ग्वालियर की शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने हर किसी को झकझोरकर रख दिया है. शनिवार रात करीब 1 बजकर 20 मिनट पर हुए इस हादसे में 15 श्रद्धालुओं की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 26 लोग घायल हैं. इस खौफनाक मंजर को अपनी आंखों से देखने वाले गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) ग्वालियर के MBBS छात्र रामनरेश कुशवाह ने उस रात की पूरी दास्तां बयां की है. जानिए एक मेडिकल छात्र की जुबानी कि उस भयानक रात मौके पर असल में क्या हुआ था.
MBBS सेकंड ईयर के छात्र रामनरेश कुशवाह बताते हैं, ''मैं 17-18 की रात शीतला माता मंदिर दर्शन करने गया था. मेरे साथ चार-पांच दोस्त भी थे. कुछ दोस्त नर्सिंग से जुड़े हैं. हम मंदिर पहुंचने ही वाले थे. तभी अचानक तेज आवाज आई. रात करीब डेढ़ से दो बजे का वक्त था. हम दौड़कर मौके पर पहुंचे. सामने का मंजर देखकर होश उड़ गए. एक ट्रक लुढ़कते हुए आया और श्रद्धालुओं को कुचलते हुए मंदिर के एंट्री गेट के पास रुक गया. कई लोग उसके नीचे दब गए.
चारों तरफ चीख-पुकार थी. कोई दर्द से चिल्ला रहा था. कोई मदद मांग रहा था. कोई अपनों को तलाश रहा था. हमने तुरंत घायलों की मदद शुरू कर दी. ट्रक के नीचे फंसे थे कई लोग. ट्रक धान की बोरियों से लोडेड था. बहुत भारी था. इसलिए उसके नीचे दबे लोगों को तुरंत बाहर निकालना संभव नहीं था.
कुछ लोग टायरों के नीचे भी फंसे थे. वे दर्द से कराह रहे थे. उन्हें देखकर हमसे रहा नहीं गया. मैं मेडिकल का छात्र हूं. इसलिए जो मेडिकल सहायता उस समय दे सकता था, देना शुरू कर दिया.
मौके पर एक एंबुलेंस पहले से मौजूद थी. एंबुलेंस में फर्स्ट एड थे. जो लोग ट्रक के नीचे फंसे थे और दर्द से तड़प रहे थे, उन्हें वहीं इलाज दिया गया.
'मुझे नहीं निकाल सकते तो मार दो'
एक शख्स बुरी तरह ट्रक के नीचे फंसा था. उसे बाहर नहीं निकालना कठिन था. उधर, ट्रक को उठाने के लिए हाइड्रा का इंतजार था. वह दर्द से लगातार चिल्ला रहा था. उसकी हालत ऐसी थी कि उसने कह दिया- अगर मुझे बाहर निकाल नहीं सकते तो मुझे मार दो.
यह सुनकर मैं अंदर तक हिल गया. मैं उसके पास गया. वह ट्रक के नीचे ही फंसा था. मैंने वहीं उसे दर्द कम करने के लिए फर्स्ट एड दिया. उसे हिम्मत देने की कोशिश की. हम ट्रक उठने का इंतजार करते रहे. देखें VIDEO:-
किसी की रोकी ब्लीडिंग, किसी को दिया CPR
किसी को ऑक्सीजन लगाई, किसी की ब्लीडिंग रोकी. एक के बाद एक घायल सामने आ रहे थे. हमने प्राथमिक उपचार शुरू किया. जहां जरूरत थी, CPR देने की कोशिश की. घायलों की ब्लीडिंग रोकी. ऑक्सीजन मास्क लगाए. इसके बाद उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाया.
हम उस समय यह नहीं देख रहे थे कि कौन कहां से आया है. सिर्फ यह देख रहे थे कि किसे मदद की जरूरत है.
20 से 25 लोगों को निकालने में की मदद
वहां स्थानीय लोग भी तुरंत मदद के लिए आगे आ गए थे. मंदिर आए श्रद्धालु भी रेस्क्यू करने लगे. जिससे जो बन रहा था, वह कर रहा था. हम चार-पांच दोस्त भी लोगों को निकालने में जुट गए. हमने करीब 20 से 25 घायलों को वहां से निकालने और एंबुलेंस तक पहुंचाने में मदद की.
कुछ लोगों को निकालना आसान नहीं था. वे भारी ट्रक के नीचे दबे हुए थे. फिर JCB और हाइड्रा पहुंचे कुछ देर बाद पुलिस और प्रशासन की और टीमें मौके पर पहुंच गईं. JCB और हाइड्रा बुलाए गए हाइड्रा की मदद से ट्रक को ऊपर उठाया गया.
इसके बाद नीचे फंसे लोगों को निकालना शुरू हुआ. उस समय तक कई लोग काफी देर से ट्रक के नीचे फंसे हुए थे. हर मिनट भारी पड़ रहा था.
'मेडिकल स्टूडेंट हूं, जो कर सकता था किया' उस रात मैंने सिर्फ वही करने की कोशिश की, जो एक मेडिकल छात्र के तौर पर कर सकता था. घायलों को फर्स्ट एड दिया. दर्द से तड़प रहे लोगों को इंजेक्शन दिया. ऑक्सीजन लगाई. उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाया. रेस्क्यू में मदद की. उस वक्त मेरे दिमाग में सिर्फ एक बात थी. जितने लोगों की जान बच सकती है, बचाई जाए. देखें एक VIDEO:-
15 लोगों की चली गई जान
यह बेहद दुखद हादसा था. तेज रफ्तार ट्रक श्रद्धालुओं और सड़क किनारे लगी दुकानों को रौंदते हुए मंदिर के पुराने प्रवेश द्वार के पास पलट गया. हादसे में 15 श्रद्धालुओं की मौत हो गई. दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग घायल हुए. कुल 41 लोग हादसे की चपेट में आए.
आज भी उस रात का मंजर आंखों के सामने है. लोगों की चीखें याद हैं. ट्रक के नीचे फंसे लोगों का दर्द याद है. हम माता के दर्शन करने गए थे. लेकिन वहां पहुंचकर जो देखा, उसे शायद जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगा.''
नीरज चौधरी