क्या बंगाल से कांग्रेस का परमानेंट पलायन हो गया? पार्टी दूसरी बार शून्य की ओर

पश्चिम बंगाल में भी राहुल गांधी के भाषण में वैसी ही बातें सुनने को मिली हैं, जैसी दिल्ली विधानसभा चुनाव में. और, स्टैंड करीब करीब वैसा नजर आया - आखिर ममता बनर्जी को लेकर राहुल गांधी की रणनीति क्या थी?

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (Photo: PTI) कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (Photo: PTI)

मृगांक शेखर

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

राहुल गांधी का पश्चिम बंगाल चुनाव में करीब करीब उसी अंदाज में नजर आए, जैसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में देखे गए थे - और मुद्दे की बात यह है कि बंगाल के नतीजे भी दिल्ली जैसे ही लग रहे हैं. दिल्ली की ही तरह बंगाल में भी कांग्रेस के जीरो बैलेंस की ही संभावना नजर आ रही है. ये बंगाल का लगातार दूसरा विधानसभा चुनाव है, जब पार्टी सीटों के हिसाब से शून्य प्राप्त करने जा रही है.

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पश्चिम बंगाल चुनाव में राहुल गांधी की दिलचस्पी को उनके एक वीडियो से समझने की कोशिश की जा सकती है. पश्चिम बंगाल में जिस दिन दूसरे चरण की वोटिंग होनी थी, उस दिन राहुल गांधी ने ग्रेटर निकोबार प्रोजेक्ट पर बयान जारी किया था. 29 अप्रैल को सुबह आठ बजे (7:58 am पर) सोशल साइट X पर एक वीडियो पोस्ट कर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर हमला बोला था. राहुल गांधी ने वीडियो निकोबार के कैंपबेल बे में प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे आदिवासी नेताओं से मिलने के बाद बनाई थी. बाद में, सरकार की तरफ से राहुल गांधी के आरोपों का जवाब भी दे दिया गया. 

कांग्रेस के कैंपेन के हिसाब से देखें तो राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के दौरान दो बार पश्चिम बंगाल का दौरा किया है, और 5 रैलियां की हैं. 2024 के आम चुनाव में तो राहुल गांधी चुनाव प्रचार के लिए गए तक नहीं थे. 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी एक दिन के दौरे पर गए थे, और दो चुनावी रैलियां की थीं.

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कहने को तो पश्चिम बंगाल कांग्रेस पूरे बंगाल में विधानसभा चुनाव लड़ा है, बंगाल कांग्रेस के बड़े नेता अधीर रंजन चौधरी भी विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन राहुल गांधी सिर्फ दो दिन के लिए रस्म अदा करने गए - आखिर पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर राहुल गांधी की रणनीति क्या थी? 

मोदी पर गरम, ममता पर नरम

पश्चिम बंगाल में हुए दो चरणों के मतदान में हिंसा की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, न ही उस दौरान किसी की जान गई है. चुनाव आयोग ने तो पहले से ही शांतिपूर्ण मतदान का दावा किया था. लेकिन, पहले चरण के मतदान के बाद 23 अप्रैल को आसनसोल में कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी. पश्चिम बंगाल कांग्रेस का आरोप है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस से जुड़े गुंडों ने ही पार्टी कार्यकर्ता की हत्या की है, जो राज्य में खत्म हो चुके कानून व्यवस्था का सबूत है.

राहुल गांधी ने भी सोशल साइट X पर एक पोस्ट में ऐसा ही आरोप लगाया है. राहुल गांधी ने लिखा, 'कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की वोटिंग के बाद TMC से जुड़े गुंडों द्वारा की गई हत्या बेहद निंदनीय है. शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, TMC का गुंडा राज चल रहा है. वोट के बाद विरोधी आवाजों को डराना, मारना, मिटाना - यही TMC का चरित्र बन चुका है.'

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कोलकाता की रैली में भी राहुल गांधी ममता बनर्जी पर हमलावर दिखे. बोले, टीएमसी ने बंगाल में कोई काम नहीं किया... लोगों को रोजगार नहीं दिया... टीएमसी की खराब सरकार की वजह से ही आज बंगाल में बीजेपी का रास्ता खुल रहा है... ममता बनर्जी की सरकार में महिलाओं पर अत्याचार हुआ है... आर जी कर जैसी घटनाएं हमारे सामने हैं.

पश्चिम बंगाल में हुगली जिले के श्रीरामपुर विधानसभा क्षेत्र में हुई कांग्रेस की रैली में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के निशाने पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देखे गए. राहुल गांधी के भाषण में दिल्ली विधानसभा चुनाव की झलक देखने को मिली थी. 

राहुल गांधी ने कहा, मेरे ऊपर 36 केस हैं... क्योंकि मैं BJP से लड़ता रहता हूं... ED ने मेरे से 55 घंटे पूछताछ की... मेरा घर ले लिया गया था... लेकिन ममता जी के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ? क्योंकि बंगाल में जो ममता बनर्जी कर रही हैं, मोदी जी देश में कर रहे हैं... ममता बंगाल मे BJP का रास्ता खोल रही हैं... हर 10-15 दिन में कहीं न कहीं मुकदमा लड़ने जाना पड़ता है... मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि ममता जी के खिलाफ नरेंद्र मोदी ने कितने मुकदमे कराए हैं?

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राहुल ने करीब 17 मिनट का भाषण दिया. बेशक, राहुल गांधी ममता बनर्जी को भी निशाना बना रहे थे, लेकिन ममता बनर्जी के मुकाबले प्रधानमंत्री मोदी पर ज्यादा आक्रामक नजर आ रहे थे. रिपोर्ट बताती हैं, राहुल गांधी जब ममता बनर्जी पर तीखे हमले कर रहे थे तो लोग जोश में आकर खूब तालियां बजा रहे थे, लेकिन राहुल गांधी जब प्रधानमंत्री मोदी को टार्गेट करते, लोगों का रिएक्शन बहुत गर्मजोशी भरा नहीं नजर आया.

बंगाल पर राहुल गांधी का स्टैंड क्या है?

1. क्या राहुल गांधी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की हार ही देखना चाहते थे? जैसे दिल्ली में राहुल गांधी ने अरविंद केजरीवाल को एक्साइज पॉलिसी केस (दिल्ली शराब घोटाला) और उनके मुख्यमंत्री रहते आवास को 'शीशमहल' बोल कर बीजेपी की तरह टार्गेट किया था, ममता बनर्जी के खिलाफ भी तो बिल्कुल वही लहजा देखा गया.

2. बंगाल में ममता बनर्जी की हार ने बीजेपी की जीत तो पक्की कर ही दी. जैसे दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की हार बीजेपी की जीत बन गई. और, बिहार में क्या हुआ? बिहार में भी तो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए की ही जीत हुई. और, कुछ दिन बाद बीजेपी का ही मुख्यमंत्री भी बन गया.  

3. राहुल गांधी दिल्ली में तो अरविंद केजरीवाल के खिलाफ वही सब बोल रहे थे, जो बीजेपी नेताओं के भाषण में सुनने को मिलता था. बिहार में कहने को तो तेजस्वी यादव के साथ थे, लेकिन जो कुछ भी कर रहे थे वो आरजेडी के खिलाफ ही गया. राहुल गांधी ने आखिर तक तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं ही माना. 

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4. क्या दिल्ली और बिहार के बाद राहुल गांधी बंगाल में भी वैसे ही नतीजे चाहते थे? अब अगर ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि कांग्रेस बीजेपी की मददगार है, तो बुरा भी नहीं मानना चाहिए. 

5. पश्चिम बंगाल जाकर राहुल गांधी ने पूछा था कि ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी सरकार ने कितने मुकदमे किए? दिल्ली चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने भी पूछा था कि गांधी परिवार का कोई सदस्य आज तक जेल क्यों नहीं गया? 

अब तो ममता बनर्जी की तरफ से भी राहुल गांधी को लेकर वैसे ही सवाल पूछे जाएंगे, जैसे अरविंद केजरीवाल पूछ चुके हैं. INDIA ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर सवाल उठाने के बाद ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल चुनाव को देखते हुए ही शांत हो गई थीं, लेकिन राहुल गांधी के सवाल उठा देने के बाद तो ममता बनर्जी का अलग ही रूप देखने को मिल सकता है. 

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