पंचायत आजतक राजस्थान’ के सत्र ‘नारी शक्ति या सियासी भक्ति!’ में महिला सुरक्षा, महिलाओं के खिलाफ अपराध, राजनीतिक दलों की जवाबदेही और न्याय की मांग जैसे मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस की महिला नेताओं के बीच तीखी बहस हुई. राजस्थान भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़, राजस्थान प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी, भाजपा की युवा नेता एवं पार्षद नेहा शर्मा और एनएसयूआई की सदस्य नंदिता चौधरी शामिल हुईं.
बहस के दौरान जेएनयू के एक प्रोफेसर पर छात्राओं के यौन शोषण के आरोप, अंकिता भंडारी मामले, बृजभूषण शरण सिंह प्रकरण और राजस्थान में महिला अपराध के मुद्दे उठे. भाजपा की नेताओं ने आरोपों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया, जबकि कांग्रेस की नेता ने महिला सुरक्षा को राजनीति से ऊपर रखने और सरकार से जवाब मांगने की बात कही.
राखी राठौड़ ने कहा- आरोप साबित होने पर कार्रवाई होनी चाहिए
भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ ने कहा कि महिला सुरक्षा के मामलों में केवल राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय यह देखना चाहिए कि जांच में क्या सामने आया है और आरोप साबित हुए हैं या नहीं. उन्होंने जेएनयू के एक प्रोफेसर पर छात्राओं से अंक देने के बदले यौन संबंधों की मांग करने के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि आरोप जांच में साबित हुए हैं, तो सवाल उठाना उचित है.
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राठौड़ ने कहा कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगने और उसके दोषी साबित होने के बीच अंतर होता है, उनके मुताबिक, जांच प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों के आधार पर ही किसी मामले में आगे बढ़ना चाहिए, उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह प्रकरण का जिक्र करते हुए कहा कि उस मामले में लंबे समय तक मीडिया में चर्चा हुई थी और कानूनी प्रक्रिया को महत्व दिया जाना चाहिए. उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को किसी भी मामले में आरोप लगाने से पहले तथ्यों और सबूतों पर ध्यान देना चाहिए, राखी ने यह भी कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए, लेकिन बिना तथ्यों के किसी व्यक्ति की छवि खराब करना भी उचित नहीं है.
सारिका सिंह चौधरी ने पूछा- महिला सुरक्षा के लिए कौन से सख्त कानून लाए गए?
राजस्थान प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सारिका सिंह चौधरी ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा, उन्होंने कहा कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी अगर लड़कियां स्कूल और कॉलेज जाते समय सुरक्षित महसूस नहीं करतीं और उनके परिवारों को उनकी सुरक्षा की चिंता रहती है, तो यह गंभीर सवाल है. सारिका सिंह चौधरी ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और कार्यस्थलों पर होने वाले यौन उत्पीड़न जैसे मामलों को राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए, उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए प्रभावी कानून और उनके सही तरीके से लागू होने की जरूरत है.
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उन्होंने भाजपा से सवाल किया कि वर्ष 2014 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए कौन से नए और सख्त कदम उठाए गए, उन्होंने बृजभूषण शरण सिंह, कुलदीप सेंगर और प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए भाजपा नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए. सारिका ने अंकिता भंडारी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि पीड़िता के माता-पिता लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के मामलों में किसी भी राजनीतिक दल को अपने नेताओं या समर्थकों का बचाव करने के बजाय पीड़ितों के साथ खड़ा होना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है, उनके मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर सरकार को जवाब देना चाहिए और यह बताना चाहिए कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. सारिका सिंह चौधरी के सवालों का जवाब देते हुए राखी राठौड़ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की गईं, उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख किया.
राठौड़ ने कहा कि महिलाओं को शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने से लेकर उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने तक कई स्तरों पर काम हुआ है, महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ लेने वाले वर्ग तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन्हें नीति बनाने की प्रक्रिया में भी भागीदार बनाना जरूरी है. राजस्थान में महिला सुरक्षा की स्थिति पर उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार को निशाने पर लिया. राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार के दौरान विधानसभा में महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर हुई चर्चाओं का उल्लेख किया और कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में अपराध कम करने के लिए कदम उठाए गए हैं. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में कुल अपराधों में 19 प्रतिशत की कमी आई है.
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एनएसयूआई की सदस्य नंदिता चौधरी ने विश्वविद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, उन्होंने कहा कि वह खुद दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं और हाल ही में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन से लौटी हैं, उन्होंने प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ पुलिस के व्यवहार पर भी सवाल उठाए, नंदिता ने कहा कि किसी भी छात्रा के साथ गलत होने पर वह उसके साथ खड़ी रहेंगी, चाहे आरोपी किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, उन्होंने कहा कि महिलाओं को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ आवाज उठाई जानी चाहिए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.
जेएनयू के प्रोफेसर से जुड़े मामले पर नंदिता ने कहा कि विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति ने शिकायतों की जांच के बाद संबंधित प्रोफेसर को दोषी पाया और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, उन्होंने छात्राओं की शिकायतों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया, हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी मामले में अंतिम निर्णय आने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कभी-कभी गलत व्यक्ति को भी निशाना बनाया जा सकता है. नंदिता ने कहा कि महिला सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को एक जैसा रुख अपनाना चाहिए, उनके मुताबिक, अगर किसी मामले में विपक्ष रहते हुए एक दल जांच और अदालत के फैसले का इंतजार करने की बात करता है, तो सत्ता में आने के बाद भी उसे इसी सिद्धांत पर कायम रहना चाहिए.
नेहा शर्मा ने अंकिता भंडारी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की
भाजपा की युवा नेता और पार्षद नेहा शर्मा ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर राजनीति किए जाने पर सवाल उठाया, उन्होंने कहा कि महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और तथ्यों के आधार पर निर्णय होना चाहिए. नेहा शर्मा ने थानागाजी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वह उस क्षेत्र से जुड़ी हैं और उन्होंने पहले और अब के हालात में अंतर देखा है, उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार आने के बाद क्षेत्र में स्थिति में सुधार हुआ है.
अंकिता भंडारी मामले पर नेहा शर्मा ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए और निष्पक्ष जांच के जरिए न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा कि अंकिता भी किसी की बेटी थी और उसके साथ हुई घटना को हल्के में नहीं लिया जा सकता, उन्होंने उत्तराखंड में इस मामले को लेकर लोगों की भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा के लिए भी यह जरूरी है कि मामले को गंभीरता से लिया जाए, उन्होंने चेताया कि अगर पार्टी इस मामले को हल्के में लेती है, तो यह बड़ी भूल होगी.
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