उत्तराखंड के बहुचर्चित हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट की अहम सुनवाई और संभावित फैसले से पहले स्थानीय पुलिस व प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है. इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल ने अपनी ताकत झोंक दी है.
प्रशासन की विशेष नजर रेलवे की 30 हेक्टेयर भूमि पर बने लगभग 3500 भवनों पर टिके इस संवेदनशील मामले पर है. फैसले की घड़ी पास आते ही बनभूलपुरा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी कर दी गई है.
सड़कों पर उतरा भारी पुलिस बल, निकाला फ्लैग मार्च
शांति एवं सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से सीनियर पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में बनभूलपुरा के गलियारों और मुख्य मार्गों पर फ्लैग मार्च निकाला गया. फ्लैग मार्च में एसपी सिटी, एसपी क्राइम समेत कई थानों की पुलिस और पीएसी (PAC) के जवान शामिल रहे.
चप्पे-चप्पे पर मुस्तैदी
इलाके के सभी संवेदनशील चौराहों और आउटर पॉइंट्स पर अतिरिक्त पुलिस पिकेट तैनात कर दिए गए हैं. अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों और धर्मगुरुओं से बातचीत कर किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है.
ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से रखी जा रही तीसरी आंख से नजर
सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है. बनभूलपुरा की छतों, संकरी गलियों और खाली परिसरों की निगरानी के लिए लगातार ड्रोन कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. मुख्य मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल रूम से 24 घंटे रियल-टाइम फीड चेक किया जा रहा है. वहीं, अफवाह फैलाने वालों और भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई के लिए पुलिस की साइबर सेल को एक्टिव मोड पर रखा गया है.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की लगभग 30 हेक्टेयर (करीब 78 एकड़) जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा हुआ है. पहले हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. यहां हजारों परिवारों के पुनर्वास और मालिकाना हक को लेकर सुनवाई चल रही है. फैसले से हजारों परिवारों और रेलवे दोनों का भविष्य तय होना है.
लीला सिंह बिष्ट