चीन ने फिर खोला नेपाल जाने का रास्ता, बाढ़ से बुरी तरह तबाह हुआ था हाईवे

चीन ने नेपाल सीमा के ग्यिरोंग क्रॉसिंग तक जाने वाला एकमात्र रास्ता फिर खोल दिया है. बाढ़ से क्षतिग्रस्त जी-216 हाईवे ठीक होने से भारी मशीनें आपदा क्षेत्र पहुंचीं. नेपाल में 1114 मौतें, चीन में 16 मरे व 546 लापता, जिनमें भारतीय-लातवियाई पर्यटक शामिल हैं.

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ये ड्रोन तस्वीर ग्यिरोंग पोर्ट की तरफ जाने वाली नई सड़क की है. (Photo: Reuters) ये ड्रोन तस्वीर ग्यिरोंग पोर्ट की तरफ जाने वाली नई सड़क की है. (Photo: Reuters)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:45 PM IST

चीन ने नेपाल के साथ लगने वाले ग्यिरोंग सीमा चौकी तक जाने वाले एकमात्र सड़क मार्ग को फिर से खोल दिया है. करीब एक सप्ताह पहले विनाशकारी बाढ़ ने जी-216 राष्ट्रीय राजमार्ग के कई हिस्से बहा दिए थे. अब भारी मशीनरी पहली बार मुख्य आपदा क्षेत्र तक पहुंच सकी है.

इससे पहले चीन को उपकरण और राहत सामग्री हवाई मार्ग से छोड़नी पड़ रही थी. कई बचावकर्मी पहाड़ों से पैदल चलकर जगह पहुंचे थे. चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी के अनुसार अब बड़ी संख्या में भारी मशीनें उस जगह पहुंच गई हैं जहां कभी चीनी सीमा निरीक्षण परिसर खड़ा था. साथ में खोज अभियान को मजबूत करने वाले उपकरण भी पहुंचे हैं.

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सीसीटीवी ने बचाव दल और एक्स्केवेटर की तस्वीरें दिखाते हुए बताया कि जीवन खोजने वाले उपकरणों और खोज कुत्तों से लैस टीमें तैनात की गई हैं. लेकिन लगातार बारिश और कठिन भूभाग के कारण काम में बाधा आ रही है. बचाव दल को संकरी पहाड़ी घाटी में काम करना पड़ रहा है जहां एक तरफ अस्थिर चट्टानें हैं.

दूसरी तरफ तेज बहती नदी. अधिकारियों ने कहा कि ऊपर की झीलों से और बाढ़ आने का खतरा कम हो गया है लेकिन भूस्खलन का खतरा अब भी बना हुआ है. पहाड़ी इलाके में बारिश के बाद मिट्टी ढीली हो जाती है जिससे कोई भी छोटी घटना बड़े नुकसान का कारण बन सकती है.

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नेपाल और चीन दोनों तरफ भारी नुकसान

नेपाल में अधिकारियों ने कहा है कि और ज्यादा जीवित लोगों के मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है. वहां कम से कम 1114 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 4000 लोग अभी भी लापता हैं. तिब्बत में चीन की आधिकारिक संख्या रविवार से स्थिर है- 16 मौतें और 546 लापता. 

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इनमें 104 भारतीय, 49 नेपाली नागरिक और 33 लातवियाई पर्यटक शामिल हैं जो दो पर्यटक समूहों का हिस्सा माने जा रहे हैं. लातविया के चीन स्थित राजदूत कार्लिस आइहेनबाउम्स ने कहा कि उनका दूतावास चीनी विदेश मंत्रालय और तिब्बत के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है. दूतावास कर्मियों ने तिब्बती आपदा स्थल जाने की कोशिश नहीं की क्योंकि नेपाल से मिली जानकारी के अनुसार लापता लातवियाई नागरिक नेपाली तरफ बह गए हो सकते हैं.

तिब्बत में आपदा की ज्यादातर जानकारी चीनी राज्य नियंत्रित मीडिया के माध्यम से ही सामने आ रही है. जब मंगलवार को विदेशी पत्रकारों को आपदा क्षेत्र जाने की अनुमति न देने का सवाल पूछा गया तो चीनी विदेश मंत्रालय ने सड़कों और संचार के नुकसान तथा द्वितीयक आपदाओं के बड़े सुरक्षा जोखिम का हवाला दिया. 

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पहाड़ी क्षेत्र में बाढ़ के बाद रास्ते टूट जाना और लगातार बारिश से स्थिति और जटिल हो जाती है. ऐसे में राहत कार्य धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं लेकिन मौसम और भूगर्भीय स्थितियां अभी भी चुनौती बनी हुई हैं.

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सीमा पार आपदा और सहयोग की जरूरत

यह घटना चीन-नेपाल सीमा क्षेत्र में मानसून की भीषण बाढ़ का नतीजा है. ग्यिरोंग (केरुंग) सीमा पार व्यापार और आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग है. सड़क के दोबारा खुलने से न सिर्फ बचाव कार्य तेज होंगे बल्कि भविष्य में राहत सामग्री पहुंचाने का रास्ता भी आसान होगा. 

नेपाल में भारी जनहानि और लापता लोगों की बड़ी संख्या दिखाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बाढ़ कितनी विनाशकारी हो सकती है. दोनों देशों को मिलकर मौसम निगरानी, पूर्व चेतावनी प्रणाली और सीमा पार राहत तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है. विदेशी पर्यटकों के लापता होने से अंतरराष्ट्रीय ध्यान भी इस आपदा पर केंद्रित हो गया है.

ग्यिरोंग सीमा सड़क के फिर खुलने से चीन की तरफ बचाव अभियान में तेजी आई है. भारी मशीनें और खोज उपकरण अब मुख्य क्षेत्र में हैं लेकिन बारिश, संकरी घाटी और भूस्खलन का खतरा काम को मुश्किल बना रहा है. नेपाल में मौतों का आंकड़ा बहुत ऊंचा है और हजारों लोग अभी भी लापता हैं. 

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चीन की तरफ भी सैकड़ों लोग लापता हैं जिनमें भारतीय और लातवियाई पर्यटक शामिल हैं. राज्य मीडिया के अलावा स्वतंत्र जानकारी सीमित है. दोनों देशों को मिलकर बचाव, पुनर्वास और भविष्य की आपदाओं से निपटने की तैयारियां तेज करनी होंगी ताकि जान-माल का नुकसान कम हो सके.

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