कॉरपोरेट जॉब से ऊब गई थी लड़की, पहाड़ों में हुई शिफ्ट, ऐसे बदली जिंदगी

क्या आप अपने 24 लाख के पैकेज की नौकरी को छोड़कर कोई और काम शुरू कर सकते हैं? एक बार के लिए आप इसपर लंबे समय तक विचार कर सकते हैं लेकिन हिमाचल प्रदेश की रहने वाली तराना चौहान ने बहुत प्लानिंग के साथ अपना बिजनेस शुरू किया. उन्होंने अपनी हाई पैकेज वाली नौकरी छोड़ पहाड़ों में एक काम शुरू किया है. 

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नौकरी छोड़ शुरू किया होमस्टे का काम. (Photos: Instagram/@taranachauhan_) नौकरी छोड़ शुरू किया होमस्टे का काम. (Photos: Instagram/@taranachauhan_)

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 13 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:44 AM IST

करीब सात साल तक तराना चौहान का करियर काफी अच्छा चल रहा था. नौकरी और तरक्की को सफलता की आम मिसाल की तरह ही देखा जा रहा था. उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में सीनियर बिजनेस एनालिस्ट के तौर पर काम किया और बाद में एनहेउसर-बुश इनबेव में चली गईं, जहां उन्होंने एनालिटिक्स और बिजनेस रोल में अपनी भूमिका निभाई. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और बीए की डिग्री हासिल की. 

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लेकिन प्रमोशन, काम की व्यस्तता और बढ़ती सैलरी के बीच एक समय ऐसा आया, जब उन्होंने खुद से एक सवाल पूछना शुरू किया. यह सवाल उनकी नौकरी से जुड़ा नहीं था बल्कि इस बात से था कि वह असल में अपनी जिंदगी को किस तरह बनाना चाहती हैं? 

7 लाख रुपये सालाना सैलरी से शुरुआत 

तराना ने बताया कि जब उन्होंने अपना करियर शुरू किया था तो, उनकी सालाना आए करीब 7 लाख रुपये थी लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद यह केवल 2 लाख रुपये प्रति माह रह गई. 

100 साल पुराने घर का किया यूज 

हालांकि, उन्होंने अचानक से नौकरी छोड़ने का फैसला नहीं किया था. साल 2020 में जब कोरोना आया तब तराना हिमाचल अपने घर लौट गई. पहाड़ों में वापस आने के बाद उन्हें अपनी शहर की जिंदगी और करियर के बारे में दोबारा सोचने का मौका मिला. उन्होंने अपने परिवार के पुराने पुश्तैनी घर की भी  मरम्मत शुरू की और उसे होमस्टे में बदलने का फैसला किया. 

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सोशल मीडिया पर शेयर की जानकारी 

उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से पता चलता है कि यह बदलाव धीरे-धीरे हुआ. एक वीडियो में वह अपने दो मंजिला पुश्तैनी घर की पहली मंजिल पर बने कमरों की ओर इशारा करते हुए बताती हैं कि मैंने इन 3 कमरों की मरम्मत से शुरुआत की, फिर मैंने 2 और कमरे बनवाए और अब सबसे ऊपर एक योगशाला भी बनवा रही हूं. लेकिन इस दौरान सबसे खास बात यह थी कि उन्होंने ये सारे काम अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के साथ ही शुरू की.

उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने करीब दो साल तक अपनी फुल-टाइम नौकरी के साथ इस बिजनेस को भी चलाया. इस दौरान उन्होंने काम करने का सिस्टम बनाया, कई कामों को ऑटोमेट किया और यह देखा कि क्या यह बिजनेस उन्हें आगे चलकर आर्थिक रूप से सहारा दे सकता है. यही तरीका उनके पूरे करियर को बदलने की योजना का एक अहम हिस्सा रहा. 

बिजनेस के सफल होने का किया इंतजार 

उसने तब तक हार नहीं मानी जब तक उनका साइ़ड बिजनेस सफल नहीं हो गया. इसके बाद ही उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी. चौहान उस मुकाम पर पहुंच चुकी थीं जहां होमस्टे इतना स्थिर हो गया था कि बदलाव को संभाल सके. वह अब लगभग तीन सालों से निर्वाणा होम्स का पूर्णकालिक संचालन कर रही हैं. 

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हालांकि, इससे जुड़ी कमाई हर महीने एक जैसी नहीं होती थी. उन्होंने बताया कि किसी महीने उनकी कमाई 5 लाख रुपये से अधिक होती है, जबकि अन्य महीनों में वह 1 लाख रुपये भी नहीं कमा पातीं. एक निश्चित कॉर्पोरेट सैलरी पाने वाले  कर्मचारी के लिए यह बात डरावनी लग सकती है. उनका कहना है कि उन्हें अब उन चीजों पर ज्यादा नियंत्रण मिला है, जिन्हें वह सबसे ज्यादा महत्व देती हैं- अपने समय, अपनी रहने की जगह और अपने काम के तरीके पर. 

उतना भी शांत नहीं होता है पहाड़ों का जीवन 

चौहान ने आगे बताया कि पहाड़ों की लाइफ सोशल मीडिया पर अलग तरह से दिखाई जाती है, लेकिन वह इतनी आसान होती नहीं है. होमस्टे चलाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर सुबह पहाड़ों के नजारे के बीच बैठकर कॉफी पीते हुए बिताई जाए. 

चुनौतियों का जिक्र 

उनके इंस्टाग्राम कैप्शन में होमस्टे चलाने की असली चुनौतियों का जिक्र किया गया है. इसमें बीमार होने पर भी फोन कॉल का जवाब देना, लीक हो रहे पाइप को ठीक करना, नालियों की सफाई करना, गैस सिलेंडर की व्यवस्था करना और बिजली कटौती जैसी समस्याओं से भी निपटना होता है. 

वह लिखती हैं कि यहां कोई अलग-अलग विभाग नहीं हैं. बस मैं ही हूं...

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इसका मतलब है कि उन्हें खुद ही होमस्टे की कई जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं. वह मेहमानों का स्वागत करने से लेकर रिसेप्शन, साफ-सफाई, ग्राहकों की मदद, सामान खरीदने और रखरखाव का काम करती हैं. जरूरत पड़ने पर उन्हें प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन का काम भी करना पड़ता है. 

उनके सफर में कुछ ऐसी परेशानियां भी आईं, जिनका पहाड़ों में बने खूबसूरत होमस्टे से सीधा संबंध नहीं था. जब उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी को गूगल मैप्स पर जोड़ने की कोशिश की, तो वहां उस जगह की कोई जानकारी मौजूद नहीं थी. लेकिन जगह की पहचान कराने और उसे मंजूरी दिलाने में करीब एक महीना का समय लग गया. 

उनकी सीख बिल्कुल सीधी है. जब आप कोई काम बिल्कुल शुरुआत से शुरू करते हैं, तो समस्याओं को संभालने के लिए कोई दूसरा व्यक्ति नहीं होता. सारी जिम्मेदारी खुद ही उठानी पड़ती है.

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