'H-1B वीजा पर प्रतिबंध भारत के खिलाफ नहीं', मार्को रुबियो बोले- अमेरिका अपने कामगारों को पहले रखेगा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के H-1B वीजा नियम भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी इमिग्रेशन व्यवस्था में अमेरिकी कामगारों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है.

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H-1B वीजा नियमों पर बोले मार्को रुबियो- भारत को निशाना बनाकर नहीं किए गए बदलाव. H-1B वीजा नियमों पर बोले मार्को रुबियो- भारत को निशाना बनाकर नहीं किए गए बदलाव.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:26 AM IST

अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीय पेशेवरों को प्रभावित करने वाले सख्त वर्क वीजा नियमों को लेकर चिंता के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन के H-1B वीजा प्रतिबंध भारत को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी इमिग्रेशन व्यवस्था में बदलाव करते हुए अमेरिकी कामगारों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है.

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आजतक को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि नए बदलावों का असर अमेरिका में नौकरी तलाश रहे भारतीयों और उन्हें नौकरी देने वाली अमेरिकी कंपनियों पर पड़ा है, लेकिन भारत को अलग से निशाना नहीं बनाया गया है. उन्होंने कहा, 'यह भारत पर आधारित नहीं है. यह भारत पर केंद्रित नहीं है. इसका असर उन भारतीयों पर पड़ता है जो अमेरिका आकर काम करना चाहते हैं और उन अमेरिकी कंपनियों पर भी पड़ता है जो उन्हें यहां लाने की कोशिश करती हैं. लेकिन यह भारत के खिलाफ नहीं है. यह पूरी दुनिया के लिए है.'

रुबियो से पूछा गया कि क्या अमेरिका को अपने औद्योगिक आधार को फिर से मजबूत करने के लिए अत्यधिक कुशल भारतीय पेशेवरों का स्वागत जारी रखना चाहिए. इस पर उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी इमिग्रेशन व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को दूर करने की कोशिश कर रहा है. इनमें कथित धोखाधड़ी, दुरुपयोग और अमेरिकी कामगारों के रोजगार के अवसर प्रभावित होने की चिंताएं शामिल हैं.

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रुबियो ने कहा कि अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था लंबे समय से खराब रही है. उन्होंने कहा कि बिजनेस से जुड़े इमिग्रेशन कार्यक्रमों में कई मामलों में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और दुरुपयोग हुआ है और इनका इस्तेमाल ऐसे तरीकों से किया गया, जो सही नहीं थे.उन्होंने कहा कि अमेरिका इन चिंताओं को दूर करने और ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है, जो उसकी अर्थव्यवस्था और नागरिकों के लिए काम करे. रुबियो ने दोहराया कि ये बदलाव भारत को निशाना बनाकर नहीं किए गए हैं और दुनिया के हर देश पर लागू होते हैं.

'अमेरिका अपने लोगों और कामगारों को पहले रखेगा'

रुबियो ने कहा कि जिन देशों पर अमेरिकी नीतियों में बदलाव का ज्यादा असर पड़ता है, उन्हें लग सकता है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने कहा कि ये कदम किसी एक देश के खिलाफ नहीं हैं.

उन्होंने कहा, 'मैं उम्मीद करता हूं कि भारत सरकार हमेशा भारत के लोगों को पहले रखेगी और भारत के राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देगी. लेकिन मैं यह भी उम्मीद करता हूं कि हर कोई समझेगा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका अपने लोगों, अपने कामगारों और अपने देश को पहले रखेगा.' उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन और व्यापार को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेदों को लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और साझा हितों के जरिए सुलझाया जा सकता है.

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सर्जियो गोर ने भी वीजा नियमों का बचाव किया

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी रुबियो के रुख का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि भारत को प्रभावित करने वाले ये बदलाव व्यापक स्तर पर अमेरिकी इमिग्रेशन व्यवस्था को बदलने की कोशिश का हिस्सा हैं और किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं किए गए हैं. गोर ने कहा, 'इन सभी बदलावों का असर भारत पर पड़ा है और यह सिर्फ भारत नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया है.' उन्होंने कहा कि 'America First' का मतलब 'America Alone' नहीं है और भारत को भी अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने का अधिकार है.

गोर ने कहा कि अमेरिका को अपनी इमिग्रेशन नीतियों की समीक्षा करने की जरूरत थी. उन्होंने लंबे समय तक सीमा पर नियंत्रण की कमी और अमेरिकी हितों की रक्षा में पिछली सरकारों की विफलताओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका में लंबे समय तक सीमाएं खुली रहीं और लोग इसका फायदा उठाते रहे.

भारतीय पेशेवरों पर बढ़ा असर

हाल में अमेरिका के H-1B वीजा नियमों में किए गए बदलावों से भारतीय पेशेवरों पर असर बढ़ा है. H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां विशेष योग्यता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों को नौकरी पर रखती हैं. H-1B वीजा धारकों में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए इन बदलावों का भारतीय टेक्नोलॉजी वर्कर्स, पेशेवरों और विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर कंपनियों पर खास असर पड़ता है.

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अमेरिका ने वीजा रिन्यूअल के लिए पहले से मंजूर H-1B एक्सटेंशन में 'deference policy' को हटा दिया है. इसका मतलब है कि पहले मंजूर किए गए H-1B एक्सटेंशन की भी अब अलग से कड़ी समीक्षा की जाएगी. इससे अमेरिका में पहले से काम कर रहे भारतीयों के लिए देरी और वीजा रिजेक्शन का जोखिम बढ़ गया है. नए ऑफशोर आवेदकों के लिए एंट्री प्रतिबंध सितंबर 2027 तक बढ़ा दिए गए हैं. इसके तहत अमेरिका के बाहर से दाखिल की जाने वाली कुछ नई याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर की फीस का प्रावधान बना हुआ है.
 

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