आखिरकार झुक गया फलता का 'पुष्पा'! उम्मीदवारी, विवाद और अब नाम वापसी वाले जहांगीर की कहानी

पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को री-पोलिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी प्रक्रिया से हटने का फैसला किया है. यह कदम टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. चुनाव आयोग ने ईवीएम गड़बड़ी के चलते री-पोलिंग का आदेश दिया था.

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जहांगीर खान ने फलता री-पोलिंग से उम्मीदवारी वापस ले ली है जहांगीर खान ने फलता री-पोलिंग से उम्मीदवारी वापस ले ली है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:57 PM IST

पश्चिम बंगाल में 21 मई को होने वाली री-पोलिंग से ठीक पहले बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है. यहां से टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने खुद ही चुनावी प्रक्रिया से किनारा कर लिया है. जहांगीर खान ने ऐलान किया है कि अब वह चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे. टीएमसी के लिए चुनाव से ठीक पहले और प्रचार खत्म होने के ऐन दिन जहांगीर खान का चुनावी मैदान से पीछे हटना बड़ा झटका है.

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उधर, बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने फलता सीट पर हुई इस सियासी घटना पर रिएक्शन देते हुए कहा कि, नतीजा सबको मालूम है, इसलिए कोई कैंपेन नहीं चल रहा है. सारी गुंडागर्दी खत्म हो गई है. इनको पता है कि बुरी तरह टीएमसी की हार होगी. फलता डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, जहां दोबारा मतदान की तैयारियों के दौरान तृणमूल कांग्रेस के किसी भी बड़े नेता की मौजूदगी नहीं दिखी.

TMC बोली- ये पार्टी का फैसला नहीं, कुछ लोग झुक गए
जहांगीर खान के फैसले पर TMC ने कहा, 'फलता में दोबारा होने वाले चुनाव से हटने का जहांगीर खान का फैसला उनका निजी फैसला है, पार्टी का नहीं. '

आगे लिखा गया कि 4 मई को चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से, अकेले फलता विधानसभा क्षेत्र में हमारी पार्टी के 100 से ज़्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया जा चुका है. दिन-दहाड़े डरा-धमकाकर पार्टी के कई दफ्तरों में तोड़फोड़ की गई, उन्हें बंद कर दिया गया और उन पर जबरन कब्जा कर लिया गया. इसके बावजूद बार-बार शिकायतें मिलने पर भी चुनाव आयोग (EC) ने इस पर आंखें मूंदे रखीं.

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इतने दबाव के बावजूद, हमारे कार्यकर्ता चट्टान की तरह अडिग हैं और एजेंसियों तथा प्रशासन के ज़रिए BJP द्वारा फैलाए जा रहे डर का लगातार विरोध कर रहे हैं. हालांकि, कुछ लोग आखिरकार इस दबाव के आगे झुक गए और उन्होंने चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर लिया. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. 'बांग्ला विरोधी' BJP के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. फिर चाहे वह पश्चिम बंगाल में हो या दिल्ली में.

शुभेंदु अधिकारी ने भी साधा था निशाना
इस बात पर बीजेपी बंगाल चीफ समिक भट्टाचार्य ने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि फलता में चुनाव प्रचार के दौरान अभिषेक कहां हैं. इसी तरह, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी जहांगीर खान पर निशाना साधते हुए पूछा, "पुष्पा कहां है? 

कुणाल घोष ने भी पूछा- पुष्पा झुका क्यों?
ऐसा नहीं है कि ये सवाल और तंज सिर्फ टीएमसी के विरोधी दल उठा रहे हैं. जहांगीर खान के इस कदम की आलोचना उनकी अपनी पार्टी में भी हो रही है. जहांगीर खान के चुनाव मैदान से हटने पर पार्टी नेता कुणाल घोष ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार पर तंज कस दिया.

कुणाल घोष ने उम्मीदवार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर वह ‘पुष्पा’ है और ‘पुष्पा झुकता नहीं’ कहता है, तो फिर वह झुका क्यों?” टीएमसी नेता की यह टिप्पणी अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है. माना जा रहा है कि फाल्टा सीट पर उम्मीदवार के पीछे हटने को लेकर पार्टी के भीतर भी नाराजगी और असहजता है. विपक्ष भी इस बयान को लेकर टीएमसी पर निशाना साध रहा है.

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सुर्खियों में है फलता री-पोलिंग

पिछले कुछ दिनों से फलता का चुनाव सुर्खियों में बना हुआ था. देखते ही देखते यह चुनाव आम सियासी लड़ाई से आगे निकलकर एक्शन फिल्मों की स्क्रिप्ट जैसा हो गया. इसकी शुरुआत तब हुई थी, जब चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा, जिन्हें यूपी की सियासत में 'सिंघम' के तौर पर देखा जाता है.

वहीं, टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने एक चुनावी जनसभा में खुलेआम चुनौती देते हुए कहा था, 'अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्पा हूं, पुष्पराज, झुकेगा नहीं.' इसी बात को याद करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सवाल उठाया था कि पुष्पा कहां है?

शुभेंदु अधिकारी ने किया था बीजेपी उम्मीदवार के लिए चुनाव प्रचार
चुनाव प्रचार के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा के समर्थन में एक बड़ी रैली की थी. इस रैली में उन्होंने सीधे जहांगीर खान पर निशाना साधा था. शुभेंदु ने सरेआम चेतावनी देते हुए कहा था कि वह (जहांगीर खान) खुद को पुष्पा कहता है, अब इस 'पुष्पा' की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. फलता के लोगों ने पिछले 10 साल से आजादी से वोट नहीं डाला है, लेकिन इस बार बिना किसी खौफ के मतदान कीजिए और बीजेपी को एक लाख से अधिक वोटों से जिताइए. 

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यह भी पढ़िए- TMC के जहांगीर खान ने क्यों छोड़ा फलता का चुनावी मैदान? अब क्या होगा सीन

जहांगीर खान के करीबी की गिरफ्तारी से बदला गेम
बता दें कि पश्चिम बंगाल की सत्ता में बीजेपी के आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस का रुख पूरी तरह बदल चुका है. हाल ही में फलता पंचायत के वाइस प्रेसिडेंट सैदुल खान को गिरफ्तार कर लिया गया था. ये गिरफ्तारी एक पुराने केस के सिलसिले में हुई. बता दें कि सैदुल खान फालता विधानसभा उम्मीदवार जहांगीर खान के करीबी और रिश्तेदार हैं.  सैदुल खान पर जानलेवा हमले और हिंसा फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई थी. इस गिरफ्तारी के बाद से जहांगीर खान 'फरार' बताए जा रहे थे. जहांगीर खान पर भी ऐसी ही FIR दर्ज की गई थीं.

हाईकोर्ट भी पहुंचे थे जहांगीर खान
फिर रीपोलिंग के महज 72 घंटे पहले टीएमसी उम्मीदवार रहे खान ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जहांगीर खान का आरोप था कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश के तहत कई झूठी FIR दर्ज कराई गई हैं. इन्हीं मामलों के चलते उन्होंने अपनी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया. कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि जहां​गीर खान को 25 मई तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, हालांकि उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा. 

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अदालत ने दी थी 25 तक गिरफ्तारी से छूट
अगर उनके खिलाफ कोई बेहद गंभीर आपराधिक मामला सामने आता है, तो इस विषय को अदालत के संज्ञान में लाना होगा. साथ ही उन्हें चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा. बता दें कि, जहांगीर खान दक्षिण 24 परगना की फलता सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार थे. उन पर चुनाव के दौरान वोटरों को डराने और धमकाने के आरोप लगे थे  और इसी कड़ी में उन्होंने आईपीएस अजय पाल शर्मा के खिलाफ भी बयान दे दिया था. 

चर्चा में रहा था अजय पाल शर्मा का विवाद
जहांगीर खान ने IPS अजय पाल शर्मा को लेकर कहा था कि, 'उन्होंने इस खेल की शुरुआत की है लेकिन खत्म हम करेंगे. पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त. अगर आप सोच रहे हो कि कुछ CRPF के जवानों के साथ आप बच जाओगे तो आप गलत हो. हमारे यहां लोग ही असली ताकत हैं, अगर लोग साथ चलने लगे तो CRPF को हटा कर रख देंगे अगर यहां के लोग पैदल चले तो CRPF के लोग हवा में उड़ जाएंगे.'

टीएमसी का कोई नेता नहीं पहुंचा चुनाव प्रचार के लिए
बता दें कि हाईकोर्ट से छूट मिलने के बाद जहांगीर खान पुलिस की निगरानी में प्रचार कर रहे थे, लेकिन उनके लिए वोट मांगने टीएमसी की तरफ से कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा. ऐसे में उन्होंने निराश होकर चुनावी मैदान छोड़ दिया. फलता विधानसभा क्षेत्र को टीएमसी का सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है. पिछले 15 साल से टीएमसी जीत रही थी, लेकिन बीजेपी इस सीट पर हरहाल में जीत का परचम फहराना चाह रही थी. उधर जहांगीर के साथ प्रचार के लिए कोई नहीं दिख रहा था. यही वजह है कि वोटिंग से ठीक दो दिन पहले चुनाव से अपने कदम पीछे खींच लेने से बीजेपी की राह आसान कर दी है.

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फलता में क्यों हो रही है री-पोलिंग
पश्चिम बंगाल के फलता में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान हुआ था, जहां कई केंद्रों पर ईवीएम में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं थीं. इसके बाद चुनाव आयोग ने फिर से मतदान कराने का आदेश दिया था. चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, फलता विधानसभा के सभी 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक री-पोलिंग कराई जाएगी. इसमें सहायक मतदान केंद्र भी शामिल रहेंगे. पूरी प्रक्रिया एक साथ कराई जाएगी, ताकि हर बूथ पर समान माहौल बना रहे और किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे.

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