नवरात्र में गरबा पंडाल... रंग-बिरंगे कपड़े... और डांडिया करते लोग... ढोल की थाप थी, राजस्थानी गानों की धुन थी और हर तरफ उत्सव का माहौल था. इसी भीड़ के बीच गुलाबी और सुनहरे रंग की पारंपरिक पोशाक पहने एक लड़की भी गरबा करती नजर आई. वह व्हीलचेयर पर थीं. उनके चेहरे पर मुस्कान थी और संगीत के साथ कदम मिलाने का अपना ही अंदाज.
इस लड़की का नाम है अनुष्का राठौड़. राजस्थान के अजमेर की रहने वाली अनुष्का की कहानी सिर्फ डांस करने या मुश्किलों के बावजूद आगे बढ़ने की कहानी नहीं है. यह उस जिंदगी की कहानी है, जिसमें एक हादसा बचपन में ही बहुत कुछ छीन लेता है, लेकिन इंसान के शौक, सपने और सीखने की इच्छा फिर भी उसके साथ बने रहते हैं. अनुष्का के साथ यह हादसा तब हुआ, जब उनकी उम्र महज दो साल थी.
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अनुष्का अजमेर के पटेल नगर में रहती हैं. जब वह दो साल की थीं, तब अपनी मौसी के साथ ट्रेन से सफर कर रही थीं. इसी दौरान ट्रेन में चढ़ते वक्त उनका संतुलन बिगड़ गया और वह ट्रेन की चपेट में आ गईं. इस हादसे में उन्हें अपना एक हाथ और एक पैर गंवाना पड़ा.
दो साल की उम्र वह होती है, जब किसी बच्चे को ठीक से यह भी नहीं पता होता कि दुनिया में उसके लिए क्या-क्या इंतजार कर रहा है. उस उम्र में खेलना, दौड़ना, गिरना और फिर उठकर भाग जाना ही जिंदगी का बड़ा हिस्सा होता है. लेकिन अनुष्का के बचपन की दिशा एक हादसे ने बदल दी.
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इसके बाद जिंदगी पहले जैसी नहीं रह सकती थी. रोजमर्रा के कई कामों के लिए अलग तरीके अपनाने पड़ते होंगे. दूसरे बच्चों को खेलते और अपनी मर्जी से इधर-उधर जाते देखना भी अलग अनुभव रहा होगा. हादसे के बाद भी उनकी जिंदगी में पढ़ाई थी, संगीत था, किताबें थीं और डांस का शौक भी.
डांस, संगीत और किताबों से दोस्ती
अनुष्का को राजस्थानी गानों पर डांस करना पसंद है. वह म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट भी बजाती हैं. इसके अलावा उन्हें खाना बनाना और किताबें पढ़ना अच्छा लगता है. यानी उनकी दिलचस्पियां किसी एक चीज तक सीमित नहीं हैं. डांस को अक्सर हम शरीर की फुर्ती, कदमों की गति और तालमेल से जोड़कर देखते हैं. लेकिन अनुष्का को देखना इस धारणा पर दोबारा सोचने का मौका देता है.
यह कहना आसान है कि अनुष्का ने मुश्किलों को हरा दिया. लेकिन उनकी जिंदगी को सिर्फ इंस्पायर करने वाले नारे में समेट देना भी ठीक नहीं होगा. किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी पसंद का काम कर पाना उसकी मेहनत के साथ-साथ मौके, सहयोग और सुविधाओं पर भी निर्भर करता है. दिव्यांग लोगों के लिए सुलभ जगहें, बेहतर सुविधाएं और बराबरी के मौके उतने ही जरूरी हैं, जितना उनका अपना हौसला.
अनुष्का ने अपनी पढ़ाई जारी रखी. उन्होंने बीए-बीएड पूरा किया है और फिलहाल एमए की पढ़ाई कर रही हैं. हालांकि किसी हादसे के बाद जिंदगी को नए सिरे से व्यवस्थित करना आसान नहीं होता. पढ़ाई के लिए समय निकालना, अपने लक्ष्य तय करना और उन्हें पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ना लगातार कोशिश मांगता है.
अनुष्का की कहानी में डांस जितना अहम है, उतनी ही अहम उनकी पढ़ाई भी है. वह सिर्फ गरबा पंडाल में नजर आने वाली लड़की नहीं हैं. उनकी अपनी शैक्षणिक यात्रा है, अपने शौक हैं और आगे बढ़ने की अपनी योजनाएं भी हैं. अनुष्का की कहानी हमें उनकी उपलब्धियों पर खुश होने के साथ-साथ यह सोचने का मौका भी देती है कि क्या हमारे आसपास की दुनिया हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी जीने के बराबर मौके देती है?
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नवरात्र के दौरान अनुष्का गरबा कार्यक्रम में पहुंचीं. गुलाबी और सुनहरे रंग की पारंपरिक पोशाक में वह व्हीलचेयर पर बैठकर डांडिया करती दिखाई दीं. आसपास संगीत था और दूसरे लोग भी गरबा कर रहे थे. इस माहौल में अनुष्का का शामिल होना अपने आप में खास था. त्योहारों की खूबसूरती सिर्फ सजावट, कपड़ों या संगीत में नहीं होती.
ये मौके लोगों को साथ आने, अपनी खुशियां साझा करने और सार्वजनिक जीवन का हिस्सा बनने का अवसर भी देते हैं. अनुष्का को गरबा करते देखना एक खुशी का पल है. इसका मतलब है कि उनके जीवन में संगीत, उत्सव और अपनी पसंद की चीजों के लिए जगह है. अनुष्का ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कोई भी डिसेबिलिटी हो या कोई भी कमी हो, तो उसे कमी ना समझें और अपना जोश ऐसे ही बनाए रखें. माता रानी सब सही करती हैं.
चंद्रशेखर शर्मा