पंजाब के संगरूर के तुर बंजारा गांव से उठा ड्रग्स का मामला अब पुलिस केस तक पहुंच गया है.गुलजार सिंह मामले में दिर्बा थाने की पुलिस ने सरपंच समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है. आरोपियों पर आत्महत्या के लिए उकसाने, उत्पीड़न और SC/ST Act के तहत मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, इस FIR में पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम शामिल नहीं है.
50 साल के गुलजार सिंह ने गांव में खुलेआम ड्रग्स बिकने का मुद्दा पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने उठाया था. यह मामला गांव में आयोजित एक विकास कार्यक्रम के दौरान सामने आया था. गुलजार ने मंत्री को बताया था कि उनके गांव में ड्रग्स की बिक्री खुले तौर पर हो रही है और उनका बेटा भी 'चिट्टा' का आदी है.
इसके बाद गुलजार के परिवार और कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत के लोगों ने उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया. परिवार का कहना था कि इस दबाव के बाद गुलजार काफी परेशान हो गए और हताश होकर उन्होंने जहरीला पदार्थ खा कर अपनी जान दे दी.
घटना के बाद उन्हें पहले संगरूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया. बाद में पटियाला के राजिंदरा अस्पताल और फिर लुधियाना के DMC अस्पताल में इलाज कराया गया. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रुपिंदर कौर बाजवा भी अस्पताल पहुंची थीं. उस समय पुलिस ने गुलजार और उनके परिवार के बयान दर्ज करने की बात कही थी.
सरपंच पक्ष ने आरोपों को नकारा
वहीं सरपंच पक्ष ने गुलजार पर किसी तरह का दबाव या धमकी देने के आरोपों को खारिज किया है. सरपंच के पति बलजीत सिंह ने कहा था कि गुलजार ने मंत्री के सामने ड्रग्स का मुद्दा उठाया था और इसके बाद उनसे बात कर उन्हें कार्रवाई का भरोसा दिया गया था. उन्होंने किसी विवाद या धमकी से इनकार किया.
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अब पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. सबसे अहम बात यह है कि FIR में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को आरोपी नहीं बनाया गया है.
कुछ दिन पहले भी उठा था ड्रग्स का मुद्दा
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब संगरूर में कुछ दिन पहले भी ड्रग्स को लेकर विरोध हुआ था. 2 सितंबर को मुख्यमंत्री भगवंत मान के सुनाम विधानसभा क्षेत्र के शेरों गांव में हुए लोक मिलनी कार्यक्रम के दौरान 37 वर्षीय मोहंजीत सिंह ने सरकार के ड्रग्स विरोधी अभियान पर सवाल उठाते हुए विरोध किया था.
गुलजार सिंह मामले की नई FIR के बाद अब पुलिस जांच पर नजर है. परिवार के आरोप, सरपंच पक्ष का पक्ष और FIR में दर्ज धाराएं, इन सभी पहलुओं के आधार पर आगे की तस्वीर साफ होगी.
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