15 अगस्त 2026 को लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा सुरक्षा को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया. उन्होंने कहा कि चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों के लिए भारी मात्रा में बिजली की जरूरत पड़ेगी. इसलिए परमाणु ऊर्जा को मजबूत करना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु बिजली का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है.
इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य भी रखा गया है. इस वर्ष भारत ने फास्ट ब्रीडर न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल करके एक अहम पड़ाव पार किया है. इससे परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की राह खुल गई है. यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी सफलता नहीं बल्कि देश की दीर्घकालिक ऊर्जा योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
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तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने अप्रैल 2026 में पहली क्रिटिकैलिटी हासिल की. यानी इसमें नियंत्रित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया शुरू हो गई. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना 500 मेगावाट क्षमता वाला रिएक्टर है. इसे भारत के तीन चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत माना जा रहा है.
फास्ट ब्रीडर तकनीक क्यों है खास
सामान्य परमाणु रिएक्टर यूरेनियम को जलाकर बिजली बनाते हैं और ईंधन खत्म हो जाता है. लेकिन फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ज्यादा ईंधन पैदा करता है जितना वह खपत करता है. यह प्लूटोनियम-यूरेनियम मिश्रित ऑक्साइड (एमओएक्स) ईंधन का इस्तेमाल करता है.
आसपास यूरेनियम-238 या थोरियम-232 की परत रखकर नए विखंडनीय पदार्थ बनाए जाते हैं. भारत में थोरियम भंडार बहुत ज्यादा है. तीसरे चरण में इसी थोरियम से यूरेनियम-233 बनाकर बड़े पैमाने पर बिजली पैदा करने की योजना है. इसलिए फास्ट ब्रीडर तकनीक को पुल कहा जाता है जो वर्तमान से भविष्य को जोड़ता है.
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इस महारत से भारत परमाणु ईंधन आयात पर निर्भरता घटा सकेगा. सीमित यूरेनियम संसाधनों से कई गुना ज्यादा ऊर्जा निकाली जा सकेगी. वैज्ञानिकों ने इसे अक्षय पात्र जैसा बताया है क्योंकि एक बार ईंधन डालने के बाद यह खुद और ईंधन बनाता रहता है. रूस के बाद भारत व्यावसायिक स्तर पर इस तकनीक वाला रिएक्टर चलाने वाला दूसरा देश बनने की राह पर है.
100 गीगावाट का लक्ष्य और पांच नए रिएक्टर
वर्तमान में भारत की परमाणु क्षमता करीब 8.8 गीगावाट है. 2047 तक इसे 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. यह दस गुना से ज्यादा वृद्धि है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दशक में पांच नए रिएक्टर चालू किए जाएंगे. इनमें छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भी शामिल हो सकते हैं जो तेजी से लगाए जा सकते हैं. सरकार ने शांति अधिनियम पास कर निजी क्षेत्र की भागीदारी का रास्ता भी खोला है.
यह लक्ष्य सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और नेट जीरो लक्ष्य से भी जुड़ा है. परमाणु ऊर्जा कार्बन उत्सर्जन कम करती है. चौबीस घंटे बिजली दे सकती है. सौर और पवन ऊर्जा के साथ मिलकर यह स्थिर बिजली व्यवस्था बनाने में मदद करेगी.
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आत्मनिर्भरता और वैज्ञानिक गौरव
यह सफलता आत्मनिर्भर भारत अभियान की मिसाल है. दशकों की मेहनत, इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के प्रयास से यह संभव हुआ. देरी जरूर हुई लेकिन अंत में स्वदेशी तकनीक सफल साबित हुई. अब देश न सिर्फ बिजली बनाएगा बल्कि ईंधन भी खुद पैदा करेगा.
कुल मिलाकर फास्ट ब्रीडर तकनीक में महारत भारत को ऊर्जा सुरक्षा की मजबूत नींव दे रही है. 2047 के विकसित भारत संकल्प में परमाणु ऊर्जा की भूमिका और बढ़ेगी. प्रधानमंत्री के शब्दों में यह पड़ाव परमाणु ईंधन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा और सफल कदम है.
आजतक साइंस डेस्क