देश की सड़कों पर रोज हजारों लोग स्लीपर बसों में सफर करते हैं, लेकिन क्या ये बसें सच में यात्रियों के लिए सुरक्षित हैं. ग्रेटर नोएडा में बुधवार-गुरुवार देर रात को हुए बस हादसे में नौ लोगों की जान चुकी है. जिससे एक बार फिर से बसों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आजतक की टीम ने दिल्ली, जयपुर और लखनऊ में चलने वाली स्लीपर और मोडिफाइड बसों का रियलिटी चेक किया और इसमें कई चौंकाने वाली खामियां सामने आईं.
कहीं इमरजेंसी एग्जिट का दरवाजा पूरी तरह जाम मिला, कहीं वह लॉक करके बंद कर दिया गया था. कुछ बसों में एग्जिट के ठीक सामने सीटें और सामान रखा मिला, जिससे रास्ता ही बंद हो गया था. सबसे हैरानी की बात यह रही कि कई बसों में आग लगने की हालत में शीशा तोड़कर बाहर निकलने वाला हैमर तक मौजूद नहीं था. कहीं फायर एक्सटिंग्विशर छोटा था तो कहीं उसकी एक्सपायरी डेट का कहीं अता-पता नहीं था. यह पूरी पड़ताल यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए हादसे के बाद की गई, जिसने बस यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दिल्ली से जम्मू-कटरा जाने वाली बस में एग्जिट ही जाम मिला
आशुतोष मिश्रा ने दिल्ली से जम्मू-कटरा वाया पंजाब जाने वाली एक बस की जांच की. इस बस में कई यात्री सवार थे. जांच में पता चला कि बस में सिर्फ एक ही इमरजेंसी एग्जिट था, लेकिन वह भी जाम और चोक हालत में था. यानी अगर कोई हादसा हो जाए तो यात्रियों के पास बाहर निकलने का कोई ठीक रास्ता ही नहीं बचता.
बस में फायर एक्सटिंग्विशर ड्राइवर की सीट के पीछे एक बॉक्स में बंद करके रखा गया था. ऐसी जगह पर रखने से अगर अचानक आग लगे तो उसे निकालने और इस्तेमाल करने में काफी समय लग सकता है, और आग के शुरुआती कुछ सेकेंड ही सबसे अहम होते हैं.
इसके अलावा बस की खिड़कियों की तरफ कोई भी इमरजेंसी एग्जिट नहीं बनाया गया था. शीशा तोड़कर निकलने के लिए जरूरी हैमर भी वहां नहीं रखे गए थे. जब टीम ने यह रियलिटी चेक पूरा किया, उसके बाद वह बस वहां से चली गई.
कश्मीरी गेट पर राज कल्पना बस का एग्जिट गेट मिला लॉक
सुशांत मेहरा ने यमुना एक्सप्रेसवे हादसे के बाद दिल्ली की सड़कों पर चल रही राज कल्पना कंपनी की बसों की पड़ताल की. कश्मीरी गेट पर किए गए इस रियलिटी चेक में बस के अंदर स्लीपर सीटें और यात्रियों के सोने की व्यवस्था तो ठीक दिखी, लेकिन सबसे गंभीर लापरवाही इमरजेंसी एग्जिट को लेकर सामने आई.
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बस में फायर एग्जिट गेट तो था, लेकिन वह लॉक मिला. इसके साथ ही शीशा तोड़कर बाहर निकलने के लिए कोई हैमर भी वहां मौजूद नहीं था. यानी अगर बस में हादसा हो जाए तो यात्रियों के लिए बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो सकता है.
आनंद विहार में सीट बढ़ाने के लिए बदल दी गई बस की बनावट
अमित भारद्वाज ने आनंद विहार बस टर्मिनल के पास एक निजी पार्किंग में खड़ी उन बसों की जांच की, जो दिल्ली से यूपी और पटना के बीच चलती हैं.
एक पनवार एक्सप्रेस बस में सवार यात्रियों ने बताया कि उनका सफर 26 घंटे का है और बस का AC भी काम नहीं कर रहा है. जांच में पता चला कि इस बस में इमरजेंसी एग्जिट के लिए दरवाजे की जगह सिर्फ एक खिड़की दी गई थी, और वह खिड़की भी खुल नहीं पा रही थी.
इस इमरजेंसी विंडो के ठीक सामने बोरे रखे हुए थे. सीटों के आसपास भी बोरे भरकर रखे गए थे, जिससे रास्ता और तंग हो गया था. जांच में यह भी सामने आया कि इस बस को पहले 2x1 सीट व्यवस्था से बदलकर 2x2 स्लीपर बस बना दिया गया था, यानी ज्यादा यात्री बिठाने के लिए बस की मूल बनावट में ही फेरबदल कर दिया गया.
सीटों के पास शीशा तोड़ने के लिए हैमर भी नहीं मिले. इसके अलावा हर सीट के पास लोहे की सीढ़ियां बढ़ाकर लगाई गई थीं, जो हादसे के वक्त घबराहट में यात्रियों के लिए परेशानी की वजह बन सकती हैं.
हालांकि इसी जांच के दौरान एक दूसरी मोडिफाइड बस अपेक्षाकृत बेहतर हालत में मिली. उस बस में हर सीट के पास हैमर रखे थे, इमरजेंसी दरवाजा ठीक से काम कर रहा था और CCTV कैमरा भी लगा हुआ था. इससे साफ है कि सुरक्षा के इंतजाम हर बस में अलग-अलग थे.
जयपुर में इमरजेंसी गेट बना सामान रखने की जगह
शरत कुमार ने जयपुर की सड़कों पर चलने वाली मोडिफाइड स्लीपर बसों की पड़ताल की. अहमदाबाद से जयपुर के बीच चलने वाली एक बस की जांच में फायर सिलेंडर ही गायब मिला. ड्राइवर की सीट के ऊपर और मुख्य गेट के पास, दोनों जगह लगे सिलेंडर वहां से नदारद थे.
इस बस के इमरजेंसी गेट के ठीक बाहर बिस्तर रखा हुआ था, जिससे रास्ता रुक गया था. साइड में बना इमरजेंसी गेट भी खुल नहीं रहा था.
जांच में शामिल दूसरी बस अहमदाबाद से जयपुर पहुंची थी और उसमें से इलेक्ट्रॉनिक्स का सामान उतारा जा रहा था. रियलिटी चेक में पता चला कि इस बस के दोनों इमरजेंसी गेट सामान रखने की जगह बन चुके थे. वहां ऐसे कार्टन रखे थे, जो आग लगने की स्थिति में तेजी से जल सकते हैं. जैसे ही आज तक की टीम ने पड़ताल शुरू की, बस वहां से भागकर निकल गई.
लखनऊ में भी मिले लॉक इमरजेंसी एग्जिट
आशीष श्रीवास्तव ने लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर में खड़ी कई स्लीपर बसों की जांच की. यहां कुछ बसों में इमरजेंसी एग्जिट के लिए विंडो तो लगाई गई थी, लेकिन कई बसों में ये खिड़कियां लॉक मिलीं. इसके अलावा पीछे के एग्जिट के ठीक सामने सीटें लगा दी गई थीं, जिससे आपात स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता ही बाधित हो जाता है.
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एक बस में पीछे की एग्जिट विंडो को खोलने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं खुली. उस एग्जिट के सामने भी सीट लगी हुई थी और शीशा तोड़ने के लिए कोई हैमर नहीं मिला. दूसरी बस में भी यही हाल था, पीछे की एग्जिट विंडो लॉक मिली और उसे खोलने की कोशिश नाकाम रही.
हालांकि इस दौरान कुछ बसों में जरूरी सुरक्षा उपकरण सही हालत में भी मिले, यानी हर बस की स्थिति एक जैसी नहीं थी.
यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
दिल्ली, जयपुर और लखनऊ में की गई इस पूरी पड़ताल में बसों की अलग-अलग तस्वीर सामने आई. कहीं इमरजेंसी एग्जिट लॉक मिला, कहीं सामान और सीटों की वजह से रास्ता ही बंद था, कहीं हैमर गायब था तो कहीं फायर सेफ्टी उपकरणों की हालत पर ही सवाल उठ खड़े हुए.
स्लीपर बसों में यात्रियों को सोने की सुविधा तो दी जाती है, लेकिन हादसे के समय सुरक्षित और तुरंत बाहर निकलने का रास्ता उतना ही जरूरी होता है. अब सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है कि अगर चलती बस में अचानक आग लग जाए या कोई और आपात स्थिति बन जाए, तो इन बसों में सफर कर रहे यात्री आखिर कितनी जल्दी और कितनी सुरक्षित तरीके से बाहर निकल पाएंगे.
आशुतोष मिश्रा / सुशांत मेहरा / आशीष श्रीवास्तव / शरत कुमार