मर्सिडीज हिट-एंड-रन केस में जज के बेटे का नाम, कोच्चि पुलिस कमिश्नर का ट्रांसफर

जज के 17 साल के बेटे से जुड़े मर्सिडीज हादसे की जांच में चूक के बाद कोच्चि पुलिस कमिश्नर का तबादला कर दिया गया. दो बार जमानत, परिवार के विरोध और गलत धाराएं लगाने के आरोपों ने पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए.

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दुर्घटना 25 अक्टूबर को केरलम के कोच्चि में हुई थी. (Photo- ITG) दुर्घटना 25 अक्टूबर को केरलम के कोच्चि में हुई थी. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:11 PM IST

केरलम के कोच्चि में नाबालिग की मर्सिडीज-बेंज कार से हुए जानलेवा हादसे के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के बीच बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है. कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर कालिराज महेश कुमार का ट्रांसफर कर दिया गया है. 25 अक्टूबर को हुए इस हादसे में 55 साल के जयबालकृष्णन की मौत हो गई थी. कार 17 साल का एक नाबालिग चला रहा था, जो अतिरिक्त जिला जज का बेटा है.

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मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई और नाबालिग को दो बार जमानत मिलने के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया. परिवार ने केस को कमजोर करने की साजिश का आरोप भी लगाया है. केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विधानसभा में जांच में हुई चूकों को स्वीकार करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही.

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जज के घर पुलिस की छापेमारी

पुलिस कमिश्नर के ट्रांसफर से एक दिन पहले मंगलवार को पुलिस ने अतिरिक्त जिला जज के आवास की तलाशी ली और जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज जुटाए. इससे पहले सोमवार को केरल हाई कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद जज को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत आरोपी बनाया गया था. यह प्रावधान नाबालिग के अपराध के लिए उसके अभिभावक या वाहन के रजिस्टर्ड मालिक की जिम्मेदारी से जुड़ा है.

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पहले स्टेशन से मिली जमानत, फिर दोबारा हिरासत

हादसे के बाद पुलिस ने नाबालिग पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया था. रविवार शाम उसे पुलिस स्टेशन से ही जमानत दे दी गई. इसके बाद पीड़ित परिवार ने चेरानल्लूर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद नाबालिग को दोबारा हिरासत में लिया गया. उस पर गैर इरादतन हत्या से जुड़ी धारा 105 भी लगाई गई.

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पुलिस के मुताबिक, नाबालिग के बरामद वीडियो में कार करीब 104 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती दिखाई दे रही है. गृह मंत्री ने कहा कि पुलिस ने शुरुआत में गैर इरादतन हत्या से जुड़ी उचित कानूनी धारा नहीं लगाई थी. उन्होंने बताया कि चार पुलिसकर्मियों, जिनमें सर्किल इंस्पेक्टर, थाना प्रभारी, ग्रेड सब-इंस्पेक्टर और असिस्टेंट सिविल पुलिस ऑफिसर शामिल हैं, को निलंबित किया गया है.

नाबालिग को दोबारा जमानत मिलने और अंतिम संस्कार से पहले जमानत दिए जाने पर गृह मंत्री ने किशोर न्याय बोर्ड की भी आलोचना की. इस मामले को लेकर विधानसभा में राजनीतिक टकराव हुआ और विपक्ष ने वॉकआउट किया. संवेदनशीलता को देखते हुए जांच जिला क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है.

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