चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं. कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने एक बार फिर ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रख रहा है और लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहा है.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चुनाव आयोग की ओर से जारी एक प्रेस नोट शेयर किया है. इसमें फॉर्म 6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की बात है. इसे लेकर राहुल गांधी ने कहा कि अब ये बात पूरी तरह साबित हो चुकी है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने अवैध और एकतरफा तरीके से 'फॉर्म 6' में बदलाव किया है.
उन्होंने कहा कि ये इस बात का एक और पुख्ता सबूत है कि वो अपने पद का गलत इस्तेमाल करके बीजेपी की मदद कर रहे हैं. राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र पर इस हमले में शामिल ज्ञानेश कुमार और बाकी सभी लोगों को इसकी जवाबदेही चुकानी होगी.
प्रियंका गांधी भी भड़कीं
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस मामले पर कड़ा रिएक्शन दिया है. दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में काटना हमारे संविधान और चुनावी प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है.
प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि कांग्रेस इस मनमानी के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है. जनता अब समझ चुकी है कि चुनावों में किस तरह हेरफेर की जा रही है और कांग्रेस इस नाइंसाफी के खिलाफ अपनी आवाज उठाना बंद नहीं करेगी.
जयराम रमेश के गंभीर आरोप
वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के 26 सितंबर 2026 के एक प्रेस नोट का हवाला देते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं .उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया बेहद कामचलाऊ, गैरकानूनी और लापरवाह तरीके से चलाई जा रही है. सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा और रिटायर्ड जजों ने भी इसकी आलोचना की है.
उन्होंने दावा किया कि सहीप्रक्रिया का पालन किए बिना अंधाधुंध तरीके से लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं. जयराम रमेश ने ये भी आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म 6 में बदलाव किए और शुरुआत में ऐसा संकेत दिया कि इन बदलावों को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली हुई है.
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कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के पहले CEC सुकुमार सेन जैसे दिग्गजों ने निष्पक्षता की जो शानदार विरासत छोड़ी थी, ज्ञानेश कुमार उस साख पर खरे नहीं उतरते. उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के इशारे पर कानून तोड़ा है और संविधान के साथ धोखाधड़ी की है.
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जवाब तलब किया है, हालांकि अभी कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया गया है
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