Ram Navami 2026: भगवान राम के चरणों में थे ये 48 दिव्य चिन्ह! हर एक का है चमत्कारी मतलब

Ram Navami 2026: राम नवमी के खास मौके पर जानते हैं भगवान श्रीराम के चरणों में बने 48 दिव्य चिन्हों का रहस्य और उनका आध्यात्मिक महत्व. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये चिन्ह सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष से जुड़े माने जाते हैं. जानें दाहिने और बाएं चरण के शुभ प्रतीकों का अर्थ और महत्व.

Advertisement
श्रीराम के चरणों में छिपा है ये विशेष रहस्य (Photo: ITG) श्रीराम के चरणों में छिपा है ये विशेष रहस्य (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:22 AM IST

Ram Navami 2026: आज, 27 मार्च को रामनवमी का पर्व मनाया रहा है. राम नवमी के पावन अवसर पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की धूम हर जगह देखने को मिलती है. यह दिन मर्यादा, धर्म और आदर्श जीवन के प्रतीक प्रभु श्रीराम को समर्पित होता है. इस खास मौके पर भक्त न सिर्फ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि उनके जीवन और दिव्य स्वरूप से जुड़ी मान्यताओं को भी याद करते हैं. इन्हीं मान्यताओं में से एक है श्रीराम के चरणों की महिमा, जिनमें अनेक शुभ और आध्यात्मिक चिह्नों का वर्णन मिलता है, जो भक्तों के लिए विशेष महत्व रखते हैं.

Advertisement

श्रीराम के चरणों में हैं ये शुभ चिन्ह

मान्यता है कि भगवान श्रीराम के चरणों का महत्व बेहद गहरा और अनंत है. रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने उनके चरणों के कुछ प्रमुख चिह्नों जैसे ध्वज, वज्र, अंकुश, कमल और ऊर्ध्व रेखा का वर्णन किया है. वहीं अन्य धार्मिक ग्रंथों में यह बताया गया है कि श्रीराम के चरणों में कुल 48 दिव्य चिन्ह मौजूद हैं, जो अलग-अलग आध्यात्मिक शक्तियों का प्रतीक माने जाते हैं. एक मान्यता यह भी है कि भगवान के दाहिने पैर के चिह्न माता सीता के बाएं चरण में और बाएं पैर के चिह्न उनके दाहिने चरण में विराजमान हैं.

दाहिने चरण के शुभ चिह्न

श्रीराम के दाहिने पैर में मौजूद चिह्न जीवन में सफलता, शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माने जाते हैं. इनमें ऊर्ध्व रेखा मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है, जबकि स्वस्तिक शुभता और कल्याण का संकेत देता है. कमल का चिन्ह खुशी और यश बढ़ाने वाला माना जाता है, वहीं वज्र शक्ति और पापों के नाश का प्रतीक है.

Advertisement

इसके अलावा ध्वजा विजय और सम्मान दिलाने वाली मानी जाती है, अंकुश मन को नियंत्रण में रखने का संदेश देता है और कल्पवृक्ष सभी इच्छाओं की पूर्ति से जुड़ा है. रथ, चक्र और सिंहासन जैसे चिह्न पराक्रम, प्रभुत्व और शत्रुओं पर विजय का संकेत देते हैं. यमदंड, छत्र और चामर जैसे चिन्ह भय से मुक्ति और ऐश्वर्य प्रदान करने वाले माने जाते हैं.

बाएं चरण के शुभ चिह्न

श्रीराम के बाएं पैर के चिह्न शांति, भक्ति और ज्ञान से जुड़े होते हैं. सरयू का चिन्ह पापों को दूर करने वाला माना जाता है, जबकि शंख बुद्धि और पवित्रता का प्रतीक है. अर्धचंद्र मन को शांति देता है और प्रेम बढ़ाता है. कलश और बिंदु जैसे चिह्न जीवन में पूर्णता और सफलता का संकेत देते हैं. मछली (मीन) का चिन्ह भगवान के प्रति गहरे प्रेम को दर्शाता है. 

वहीं, हंस विवेक और ज्ञान का प्रतीक है. वीणा और वंशी कला, संगीत और भक्ति भाव को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं. गदा, धनुष और तूणीर जैसे चिन्ह शक्ति और सुरक्षा का संकेत देते हैं, जबकि चन्द्रिका और पूर्ण चन्द्र उज्ज्वल भविष्य और मानसिक शांति का प्रतीक माने जाते हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement