'सावन में क्यों चढ़ता है शिवजी को जल...', धर्म संसद में कथावाचक ने बताया महत्व

उज्जैन में आयोजित आजतक धर्म संसद के शिव कथा सत्र में कथावाचक महेश गिरी ने सावन महीने में भगवान शिव के जलाभिषेक के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला.

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आजतक धर्म संसद में कथा वाचक महेश गिरी ने बताया सावन का महत्व आजतक धर्म संसद में कथा वाचक महेश गिरी ने बताया सावन का महत्व

aajtak.in

  • उज्जैन,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:22 PM IST

महाकाल की नगरी उज्जैन में आयोजित 'आजतक धर्म संसद' के 'शिव कथा' सेशन में कथावाचक महेश गिरी ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने सावन के महीने का महत्व बताया, साथ ही इस महीने में शिवजी के जलाभिषेक का महत्व क्यों बढ़ जाता है, इसे भी रेखांकित किया.

उन्होंने अपने सत्र में भगवान शिव और जलाभिषेक के धार्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. कथावाचक महेश गिरी ने कहा कि शास्त्रों में भगवान शिव को जल अत्यंत प्रिय बताया गया है, इसलिए सावन के महीने में जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है.

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शिवजी का जल से क्या है विशेष संबंध?

महेश गिरी ने कहा कि शास्त्रों में 'जलधारा शिव प्रियम' का उल्लेख मिलता है. उन्होंने बताया कि मां गंगा भगवान विष्णु के चरणों से प्रकट होकर भगवान शिव की जटाओं में विराजमान हुईं. इसी कारण शिव का जल से विशेष संबंध माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार संसार में व्याप्त समस्त जल को गंगा का स्वरूप माना गया है, इसलिए भगवान शिव को जल अर्पित करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है.

सावन का क्या है महत्व?
वर्षा ऋतु के चार महीनों में सबसे अधिक वर्षा सावन में होती है. यही कारण है कि यह महीना भगवान शिव को सबसे प्रिय माना जाता है. उनके अनुसार जो श्रद्धालु सावन में पूरे मन से शिव की आराधना करता है, उस पर भगवान शिव विशेष कृपा करते हैं.

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एक ही हैं हरि और शिव

कथावाचक महेश गिरी ने चातुर्मास का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में जल में शयन करते हैं. उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में हरि और हर को अभिन्न माना गया है. ऐसे में चातुर्मास के दौरान जल का महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि उसमें भगवान विष्णु का वास माना जाता है.

उन्होंने कांवड़ यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि श्रद्धालु गंगा, नर्मदा, शिप्रा और अन्य पवित्र नदियों का जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. उनके अनुसार जब भगवान का वास माने जाने वाला यह पवित्र जल शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है तो भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
 

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