सावन के दूसरे सोमवार पर शिवालयों में आस्था का सैलाब, दिल्ली से हरिद्वार-अयोध्या तक भक्तों की लंबी कतारें

सावन के दूसरे सोमवार के पावन अवसर पर सुबह से ही देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की कतारें देखने को मिल रही हैं. श्रद्धालु महादेव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए सुबह से ही मंदिरों में पहुंच रहे हैं.

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 हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक, देश के हर कोने में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए मंदिरों में जा रहे हैं. (Photo: ITG) हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक, देश के हर कोने में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए मंदिरों में जा रहे हैं. (Photo: ITG)

मुदित अग्रवाल

  • हरिद्वार,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:38 AM IST

आज सावन का दूसरा सोमवार है. भगवान शिव की भक्ति का विशेष और पवित्र दिन. मान्यता है कि सोमवार का दिन महादेव को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन  शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

अयोध्या और हरिद्वार से लेकर दिल्ली तक, देश के हर कोने में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए मंदिरों में जा रहे हैं. सावन के दूसरे सोमवार के पावन अवसर पर दिल्ली के गौरी शंकर मंदिर में सुबह से ही भक्त श्रद्धाभाव के साथ पूजा-अर्चना कर रहे है. अयोध्या के नागेश्वरनाथ मंदिर में महादेव के दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है.

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हरिद्वार के दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर समेत अन्य शिवालयों में भी भोले के भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए उमड़े हुए हैं.

मान्यता के अनुसार, भगवान शिव सावन के पूरे महीने अपनी ससुराल कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में निवास करते हैं और यहीं से सृष्टि का संचालन और लोगों का कल्याण करते हैं. ऐसे में भगवान शंकर का जलाभिषेक करने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

सावन के महीने का शिव भक्तों को भी बेसब्री से इंतजार रहता है. लोग सुबह-सुबह ही शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए निकल पड़ते हैं. मान्यता है कि भगवान शिव भोले हैं और जो भी सच्चे मन से उनकी पूजा करता है, उसकी मनोकामना पूरी होती है. सावन के दूसरे सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान विश्वेश्वर की मंगला आरती की गई है.

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बता दें, सावन के पहले सोमवार के अवसर पर भी देशभर में शिवभक्ति की गूंज सुनाई दी. गुजरात में अरब सागर की लहरों के बीच स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ से लेकर मोक्षदायिनी नगरी काशी के काशी विश्वनाथ मंदिर तक, हर तरफ आस्था का माहौल देखने को मिला.

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