भूकंप से पहले आसमान में सिग्नल भेजती है धरती, सैटेलाइट ने पकड़ी हलचल

क्या बड़े भूकंप से पहले कोई सुराग मिल सकता है? ईरान के 6 बड़े भूकंपों के अध्ययन में सैटेलाइट डेटा ने एक दिलचस्प पैटर्न दिखाया, जहां भूकंप से महीनों पहले चुंबकीय हलचल बढ़ती नजर आई.

Advertisement
भूकंप आने से पहले धरती खास तरह का सिग्लन आसमान में भेजती है. (Photo: ITG) भूकंप आने से पहले धरती खास तरह का सिग्लन आसमान में भेजती है. (Photo: ITG)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 15 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:34 AM IST

क्या बड़े भूकंप आने से पहले उनके कुछ संकेत मिल सकते हैं? ईरान के इलाके में आए 6 बड़े भूकंपों की जांच में वैज्ञानिकों को एक ऐसा पैटर्न मिला है, जो इस सवाल का जवाब खोजने में मदद कर सकता है. इन भूकंपों की तीव्रता 6.0 से 7.3 के बीच थी. ये सभी भूकंप 2014 से 2021 के बीच आए थे. जांच में पाया गया कि भूकंप से कुछ महीने पहले जमीन के अंदर दबाव बढ़ने के संकेत दिखे. उसी दौरान धरती के ऊपर चुंबकीय हलचल भी बढ़ी.

Advertisement

इस जांच में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के स्वार्म मिशन के सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल किया गया. वैज्ञानिकों ने भूकंप के केंद्र से करीब 300 किलोमीटर के दायरे में हुए चुंबकीय बदलावों को देखा. फिर इन बदलावों की तुलना उस इलाके में हुई भूकंपीय गतिविधि से की गई. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब सैटेलाइट से भूकंप की सही तारीख या जगह पहले से बताई जा सकती है.

यह भी पढ़ें: कोलंबिया भूकंप- 24 घंटे में 30 आफ्टरशॉक, 60 लाख लोगों ने महसूस किए झटके, तबाही की तस्वीरें

6 भूकंपों में दिखा एक जैसा बदलाव

इस जांच में 6 बड़े भूकंपों को देखा गया. इनमें 18 अगस्त 2014 का 6.2 तीव्रता वाला मुर्मुरी भूकंप, 1 दिसंबर 2017 का 6.2 तीव्रता वाला होजेडक भूकंप, 12 नवंबर 2017 का 7.3 तीव्रता वाला अज़गेलेह भूकंप, 2021 का 6.4 तीव्रता वाला फिन भूकंप और अफगानिस्तान के पास आया 6.0 तीव्रता वाला सेफिडसांग भूकंप शामिल थे.

Advertisement

वैज्ञानिकों ने एक और चीज देखी, जिसे b-value कहा जाता है. इससे किसी इलाके में आने वाले छोटे और बड़े भूकंपों के अनुपात का अंदाजा मिलता है. b-value कम होने का मतलब चट्टानों के अंदर दबाव बढ़ने का संकेत हो सकता है. कई मामलों में b-value कम होने के साथ सैटेलाइट से मिली चुंबकीय हलचल बढ़ती दिखी.

भूकंप से महीनों पहले दिखे बदलाव

मुर्मुरी भूकंप से करीब 105 से 20 दिन पहले b-value में गिरावट दिखी. इसी दौरान तीनों सैटेलाइटों ने चुंबकीय बदलाव दर्ज किए. एक डेटा में भूकंप से करीब 64 दिन पहले एक ही दिन में 5 चुंबकीय बदलाव दर्ज हुए.

यह भी पढ़ें: अल-नीनो का कहर- इंडोनेशिया में सूखा पड़ा तो डैम के नीचे से बाहर आया सालों पुराना गांव

होजेडक भूकंप में यह बदलाव और साफ था. यहां भूकंप से करीब 200 से 100 दिन पहले b-value तेजी से कम हुई. इसी दौरान चुंबकीय हलचल भी ज्यादा दर्ज हुई. यानी इस मामले में भूकंप से करीब 3 से 6 महीने पहले ही कुछ बदलाव दिखने लगे थे.

जमीन के अंदर का असर ऊपर कैसे पहुंच सकता है?

जब जमीन के अंदर चट्टानों पर दबाव बढ़ता है, तो उनमें छोटी दरारें पड़ सकती हैं. इससे चट्टानों के अंदर बिजली और चुंबक से जुड़े गुण बदल सकते हैं. दरारों से गैस और दूसरे पदार्थ भी बाहर निकल सकते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन बदलावों का असर ऊपर के वातावरण और आयनमंडल तक पहुंच सकता है.

Advertisement

आयनमंडल में होने वाली हर चुंबकीय हलचल भूकंप की वजह से नहीं होती. सूरज की गतिविधि और भू-चुंबकीय तूफान भी ऐसे बदलाव कर सकते हैं. इसलिए वैज्ञानिकों ने ऐसे समय के आंकड़ों को अलग रखा, जब सूर्य और धरती के चुंबकीय क्षेत्र की गतिविधि ज्यादा थी.

अभी भूकंप की सटीक भविष्यवाणी नहीं

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह रिसर्च सिर्फ एक संभावित संबंध दिखाती है. अभी यह कहना सही नहीं होगा कि सैटेलाइट देखकर भूकंप की तारीख, जगह या तीव्रता पहले से बताई जा सकती है. इसके लिए अलग-अलग देशों और इलाकों के ज्यादा भूकंपों का डेटा देखना होगा.

फिलहाल इस अध्ययन की खास बात यह है कि इन 6 बड़े भूकंपों से पहले जमीन के अंदर बढ़ते दबाव और ऊपर चुंबकीय हलचल के बीच एक जैसा पैटर्न कई बार दिखा. अगर आगे की रिसर्च में भी यही बात सामने आती है, तो सैटेलाइट डेटा भूकंप से पहले होने वाले बदलावों को समझने में मदद कर सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »