संसद के दोनों ही सदन से एंटी पेपर लीक बिल पास हो गया है. मॉनसून सत्र का दूसरा सप्ताह शुक्रवार को पूरा हो जाएगा. मोदी सरकार हंगामे के बीच विधायी कामकाज निपटाना शुरू कर दिया है. सरकार संसद सत्र के दूसरे सप्ताह में दो महत्वपूर्ण बिल को पास कराने में सफल रही है और अब सभी की निगाहें महिला आरक्षण से जुड़े बिल और लोकसभा-विधानसभा सीटों को बढ़ाने वाले परिसीमन से जुड़े विधेयक पर है.
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू हुआ है और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा. संसद सत्र का पहला सप्ताह पेपर लीक और जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन पर पुलिस एक्शन के विरोध में हंगामे के भेंट चढ़ गया. दूसरे सप्ताह में एंटी पेपर लीक बिल और वंदे मातरम बिल को सरकार पास करा ली है.
शुक्रवार के बाद सोमवार को संसद सत्र शुरू होगा, जिसके बाद 13 अगस्त तक चलना है. इस तरह आखिरी के 9 दिन में संसद सत्र में सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के जुड़े विधेयक को पास कराने के लिए अपने कदम को आगे बढ़ाएगी. इस दिशा में मोदी सरकार आगे बढ़ती है तो फिर दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े को कैसे पार कर पाएगी?
महिला आरक्षण-परिसीमन बिल का क्या होगा
संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने से पहले तय माना जा रहा था कि मोदी सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने की दिशा में अपने कदम बढ़ाएगी. इसकी वजह टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा सांसदों की बगावत रही, जिसके चलते मोदी सरकार का संसद में नंबर गेम बेहतर हुआ है. पेपर लीक के मुद्दे पर छात्र आंदोलन के चलते सरकार के सारे मंसूबों पर पानी फिर गया. मॉनसून सत्र के शुरूआती दो हफ्ते हंगामे के भेंट चढ़ गए, लेकिन अब अगले हफ्ते विधायी कामकाज को निपटाएगी.
हालांकि, कुछ बिलों पर टकराव की स्थिति बन सकती है, जिनमें एफसीआरए प्रमुख है. हंगामा होने पर संविधान संशोधन बिल पेश करने पर भी संशय गहरा गया है. महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर सरकारी की स्थिति साफ नहीं है. ऐसे में माना जा रहा है कि मोदी सरकार इन दिनों विधेयक को तभी लाएगी जब वह इसे पारित कराने के लिए पूरी तरह से आश्वस्त होगी.
परिसीमन के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए, क्योंकि इन दोनों विधेयक संविधान संशोधन के जरिए हो सकता है. लोकसभा में कुल 543 सीटों में से 3 सीटें खाली हैं. इस तरह लोकसभा के 540 सदस्यों में से दो-तिहाई के लिए 360 सांसदों का समर्थन चाहिए.
मोदी सरकार ने अप्रैल 2026 में परिसीमन बिल पहली बार लोकसभा में पेश किया था, उस समय वोटिंग के दौरान एनडीए को 298 सांसदों का समर्थन मिला था. सरकार दो-तिहाई बहुमत न जुटा पाने के चलते विधेयक को पास नहीं करा सकी थी. हालांकि, बदले हुए सियासी समीकरण में बीजेपी का नंबर गेम पहले से मजबूत हुआ है.
दो-तिहाई के नंबर गेम से कितनी दूर सरकार
बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए के पास 293 सांसदों का समर्थन है. तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों का समर्थन मोदी सरकार को है. इसके अलावा उद्धव ठाकरे की पार्टी के 6 सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए हैं. इस तरह मोदी सरकार के समर्थन में सांसदों की संख्या 319 हो रही है. इसके अलावा वाईएसआरसीपी के 4 और 1 निर्दलीय को मिलाकर यानि 5 सांसदों का समर्थन पहले से हैं, उन्हें मिला देते हैं तो फिर यह आंकड़ा 324 पहुंच जा रह है.
मोदी सरकार के दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सांसदों के समर्थन चाहिए. ऐसे में सरकार की नजर डीएमके के 22 सांसदों और शरद पवार की पार्टी के 8 सांसदों पर थी. एंटी पेपर लीक के मुद्दे पर शरद पवार की पार्टी ने जिस तरह से आक्रामक तेवर अपनाए रखा गया, उसके चलते मोदी सरकार के लिए एनसीपी (एसपी) का समर्थन हासिल करना अब मुश्किल दिख रहा है. हालांकि, सरकार अभी इन दोनों विधेयक पर अपने पत्ते नहीं खोल रही है.माना जा रहा है कि सरकार दो-तिहाई का नंबर पूरी तरह से जुगाड़ कर लेगी, तभी संसद में बिल लेकर आएगी?
कुबूल अहमद