1.30 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला, सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी महिला को दी अग्रिम जमानत

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने यह आदेश दिया. मामला दिल्ली के वसंत कुंज नॉर्थ थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468, 471 और 34 के तहत दर्ज किया गया था. ये धाराएं धोखाधड़ी, जालसाजी और साझा इरादे से किए गए अपराधों से संबंधित हैं.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट ने शर्त के साथ दी महिला को जमानत (Photo-Agency) सुप्रीम कोर्ट ने शर्त के साथ दी महिला को जमानत (Photo-Agency)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के एक मामले में आरोपी महिला को अग्रिम जमानत दे दी है. अदालत ने माना कि आरोपी महिला पुलिस जांच में लगातार सहयोग कर रही है. जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली के वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 420, 468, 471 और 34 के तहत दर्ज मामले में यह राहत दी है.

Advertisement

शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए उनके खिलाफ उपलब्ध सामग्री अग्रिम जमानत से इनकार करने के लिए पर्याप्त नहीं है. अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि आरोपी जांच में सहयोग कर रही हैं. हालांकि, कोर्ट ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, बुलवार्क फैसिलिटीज मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े विवाद के बाद निधि नेहरा शर्मा और अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को कंपनी की देनदारियां निपटाने में मदद करने का भरोसा दिया था. आरोप है कि इस सिलसिले में अन्य सह-आरोपियों को खातों और आईटी से जुड़े काम के लिए पेश किया गया.

यह भी पढ़ें: तलाकशुदा और एक बच्चे की मां निकली दुल्हन, जेवर लेकर हुई फरार... AAP नेता के साथ फ्रॉड

Advertisement

अभियोजन का आरोप है कि इस पूरे मामले में करीब 1.30 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ और रकम को कथित तौर पर निजी फायदे के लिए दूसरी जगह इस्तेमाल किया गया. शिकायतकर्ता को सुरक्षा और हाउसकीपिंग सेवाओं से जुड़ा करीब 11 करोड़ रुपये का एक कथित एनबीसीसी वर्क ऑर्डर भी दिखाया गया था. अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह दस्तावेज फर्जी था.

आरोप यह भी है कि कंपनी की देनदारियां निपटाने के नाम पर शिकायतकर्ता को गलत जानकारी देकर रकम हस्तांतरित कराई गई. हालांकि, ये अभियोजन पक्ष के आरोप हैं; अदालत के आदेश का अर्थ आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है.

जांच में सहयोग को अदालत ने माना अहम
निधि नेहरा शर्मा की ओर से पेश अधिवक्ता अश्वनी दुबे ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल जांच में सहयोग कर रही हैं. दलीलों और मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद पीठ ने अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि इस मामले में निधि नेहरा शर्मा को गिरफ्तार किया जाता है, तो जांच अधिकारी द्वारा तय शर्तों के अधीन उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए.

यह भी पढ़ें: दिल्ली: पीतमपुरा में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा! 100 करोड़ के साइबर फ्रॉड में 11 गिरफ्तार, दो महिलाएं भी शामिल

Advertisement

शीर्ष अदालत ने आरोपी को जमानत पर रिहा होने के बाद संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में पेश होने और नए जमानत बांड जमा करने का निर्देश दिया है. उन्हें मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी. कोर्ट ने उनका पासपोर्ट पुलिस के पास जमा कराने का भी आदेश दिया है. पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि आरोपी अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करती हैं, तो राज्य सरकार अग्रिम जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख कर सकती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »