नेपाल के गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी में रविवार सुबह एक विनाशकारी फ्लैश फ्लड आया. यह बाढ़ चुम्चेत के पास हुए लैंडस्लाइड से बने अस्थाई डैम के टूटने से हुई हो सकती है. अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र (ICIMOD) ने नेपाली अधिकारियों के आंकड़ों की समीक्षा के बाद यह संभावना जताई है.
बाढ़ करीब सुबह चार बजे शुरू हुई और कीचड़, तलछट तथा मलबा लेकर नीचे की ओर बह निकली. बाढ़ ने बूढ़ी गंडकी के रास्ते कई बस्तियों को प्रभावित किया. बूढ़ी गंडकी, त्रिशूली और नारायणी नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को चेतावनी जारी की क्योंकि जल स्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा था.
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खतरा बढ़ रहा था. लापता व्यक्तियों, बह गए घरों, टूटे पुलों और किनारे की बुनियादी संरचनाओं के नुकसान का जिक्र है. 341 मेगावाट की बूढ़ी गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट सेलरी पर भी नुकसान की खबर है, हालांकि पूरी क्षति का आकलन अभी जारी है. खोज-बचाव, निकासी और पुनर्वास के प्रयास चल रहे हैं.
कैस्केडिंग खतरों का संकेत
यह घटना गिरोंग-रसुवा आपदा के तुरंत बाद हुई है. यह दिखाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में एक प्रक्रिया कैसे दूसरी को तेजी से ट्रिगर कर सकती है. बुनियादी ढांचे को बर्बाद कर सकती है. ICIMOD के महानिदेशक पेमा ग्याम्त्शो ने कहा कि गिरोंग-रसुवा आपदा के बाद यह घटना याद दिलाती है कि पहाड़ी समुदाय और नदी अचानक कैस्केडिंग खतरों के कितने संपर्क में हैं. तुरंत राहत प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन बाढ़ के कारण को समझना भविष्य के जोखिम कम करने और लचीलापन बढ़ाने के लिए जरूरी है.
अप्रैल 2024 में भी इसी घाटी में बड़ा बाढ़ आई थी. तब मनास्लु ग्लेशियर के स्नाउट से विशाल बर्फ हिमस्खलन बिरेन्द्र ताल में गिरा और अचानक ओवरफ्लो से बूढ़ी गंडकी में बाढ़ आई. ICIMOD के विस्तृत आकलन में पाया गया कि वह घटना झील के पानी के विस्थापन से हुई थी, न कि ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) से.
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दोनों घटनाएं मिलकर हिमालयी नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ पैदा करने वाले खतरों की विविधता को रेखांकित करती हैं. कई स्रोतों से जोखिम की निगरानी का महत्व भी सामने आता है. ICIMOD के जलवायु और पर्यावरणीय जोखिम रणनीतिक प्रमुख कियांगगोंग झांग ने बताया कि वर्तमान विश्लेषण अस्थाई लैंडस्लाइड डैम के टूटने की ओर इशारा करता है, जिससे भारी तलछट वाली बाढ़ नीचे बह निकली.
ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि अस्थिर ढलानों और नदी प्रणालियों की एक साथ निगरानी क्यों जरूरी है. खड़ी पहाड़ी वाले क्षेत्रों में खतरे तेजी से विकसित हो सकते हैं और दूर तक लोगों को प्रभावित कर सकते हैं.
बस्तियों और बुनियादी ढांचे की संवेदनशीलता
बूढ़ी गंडकी बाढ़ पहाड़ी नदी गलियारों में बसी बस्तियों, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा संरचना और आवश्यक सेवाओं की कमजोरी को उजागर करती है. ढलान की अस्थिरता, नदी की गतिशीलता और जोखिम के आपसी संबंध को बेहतर समझना जोखिम कम करने, संरचना योजना और रिकवरी प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण होगा.
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यह घटना हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और भूगर्भीय प्रक्रियाओं के बढ़ते प्रभाव को दिखाती है. पहाड़ी क्षेत्रों में लैंडस्लाइड, बर्फ हिमस्खलन और डैम आम होते जा रहे हैं. लोगों को समय पर चेतावनी सिस्टम, सुरक्षित स्थानों पर निकासी योजना और मजबूत बुनियादी ढांचे की जरूरत है.
बूढ़ी गंडकी बाढ़ न केवल तत्काल राहत की मांग करती है बल्कि लंबी अवधि की योजना और जोखिम प्रबंधन की भी. ये कारण शुरुआती रिपोर्ट के एनालिसिस के आधार पर है. बाद में स्टडी करने पर सही वजह सामने आएगी.
ऋचीक मिश्रा