अमेरिका के भारत में राजदूत और दक्षिण-मध्य एशिया के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत सर्जियो गोर अपने जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन यानी आज लेह पहुंच गए हैं. उनका ये दौरा रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका भारतीय सीमावर्ती इलाकों और सुरक्षा चुनौतियों को करीब से समझने में दिलचस्पी दिखा रहा है जो चीन के लिए स्पष्ट संदेश है. इससे पहले उन्होंने बुधवार को जम्मू-कश्मीर का दौरा कर पाकिस्तान को मैसेज दिया था.
बताया जा रहा है कि गोर अपनी लद्दाख यात्रा के दौरान लेह के शेवतसेल टीचिंग ग्राउंड में तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से मुलाकात करेंगे. ये एक उच्च-स्तरीय बैठक होगी जो ऐसे वक्त में हो रही है, जब 91 वर्षीय भिक्षु इस क्षेत्र में लंबे वक्त से प्रवास कर रहे हैं. हालांकि, इस बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसे एक निजी मुलाकात के रूप में देखा जा रहा है.
गोर और दलाई लामा की ये बैठक सीधे तौर पर बीजिंग का ध्यान आकर्षित करेगी, क्योंकि चीन दलाई लामा को एक राजनीतिक हस्ती मानता है और विदेशी सरकारों के साथ उनकी आधिकारिक बातचीत का कड़ा विरोध करता है. चीन ऐसी बैठकों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताता है, चूंकि लेह भारत और चीन के बीच विवादित सीमा लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के बेहद करीब स्थित है, इसलिए इस मुलाकात का रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है.
चीन को लद्दाख से मैसेज
अब आते हैं चीन पर. सर्जियो गोर के दौरे का दूसरा और सबसे ज्यादा रणनीतिक हिस्सा लद्दाख है. साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में लंबे वक्त तक तनाव रहा. ऐसे में किसी अमेरिकी राजदूत का गलवान के बाद पहली बार लद्दाख जाना अपने आप में काफी अहम है, क्योंकि अमेरिका पहले भी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC पर यथास्थिति को बदलने की कोशिशों का विरोध कर चुका है. ऐसे में गोर का लद्दाख जाना भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक और रक्षा साझेदारी की अहमियत को दिखाता है.
LAC के पास रणनीतिक हलचल
हालांकि, इसे सीधे तौर पर चीन के खिलाफ किसी अमेरिकी कदम के तौर पर देखना जल्दबाजी होगा. लेकिन इतना जरूर है कि वॉशिंगटन भारत के सीमावर्ती इलाकों और सुरक्षा चुनौतियों को करीब से समझने में दिलचस्पी दिखा रहा है. इसलिए गोर के दौरे का रणनीतिक महत्व बढ़ जाता है.
आपको बता दें कि अमेरिकी राजदूत का ये दौरा उत्तरी भारत के व्यापक प्रवास का हिस्सा है. बुधवार को उन्होंने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और एलजी मनोज सिन्हा से मुलाकात की और रात श्रीनगर में विश्राम किया. अब वे लद्दाख जा रहे हैं. गलवान झड़प के बाद किसी अमेरिकी राजदूत का लद्दाख का ये पहला दौरा है जो चीन को सीधे कूटनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है.
यूएस का पाकिस्तान को संदेश
कश्मीर घाटी की सर्जियो गोर की यात्रा से पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ी हैं, क्योंकि लंबे वक्त से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाता रहा है. पर गोर का सीधे कश्मीर जाना इस मामले में अमेरिका के एक अलग कदम को दिखाता है.
शिवानी शर्मा