उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला. अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु तीर्थराज ब्रह्मकपाल पहुंचे. शनिवार सुबह से ही यहां पिंडदान और तर्पण करने वालों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. खास बात यह रही कि पितृ अमावस्या के दिन बद्रीनाथ धाम में एक दिन में 28 हजार 94 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. यात्रा के इस सीजन में श्रद्धालुओं की यह बड़ी संख्या धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी खास मानी जा रही है.
ब्रह्मकपाल में पितरों के लिए किया पिंडदान और तर्पण
बद्रीनाथ धाम स्थित तीर्थराज ब्रह्मकपाल में सर्वपितृ अमावस्या पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए. श्रद्धालुओं ने अलकनंदा नदी के पवित्र तट पर स्नान किया और अपने पूर्वजों के निमित्त विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया. तीर्थ पुरोहितों और आचार्यों ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार पितृ कर्म संपन्न करवाए.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मकपाल में पिंडदान का विशेष महत्व है. यहां देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनके उद्धार की कामना लेकर पहुंचते हैं. बद्रीनाथ धाम के धर्माधिकारी स्वयंवर सेमवाल ने भी सर्वपितृ अमावस्या के महत्व को बताया. उन्होंने भगवान नारायण से प्रार्थना की कि पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण करने वाले श्रद्धालुओं के पूर्वजों को भगवान के धाम में स्थान मिले.
ब्रह्मकपाल के तीर्थ पुरोहित गर्व सती के मुताबिक, इस वर्ष पितृपक्ष के दौरान बद्रीनाथ धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. सर्वपितृ अमावस्या पर भी ब्रह्मकपाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही.
बद्रीनाथ धाम में एक दिन में पहुंचे 28 हजार से ज्यादा श्रद्धालु
इस बार पितृ अमावस्या पर बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की गई. 10 अक्टूबर 2026 को यहां 28 हजार 94 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. आमतौर पर मई और जून के यात्रा सीजन में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला देखने को मिलता है.
इस यात्रा सीजन में 10 अक्टूबर तक बद्रीनाथ धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल संख्या 19 लाख 85 हजार 318 हो गई है. वहीं, पितृपक्ष के दौरान ही करीब पौने दो लाख श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम पहुंचे. इससे धाम में धार्मिक गतिविधियों के साथ यात्रा की रौनक भी बनी रही.
हेमकुंड साहिब की यात्रा संपन्न, 3.90 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
दूसरी ओर, सिखों के पवित्र तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. इसी के साथ इस वर्ष की यात्रा संपन्न हो गई. कपाट बंद होने के दिन 6,123 श्रद्धालुओं ने मत्था टेका. यात्रा समाप्त होने तक यहां कुल 3 लाख 90 हजार 696 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए.
कठिन बर्फीले रास्तों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद हेमकुंड साहिब पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी. वहीं, बद्रीनाथ धाम में यात्रा लगातार जारी है. सर्वपितृ अमावस्या पर ब्रह्मकपाल में उमड़ी भीड़ और दोनों प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन के प्रति लोगों की आस्था को एक बार फिर दिखाया.
कमल नयन सिलोड़ी