शहर काजी राजी, रात में बनी सहमति, फिर सुबह कहां से आई भीड़? उज्जैन शाही मस्जिद के बाहर बवाल की पूरी कहानी

उज्जैन की शाही मस्जिद के उस हिस्से को हटाने की कार्रवाई सोमवार को बवाल में बदल गई, जिसे 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण के लिए चिन्हित किया गया था. रात में प्रशासन और शहर काजी के बीच सहमति बनने के बाद भी सुबह समाज के भीतर मतभेद खुले और विरोध पथराव तक पहुंच गया.

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उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को खुद मुस्लिम समाज के लोग हटा रहे हैं. (Photo- ITG) उज्जैन में शाही मस्जिद के हिस्से को खुद मुस्लिम समाज के लोग हटा रहे हैं. (Photo- ITG)

संदीप कुलश्रेष्ठ / रवीश पाल सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 28 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:46 PM IST

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर सोमवार सुबह हालात बिगड़ गए. कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क को 15 मीटर चौड़ा करने का काम चल रहा है. इसी सड़क की जद में गोपाल मंदिर इलाके की शाही मस्जिद का कुछ हिस्सा आ रहा है. प्रशासन की तरफ से इसे हटाने की तैयारी के बीच बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा हो गए. पुलिस और सुरक्षा बल पहले से तैनात थे, लेकिन विरोध बढ़ने के बाद पथराव और आंसू गैस तक की स्थिति बन गई.

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इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब शहर काजी और प्रशासन के बीच सहमति बनने की बात सामने आई थी, तो फिर सोमवार सुबह इतना बड़ा विरोध कैसे शुरू हुआ. दरअसल, रविवार रात प्रशासन और शहर काजी खलिकुर्ररेहमान के बीच बातचीत हुई थी. इसके बाद प्रभावित हिस्से को हटाने पर सहमति बनी. तय हुआ कि प्रशासन की मशीनों से सीधे तोड़ने के बजाय मस्जिद से जुड़े लोग खुद सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे हिस्से को हटाएंगे. यह जानकारी खुद उज्जैन के कलेक्टर रौशन कुमार ने आजतक से बातचीत में कही है. इनके अलावा कलेक्टर के आधिकारिक एक्स हैंडल पर शहर काजी के बयान का वीडियो भी शेयर किया गया है.

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कहां से बदली पूरी तस्वीर?

रात में सहमति बनने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया था. सोमवार सुबह मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया समाज के कुछ लोगों की तरफ से शुरू भी कर दी गई. लेकिन इसी दौरान विरोध करने वाला समाज का दूसरा गुट सामने आ गया. धीरे-धीरे मस्जिद और आसपास के इलाके में भीड़ बढ़ने लगी. बताया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर मैसेज सर्कुलेट होने के बाद वहां लोगों की भीड़ जुटी थी.

विरोध कर रहे लोगों में महिलाएं भी शामिल थीं. पुलिस के मुताबिक, भीड़ में कुछ लोग बैरिकेडिंग को धकेलकर प्रतिबंधित क्षेत्र में जाने की कोशिश कर रहे थे. इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा और पथराव शुरू हो गया. पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और हल्का बल प्रयोग किया. इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है.

मस्जिद का पूरा ढांचा नहीं, सिर्फ प्रभावित हिस्सा हटना है

इस विवाद को लेकर एक अहम बात यह है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए पूरी शाही मस्जिद को गिराने की कार्रवाई नहीं हो रही है. प्रस्तावित कार्रवाई में वही हिस्सा आता है, जो 15 मीटर की सड़क के तय अलाइनमेंट में पड़ रहा है. इसमें एक नमाज पढ़ने वाली जगह का एक हिस्सा, करीब 120 फीट ऊंची मीनार और मजहर चौक शाही का हिस्सा शामिल बताया गया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 सितंबर को इस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था.

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कोर्ट के सामने प्रशासन की तरफ से कहा गया था कि इस सड़क पर कई धार्मिक ढांचों के प्रभावित हिस्से पहले ही हटाए जा चुके हैं और सड़क चौड़ीकरण सिंहस्थ 2028 के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए जरूरी है. कोर्ट के आदेश में यह भी दर्ज है कि इसी सड़क पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के हिस्से पहले हटाए जा चुके हैं.

उज्जैन के एसपी प्रदीप शर्मा ने भी बताया, 'समाज के सभी समुदाय और वर्ग अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार अपना सहयोग और समर्थन दे रहे हैं. आज भी शाही मस्जिद में मस्जिद समिति द्वारा शुरू किया गया विध्वंस कार्य चल रहा है.'

क्यों हो रहा है विरोध?

मस्जिद से जुड़े लोगों की तरफ से यह तर्क दिया जा रहा है कि पहले ही आसपास की दुकानों और अन्य हिस्सों को सड़क चौड़ीकरण के लिए दिया जा चुका है. उनका कहना है कि अब मस्जिद का हिस्सा हटाने के बजाय सड़क का अलाइनमेंट बदलने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए. दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि तय सड़क चौड़ाई और सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए प्रभावित निर्माण हटाना जरूरी है.

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इसी बीच शहर काजी खलिकुर्ररेहमान ने लोगों से विवाद में नहीं पड़ने और प्रशासन की तय व्यवस्था के मुताबिक काम करने की अपील की. उन्होंने अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को भी कहा. लेकिन जमीन पर सहमति के बावजूद विरोध करने वाला दूसरा गुट सामने आने से मामला बिगड़ गया.

900 मीटर के रास्ते में 7 धार्मिक स्थल

कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर के बीच करीब 900 मीटर लंबे रास्ते के चौड़ीकरण में कुल सात धार्मिक स्थल सड़क की जद में आने की बात सामने आई है. इनमें से ज्यादातर के प्रभावित हिस्से हटाए जा चुके हैं. पास में बनी बोहरा समाज की मस्जिद को भी समाज की सहमति से हटाया गया था. अब सबसे ज्यादा विवाद शाही मस्जिद को लेकर है.

यानी पूरे विवाद की कड़ी रविवार रात की सहमति से सोमवार सुबह के विरोध तक जुड़ती है. एक तरफ प्रभावित हिस्सा खुद हटाने पर सहमति बनी, वहीं दूसरी तरफ विरोध करने वाला गुट सड़क पर उतर आया. इसके बाद भीड़ बढ़ी, बैरिकेडिंग के पास धक्का-मुक्की और पथराव हुआ और पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. फिलहाल विवाद का केंद्र सड़क चौड़ीकरण, मस्जिद के प्रभावित हिस्से और इस पर समाज के भीतर सामने आए अलग-अलग रुख पर बना हुआ है.

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