दोहरी मुसीबत... अर्नब के बाद फिर आ सकता है नया तूफान, साइंटिस्ट की चेतावनी

अर्नब आंध्र तट पर लैंडफॉल कर रहा है. साइंटिफिक मॉडल बताते हैं कि कुछ दिनों बाद नया तूफान ओडिशा की ओर बढ़ सकता है. आईएमडी निगरानी कर रहा है.

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वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अर्नब के बाद एक और साइक्लोन बंगाल की खाड़ी में बन सकता है. (Photo: ITG) वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अर्नब के बाद एक और साइक्लोन बंगाल की खाड़ी में बन सकता है. (Photo: ITG)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:04 AM IST

चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश के तट पर कहर गिरा रहा है. बंगाल की खाड़ी में एक और तूफान के बनने की चर्चा तेज हो गई है. मौसम मॉडल बता रहे हैं कि अर्नब के तट पार करने के कुछ दिनों बाद एक नया लो-प्रेशर एरिया बनेगा, जो ओडिशा की ओर बढ़ सकता है. हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि ये पूर्वानुमान अभी अनिश्चित हैं. मौसम बदल भी सकता है. 

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प्रचंड चक्रवाती तूफान अर्नब 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश और यनम के तटों के बीच, यनम के दक्षिण के करीब लैंडफॉल कर रहा है. हवा की गति 115-125 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो झोंकों में 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. पहले यह और तेज था, लेकिन लैंडफॉल से पहले थोड़ा कमजोर पड़ा. आईएमडी लगातार निगरानी कर रहा है. तटीय इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाएं जारी हैं.

दूसरा तूफान क्यों चर्चा में है

27 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में दो सिस्टम सक्रिय थे. एक अर्नब और दूसरा दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर एरिया. कुछ मॉडल बता रहे थे कि यह तूफान अर्नब के आसपास घूमकर तेज हो सकता है. आंध्र-ओडिशा सीमा के पास पहुंच सकता है. एक अन्य संभावना यह है कि अर्नब के बाद दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर एरिया बने. 

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कई मॉडल जैसे ECMWF, IMD GFS और भारत फोरकास्टिंग इस नई प्रणाली के चक्रवात में बदलने और नवंबर की शुरुआत में ओडिशा तट की ओर बढ़ने का संकेत दे रहे हैं. समय 1-2 नवंबर के आसपास बताया जा रहा है.

मौसम मॉडल जटिल परिस्थितियों में अलग-अलग तस्वीर पेश करते हैं. ECMWF मॉडल ने कभी-कभी अर्नब के लैंडफॉल का समय भी गलत दिखाया था. इसलिए विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि दूसरे चक्रवात की पुष्टि अभी नहीं हुई है. आईएमडी ने आधिकारिक तौर पर कोई नया चक्रवात घोषित नहीं किया है. विभाग डॉपलर रडार से अर्नब की निगरानी जारी रखे हुए है. आगे के अपडेट से स्थिति साफ होगी.

यह भी पढ़ें: लैंडफॉल के बाद अब किधर जाएगा साइक्लोन अर्नब? क्या है लखनऊ-गोरखपुर कनेक्शन

ओडिशा और आसपास के लिए क्या मतलब

अगर नया तूफान बना तो ओडिशा के तटीय जिलों में फिर से भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बढ़ सकता है. अर्नब का असर पहले से ही दक्षिण ओडिशा में दिख रहा है. लगातार दो तूफानआने से बाढ़, फसल नुकसान और राहत कार्यों पर दबाव बढ़ सकता है. प्रशासन को सतर्क रहना होगा, लेकिन फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं क्योंकि गठन निश्चित नहीं है.

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बंगाल की खाड़ी अक्टूबर-नवंबर में सक्रिय रहती है. गर्म समुद्री पानी और अनुकूल हवाएं नए तूफान को जन्म दे सकती हैं. एक बड़ा चक्रवात कमजोर होने के बाद आसपास की नमी और ऊर्जा नए तूफान को बढ़ावा दे सकती है. लेकिन हर मॉडल सही नहीं निकलता. इसलिए आधिकारिक बुलेटिन पर ही भरोसा करना चाहिए.

अर्नब अभी मुख्य चिंता है. लैंडफॉल पूरा होने और इसके कमजोर पड़ने के बाद ही दूसरे तूफान की तस्वीर साफ होगी. लोग आईएमडी के आधिकारिक अपडेट देखते रहें और अफवाहों से बचें. बंगाल की खाड़ी में मौसम की यह दोहरी चुनौती याद दिलाती है कि तटीय राज्यों को हमेशा तैयार रहना चाहिए.

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