उसके क्लस्टर बम वॉरहेड चार अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं. देश का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक उसकी सैन्य इकाइयां इन सभी प्रकार के वॉरहेड का उपयोग कर सकें, जो अलग-अलग ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से चुने जाएंगे. यह कदम नॉर्थ कोरिया की सैन्य आधुनिकीकरण की योजना का हिस्सा लगता है.

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यह परीक्षण अकेला नहीं है. हाल के हफ्तों में नॉर्थ कोरिया ने कई मिसाइल परीक्षण किए हैं. साउथ कोरिया ने गुरुवार को नॉर्थ कोरिया के पूर्वी तट से लगभग 10 बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण का पता लगाया था. यह तब हुआ जब जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज साउथ कोरिया में शिखर सम्मेलन के लिए पहुंचे थे. 

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इसके अलावा नॉर्थ कोरिया ने ड्रोन प्रदर्शनी भी आयोजित की है. राज्य मीडिया ने इस परीक्षण की तस्वीरों का एक कॉम्बो जारी किया, जिसमें मिसाइलों के लॉन्च दिखाए गए. विशेषज्ञों का मानना है कि ये गतिविधियां सैन्य ताकत बढ़ाने और क्षेत्र में दबाव बनाने की कोशिश हैं.

विश्लेषकों की नजर

विश्लेषक इस परीक्षण को नॉर्थ कोरिया की रणनीति में बदलाव के रूप में देख रहे हैं. प्योंगयांग अब केवल सटीक हमलों पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि क्षेत्र-प्रभाव वाले हथियारों की ओर भी बढ़ रहा है. क्लस्टर बम जैसे हथियार बड़े क्षेत्रों को कवर कर सकते हैं, जिससे दुश्मन की सेना को फैलने या छिपने में मुश्किल हो. 

नॉर्थ कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस के पक्ष में सैनिक भेजकर आधुनिक युद्ध का अनुभव भी हासिल किया है. यह अनुभव अब उसकी अपनी सैन्य प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, राज्य मीडिया के दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है. साउथ कोरिया और अन्य देश इन गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं.

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यह विकास कोरियाई प्रायद्वीप और पूर्वी एशिया की सुरक्षा स्थिति को और जटिल बना सकता है. नॉर्थ कोरिया की मिसाइल क्षमता में वृद्धि से पड़ोसी देशों में चिंता बढ़ती है. क्लस्टर बम के इस्तेमाल से नागरिक क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, क्योंकि ये बम बड़े इलाकों में फैल जाते हैं. 

अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से क्लस्टर बमों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की वकालत करता रहा है, लेकिन नॉर्थ कोरिया ऐसे किसी समझौते का हिस्सा नहीं है. प्योंगयांग का कहना है कि ये हथियार उसकी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं.

आने वाले समय की संभावनाएं

नॉर्थ कोरिया ने स्पष्ट किया है कि वह 2026 के अंत तक अपनी सैन्य इकाइयों को इन चार प्रकार के वॉरहेड से लैस कर देगा. यह योजना दर्शाती है कि देश अपनी मिसाइल शक्ति को और विविध बनाना चाहता है. अलग-अलग लक्ष्यों के लिए अलग वॉरहेड का इस्तेमाल करने की क्षमता युद्ध की रणनीति को लचीला बनाती है. 

साथ ही, लगातार परीक्षणों से नॉर्थ कोरिया अपनी तकनीकी प्रगति का संदेश भी दे रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम सैन्य आधुनिकीकरण का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इनका मकसद क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करना भी हो सकता है.

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कुल मिलाकर, यह परीक्षण नॉर्थ कोरिया की बढ़ती सैन्य महत्वाकांक्षाओं को रेखांकित करता है. क्लस्टर बम वॉरहेड के सफल परीक्षण से उसकी सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता में इजाफा हुआ है. हालांकि, इन दावों की पूरी सच्चाई तभी सामने आएगी जब स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि होगी. क्षेत्र में तनाव पहले से ही ऊंचा है और ऐसे विकास इसे और बढ़ा सकते हैं. विश्व समुदाय को इन गतिविधियों पर नजर रखने और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम करने की जरूरत है.

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