सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण और शहर के सौंदर्यीकरण का काम तेज हो गया है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को अपने पैतृक क्षेत्र अब्दालपुरा पहुंचकर एक मिसाल पेश की. उन्होंने अपने पैतृक मकान नंबर 180 में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खुद गेती चलाकर सड़क चौड़ीकरण के लिए मकान को तोड़े जाने की शुरुआत की.
मुख्यमंत्री मोहन यादव का जन्म और पैतृक निवास उज्जैन के अब्दालपुरा क्षेत्र में है. सड़क चौड़ीकरण की जद में उनका पुश्तैनी मकान भी आ रहा है. मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने मकान पर गेती चलाकर यह संदेश दिया कि सिंहस्थ की तैयारियों और शहर के विकास में आम नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों की भी सहभागिता होनी चाहिए.
272 मकानों से होकर गुजरेगी चौड़ी सड़क
अब्दालपुरा उज्जैन की पुरानी बस्तियों में शामिल है. यहां एक तरफ खजूर वाली मस्जिद और दूसरी तरफ जीवाजीगंज थाना स्थित है. दोनों के बीच करीब 272 मकान हैं. सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में इस इलाके के कई मकान प्रभावित हो रहे हैं.
खास बात यह है कि यहां हिंदू, मुस्लिम और बोहरा समुदाय के लोग लंबे समय से साथ रहते आए हैं. सड़क चौड़ीकरण को लेकर स्थानीय लोग भी सहयोग कर रहे हैं. कई परिवार अपने मकानों का हिस्सा हटाने के लिए स्वेच्छा से तैयार हैं.
स्थानीय निवासी कादर भाई ने कहा कि लंबे समय से इस सड़क के चौड़े होने की जरूरत महसूस की जा रही थी. सड़क संकरी होने के कारण वाहनों के निकलने में परेशानी होती थी.
उनके मुताबिक सड़क चौड़ी होने के बाद आवागमन आसान होगा. उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले लोगों के मकानों की चौड़ाई भले ही अलग-अलग हो, लेकिन लोगों के दिलों की गहराई काफी है. सड़क चौड़ीकरण के लिए दोनों तरफ के रहवासी अपनी जगह देने के लिए तैयार हैं.
CM की बहन का मकान भी सड़क चौड़ीकरण की जद में
सड़क के दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मोहन यादव की बहन और नगर निगम उज्जैन की सभापति कलावती यादव का मकान भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहा है.
स्थानीय दूध कारोबारी नरेंद्र जैन ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार का मकान भी सड़क चौड़ीकरण के लिए टूट रहा है. इससे यह संदेश जा रहा है कि विकास के काम में किसी को विशेष छूट नहीं है. आम नागरिक हों या खास, सभी सिंहस्थ की तैयारियों में अपना योगदान दे रहे हैं.
इसी क्षेत्र के पूर्व पार्षद जगदीश पांचाल ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण से उज्जैन के विकास को गति मिलेगी. इससे शहर की तस्वीर बदलने के साथ सिंहस्थ के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को भी बेहतर सुविधा मिल सकेगी. देखें VIDEO:-
'महाकाल की नगरी में सभी बराबर'
CM यादव ने कहा कि उज्जैन के लोगों ने विकास कार्यों में सहभागी बनकर खुद अपने मकान तोड़ने में सहयोग दिया है. उन्होंने इसे एक आदर्श उदाहरण बताया.
मुख्यमंत्री के मुताबिक, उज्जैन की आबादी करीब 8 लाख है, जबकि सिंहस्थ के दौरान 40 करोड़ से अधिक लोगों के आने की संभावना है. उन्होंने कहा कि सिंहस्थ की तैयारियों के लिए उज्जैन के लोगों ने बड़ा योगदान दिया है. उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने आयोजन के लिए बिना भेदभाव और बिना संकोच अपने देवस्थान तक पीछे किए. मुख्यमंत्री ने कहा कि यही उज्जैन के लोगों की विशेषता है और इससे सरकार के प्रति भरोसा मजबूत होता है.
सिंहस्थ 2028 के लिए क्यों जरूरी है सड़क चौड़ीकरण?
सिंहस्थ 2028 के दौरान उज्जैन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. ऐसे में शहर के प्रमुख मार्गों को चौड़ा करने, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम करने के लिए अलग-अलग इलाकों में विकास कार्य किए जा रहे हैं.
अब्दालपुरा का सड़क चौड़ीकरण भी इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा है. सड़क चौड़ी होने से स्थानीय लोगों के दैनिक आवागमन के साथ सिंहस्थ के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है.
मैराथन में भी शामिल हुए मुख्यमंत्री
रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उज्जैन के दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय मैराथन में भी सहभागिता की. उन्होंने मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और प्रतिभागियों के साथ योगाभ्यास भी किया.
मुख्यमंत्री ने नागरिकों से नियमित योग और व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर के लिए सुबह की सैर और व्यायाम महत्वपूर्ण हैं. मैराथन जैसे कार्यक्रम स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली के लिए प्रेरणा देते हैं. उन्होंने कहा कि हमारा शरीर परमात्मा का अनमोल प्रसाद है और योग व आत्मचिंतन के माध्यम से हम अपने शरीर और जीवन को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं.
पर्यावरण संरक्षण और पितृपक्ष का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं और कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करते हैं. इसलिए पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक रहना जरूरी है. पितृपक्ष का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय अपने पितरों का स्मरण करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है.
अपने राजनीतिक सफर का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने छात्र जीवन और राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि जब वे पहली बार साइंस कॉलेज से चुनाव जीतकर आए, तब उन्होंने जॉइंट सेक्रेटरी का चुनाव लड़ा. इसके बाद प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा और आगे भी अलग-अलग चुनावों में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि हर चुनाव और सार्वजनिक जीवन में उनके सामने एक बात रही कि आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए अपने आचरण और कार्यों से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए.
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके सार्वजनिक जीवन से नियम, कानून और सुशासन को प्राथमिकता देने की सीख मिलती है.
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री का अपने ही पैतृक मकान पर सड़क चौड़ीकरण के लिए गेती चलाना अब्दालपुरा के विकास कार्य का प्रमुख दृश्य बन गया है. वहीं, स्थानीय लोगों की सहभागिता से यह क्षेत्र शहर के विकास में सामुदायिक भागीदारी की मिसाल के तौर पर भी सामने आ रहा है.
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